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सेटेलाइट से आग पर निगरानी
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अब सेटेलाइट से हो रही आग पर निगरानी
झांसी। जिले में अब आग लगने की घटनाओं पर सेटेलाइट के जरिये से निगरानी की जा रही है। इसके लिए फारेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया ने फारेस्ट फायर मानीटरिंग सिस्टम एप को तैयार किया है, जो सेटेलाइट की मदद से कहीं भी आग लगने पर सबसे पहले वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को एलर्ट संदेश पहुंचाता है।
झांसी में वन क्षेत्र काफी फैला हुआ है। गर्मियों के सीजन में आग लगने की अक्सर छोटी - बड़ी घटनाएं होती रहती है। इन पर तत्काल काबू पाया जा सके और पशु व स्थानीय समुदायों को नुकसान न हो, इसके लिए फारेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया ने यह एप तैयार किया है, जिसकी दो यूनिट एमओडीआईएस और एसएनपीपी से मानीटरिंग करती है और इसके जरिये वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को सीधे सूचना भी प्राप्त होती है। प्रदेश के कई अन्य जिलों की तरह झांसी के वन विभाग 11 अधिकारियों वन संरक्षक, डीएफओ, डिप्टी डीएफ ओ, वन रेंजर व 35 कर्मचारियों के सीयूजी नंबरों को जोड़ा गया है। हाल ही में मोंठ के एक खेत में आग लगने की सूचना इस एप के जरिये विभाग के अधिकारियों को प्राप्त हुई थी। डीएफओ डॉ. मनोज कुमार शुक्ला ने बताया कि आग लगने की सूचना प्राप्त होने पर विभाग पुष्टि करता है कि यह वन्य क्षेत्र में लगी है अथवा कहीं और लगी है। इसके साथ ही आग लगने की सूचना फायर ब्रिगेड को भी दी जाती है।
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झांसी। जिले में अब आग लगने की घटनाओं पर सेटेलाइट के जरिये से निगरानी की जा रही है। इसके लिए फारेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया ने फारेस्ट फायर मानीटरिंग सिस्टम एप को तैयार किया है, जो सेटेलाइट की मदद से कहीं भी आग लगने पर सबसे पहले वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को एलर्ट संदेश पहुंचाता है।
झांसी में वन क्षेत्र काफी फैला हुआ है। गर्मियों के सीजन में आग लगने की अक्सर छोटी - बड़ी घटनाएं होती रहती है। इन पर तत्काल काबू पाया जा सके और पशु व स्थानीय समुदायों को नुकसान न हो, इसके लिए फारेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया ने यह एप तैयार किया है, जिसकी दो यूनिट एमओडीआईएस और एसएनपीपी से मानीटरिंग करती है और इसके जरिये वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को सीधे सूचना भी प्राप्त होती है। प्रदेश के कई अन्य जिलों की तरह झांसी के वन विभाग 11 अधिकारियों वन संरक्षक, डीएफओ, डिप्टी डीएफ ओ, वन रेंजर व 35 कर्मचारियों के सीयूजी नंबरों को जोड़ा गया है। हाल ही में मोंठ के एक खेत में आग लगने की सूचना इस एप के जरिये विभाग के अधिकारियों को प्राप्त हुई थी। डीएफओ डॉ. मनोज कुमार शुक्ला ने बताया कि आग लगने की सूचना प्राप्त होने पर विभाग पुष्टि करता है कि यह वन्य क्षेत्र में लगी है अथवा कहीं और लगी है। इसके साथ ही आग लगने की सूचना फायर ब्रिगेड को भी दी जाती है।
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