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स्वाइन फ्लू से महिला की मौत, डॉक्टरों की टीम घर पहुंची-City
Updated Fri, 25 Aug 2017 09:35 PM IST
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स्वाइन फ्लू से महिला की मौत के बाद चेता स्वास्थ्य महकमा
- पारिवारिक सदस्यों में नहीं हुई बीमारी की पुष्टि
- शहर में मौजूदा वर्ष में इस बीमारी से पहली मौत
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
जनपद में इस साल स्वाइन फ्लू से पहली मौत हुई है। शुक्रवार को डॉक्टरों की टीम ने मृतक महिला के घर जाकर परिजनों से उनके स्वास्थ्य से संबंधित पूछताछ की। कोई भी पारिवारिक सदस्य स्वाइन फ्लू से पीड़ित नहीं मिलने पर टीम लौट आई।
गौरतलब है कि बड़ाबाजार निवासी सावित्री स्वाइन फ्लू की चपेट में आ गई थीं। इसके बाद उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर होने पर अस्पताल से उन्हें रेफर कर दिया गया। उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। परिजन इलाज कराने के लिए उन्हें दिल्ली ले गए। जहां तीन दिन पहले उनकी मौत हो गई। इसकी सूचना मिलने पर शुक्रवार को डॉ. डीएस गुप्ता, डॉ. सुशील कुमार, डॉ. अजय सक्सेना समेत डॉक्टरों की टीम सावित्री के घर पहुंची। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बीके गुप्ता ने बताया कि टीम ने पारिवारिक सदस्यों से स्वास्थ्य संबंधी पूछताछ की। परिजनों में किसी प्रकार के स्वाइन फ्लू का लक्षण नहीं मिलने पर टीम लौट आई।
क्या है स्वाइन फ्लू
स्वाइन फ्लू श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारी है। जो ए टाइप के इनफ्युएंजा वायरस से होती है। यह वायरस एच-1 एन-1 के नाम से जाना जाता है। मौसमी फ्लू में भी यह वायरस सक्रिय हो जाता है। इसके वायरस सबसे ज्यादा सुअरों में पाए जाते हैं, इसलिए इसको स्वाइन फ्लू नाम दिया गया।
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ऐसे फैलता है वायरस
खांसने या छींकने पर हवा में या जमीन पर, किसी भी सतह पर थूकने पर मुंह या नाक से निकले द्रव कण गिरते हैं, वह वायरस की चपेट में आ जाता है। यह कण हवा के द्वारा या किसी के छूने से दूसरे व्यक्ति के शरीर में मुंह या नाक के जरिए प्रवेश कर जाते हैं। दरवाजे, फोन, कीबोर्ड आदि के जरिए भी वायरस फैलता है अगर इनका इस्तेमाल किसी संक्रमित व्यक्ति ने किया हो।
ये हैं शुरूआती लक्षण
- नाक का लगातार बहना, छींक आना, नाक जाम होना।
- मांसपेशियों में दर्द या अकड़न महसूस होना।
- सिर में भयानक दर्द
- लगातार खांसी आना।
- बहुत थकान महसूस होना।
- बुखार होना, दवा खाने के बाद भी बुखार बढ़ना।
- गले में खराश होना और इसका लगातार बढ़ना।
घंटों सक्रिय रहता है वायरस
एच-1 एन-1 वायरस स्टील, प्लास्टिक में 24 से 48 घंटे, कपड़े और पेपर में 8 से 12 घंटे, टिश्यू पेपर में 15 मिनट, हाथों में 30 मिनट तक सक्रिय रहता है। इन्हें खत्म करने के लिए डिटर्जेंट, ब्लीच या साबुन का इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं, किसी भी मरीज में बीमारी के लक्षण इंफेक्शन के बाद एक से सात दिन में डेवलप हो सकते हैं। लक्षण देखने के 24 घंटे पहले और आठ दिन बाद तक किसी और में वायरस के ट्रांसमिशन का खतरा रहता है।
बच्चे, बुजुर्ग होते ज्यादा प्रभावित
- पांच साल से कम उम्र के बच्चे और 65 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग।
- फेफड़ों, किडनी, डायबिटीज या दिल की बीमारी का शिकार मरीज।
- ऐसे लोग जिन्हें पिछले तीन साल से कभी अस्थमा की शिकायत रही हो या अभी भी हो।
- हारमोन संबंधी बदलाव के कारण गर्भवती महिलाओं को भी बीमारी प्रभावित कर सकती है।
ऐसे करें बचाव
- साफ-सफाई का ध्यान रखें और फ्लू के शुरूआती लक्षण दिखते ही सावधानी बरतें।
- जब भी खांसी या छींक आए तो रूमाल या टिश्यू पेपर का इस्तेमाल करें।
- इस्तेमाल किए गए मास्क या टिश्यू पेपर को ढक्कन वाले डस्टबिन में रखें।
- थोड़ी-थोड़ी देर में हाथ साबुन और पानी से धोते रहें।
- फ्लू के शुरूआती लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करें।
- अगर फ्लू के लक्षण मिलने पर दूसरों से एक मीटर की दूरी पर रहें और घर पर रहें।
ज्यादा देरी पर जा सकती जान
स्वाइन फ्लू से पीड़ित मरीज की ए, बी और सी कैटेगरी होती है। सी कैटेगरी में पहुंचने वाले मरीज को सांस लेने में बहुत समस्या हो जाती है और वह वेंटिलेटर पर पहुंच जाता है। सी कैटेगरी के मरीजों की जान बचनेे की संभावना बहुत कम हो जाती है। ऐसे में डॉक्टर के पास जाने में देरी नहीं करनी चाहिए। स्वाइन फ्लू के मरीज के इलाज को टेमीफ्लू दवा दी जाती है।
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- पारिवारिक सदस्यों में नहीं हुई बीमारी की पुष्टि
- शहर में मौजूदा वर्ष में इस बीमारी से पहली मौत
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
जनपद में इस साल स्वाइन फ्लू से पहली मौत हुई है। शुक्रवार को डॉक्टरों की टीम ने मृतक महिला के घर जाकर परिजनों से उनके स्वास्थ्य से संबंधित पूछताछ की। कोई भी पारिवारिक सदस्य स्वाइन फ्लू से पीड़ित नहीं मिलने पर टीम लौट आई।
गौरतलब है कि बड़ाबाजार निवासी सावित्री स्वाइन फ्लू की चपेट में आ गई थीं। इसके बाद उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर होने पर अस्पताल से उन्हें रेफर कर दिया गया। उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। परिजन इलाज कराने के लिए उन्हें दिल्ली ले गए। जहां तीन दिन पहले उनकी मौत हो गई। इसकी सूचना मिलने पर शुक्रवार को डॉ. डीएस गुप्ता, डॉ. सुशील कुमार, डॉ. अजय सक्सेना समेत डॉक्टरों की टीम सावित्री के घर पहुंची। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बीके गुप्ता ने बताया कि टीम ने पारिवारिक सदस्यों से स्वास्थ्य संबंधी पूछताछ की। परिजनों में किसी प्रकार के स्वाइन फ्लू का लक्षण नहीं मिलने पर टीम लौट आई।
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क्या है स्वाइन फ्लू
स्वाइन फ्लू श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारी है। जो ए टाइप के इनफ्युएंजा वायरस से होती है। यह वायरस एच-1 एन-1 के नाम से जाना जाता है। मौसमी फ्लू में भी यह वायरस सक्रिय हो जाता है। इसके वायरस सबसे ज्यादा सुअरों में पाए जाते हैं, इसलिए इसको स्वाइन फ्लू नाम दिया गया।
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ऐसे फैलता है वायरस
खांसने या छींकने पर हवा में या जमीन पर, किसी भी सतह पर थूकने पर मुंह या नाक से निकले द्रव कण गिरते हैं, वह वायरस की चपेट में आ जाता है। यह कण हवा के द्वारा या किसी के छूने से दूसरे व्यक्ति के शरीर में मुंह या नाक के जरिए प्रवेश कर जाते हैं। दरवाजे, फोन, कीबोर्ड आदि के जरिए भी वायरस फैलता है अगर इनका इस्तेमाल किसी संक्रमित व्यक्ति ने किया हो।
ये हैं शुरूआती लक्षण
- नाक का लगातार बहना, छींक आना, नाक जाम होना।
- मांसपेशियों में दर्द या अकड़न महसूस होना।
- सिर में भयानक दर्द
- लगातार खांसी आना।
- बहुत थकान महसूस होना।
- बुखार होना, दवा खाने के बाद भी बुखार बढ़ना।
- गले में खराश होना और इसका लगातार बढ़ना।
घंटों सक्रिय रहता है वायरस
एच-1 एन-1 वायरस स्टील, प्लास्टिक में 24 से 48 घंटे, कपड़े और पेपर में 8 से 12 घंटे, टिश्यू पेपर में 15 मिनट, हाथों में 30 मिनट तक सक्रिय रहता है। इन्हें खत्म करने के लिए डिटर्जेंट, ब्लीच या साबुन का इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं, किसी भी मरीज में बीमारी के लक्षण इंफेक्शन के बाद एक से सात दिन में डेवलप हो सकते हैं। लक्षण देखने के 24 घंटे पहले और आठ दिन बाद तक किसी और में वायरस के ट्रांसमिशन का खतरा रहता है।
बच्चे, बुजुर्ग होते ज्यादा प्रभावित
- पांच साल से कम उम्र के बच्चे और 65 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग।
- फेफड़ों, किडनी, डायबिटीज या दिल की बीमारी का शिकार मरीज।
- ऐसे लोग जिन्हें पिछले तीन साल से कभी अस्थमा की शिकायत रही हो या अभी भी हो।
- हारमोन संबंधी बदलाव के कारण गर्भवती महिलाओं को भी बीमारी प्रभावित कर सकती है।
ऐसे करें बचाव
- साफ-सफाई का ध्यान रखें और फ्लू के शुरूआती लक्षण दिखते ही सावधानी बरतें।
- जब भी खांसी या छींक आए तो रूमाल या टिश्यू पेपर का इस्तेमाल करें।
- इस्तेमाल किए गए मास्क या टिश्यू पेपर को ढक्कन वाले डस्टबिन में रखें।
- थोड़ी-थोड़ी देर में हाथ साबुन और पानी से धोते रहें।
- फ्लू के शुरूआती लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करें।
- अगर फ्लू के लक्षण मिलने पर दूसरों से एक मीटर की दूरी पर रहें और घर पर रहें।
ज्यादा देरी पर जा सकती जान
स्वाइन फ्लू से पीड़ित मरीज की ए, बी और सी कैटेगरी होती है। सी कैटेगरी में पहुंचने वाले मरीज को सांस लेने में बहुत समस्या हो जाती है और वह वेंटिलेटर पर पहुंच जाता है। सी कैटेगरी के मरीजों की जान बचनेे की संभावना बहुत कम हो जाती है। ऐसे में डॉक्टर के पास जाने में देरी नहीं करनी चाहिए। स्वाइन फ्लू के मरीज के इलाज को टेमीफ्लू दवा दी जाती है।