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जिले में सिर्फ 11,241 शादियां ही हैं पंजीकृत
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झांसी। विवाह का पंजीकरण पासपोर्ट-वीजा हासिल करने का दस्तावेज भर बनकर रह गया है। जी हां, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जिले में महज 11,241 लोगों ने ही अपनी शादी का पंजीकरण कराया है। प्रदेश सरकार द्वारा चार साल पहले अनिवार्य किए जाने के बाद भी इसमें तेजी नहीं आई है।
वैसे तो विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया एक दशक से अधिक पुरानी है, परंतु पहले हिंदू विवाह का ही पंजीकरण होता था। लेकिन, उत्तर प्रदेश सरकार ने फरवरी 2017 में विवाह का पंजीकरण कराना सभी के लिए अनिवार्य कर दिया था। बावजूद, इसके आंकड़ों में कोई ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है। अनिवार्य किए जाने के बाद से चार साल के दरम्यान में जिले में महज 2,914 लोगों ने ही अपनी शादी को कानूनी जामा पहनाया है। जबकि, अब तक जिले में महज 11,241 शादियों का ही पंजीकरण हुआ है। इनमें भी ज्यादातर वे लोग हैं, जिन्हें पासपोर्ट - वीजा हासिल करने के लिए विवाह के पंजीकरण प्रमाण पत्र की आवश्यकता महसूस हुई। जबकि, इसकी प्रक्रिया बेहद आसान है। इसके लिए किसी भी साइबर कैफे या जनसेवा केंद्र पर जाकर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर और महज 50 रुपये अदा कर विवाह का पंजीकरण कराया जा सकता है। बावजूद, लोेगों में इसे लेकर जागरूकता नहीं है।
पंजीकरण के कई हैं लाभ
झांसी। विवाह पंजीकरण के तमाम लाभ हैं। खासतौर पर महिलाओं को ये ज्यादा सहूलियत देने वाला है। इसके जरिये बाल विवाह पर लगाम लगाई जा सकती है। पति या पत्नी के जीवित रहते हुए दूसरी शादी पर लगाम लगाई जा सकती है। कोई अपनी पत्नी को बगैर कानूनी प्रक्रिया के तलाक नहीं दे सकता। पति के न रहने पर पत्नी को उसका हक और क्लेम हासिल करने में आसानी होती है। साथ ही पंजीकरण शादी को कानूनी जामा पहनाता है।
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आसान है प्रक्रिया
झांसी। विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया बेहद आसान है। ऑनलाइन आवेदन व ऑनलाइन ही फीस जमा की जा सकती है। इसके लिए नवीन फोटो 40 केवी से कम साइज में जेपीजी फॉर्मेट में होना जरूरी है। इसके अलावा पहचान प्रमाण पत्र, आयु प्रमाण पत्र व निवास प्रमाण पत्र भी देना होता है। आवेदन के बाद आवंटित तिथि पर एक बार रजिस्ट्री दफ्तर आना होगा। दफ्तर में ही बायोमेट्रिक अंगूठे की छाप और फोटो ली जाती है, जो सर्टिफिकेट पर दर्ज होती है। सब रजिस्ट्रार के सामने यह बताना होता है कि शादी कब और कहां की। दो गवाह की जरूरत होती है।
पिछले चार साल के पंजीकरण के आंकड़े
-----------------------------------
2017 - 637
2018 - 1135
2019 - 954
2020 - 198
विवाह पंजीकरण शादी का एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रमाण होता है। इसकी प्रक्रिया भी बेहद आसान है। साथ ही फीस भी महज 50 रुपये है। प्रदेश सरकार ने सभी के लिए फरवरी 2017 से अनिवार्य कर रखा है।
- विवेक श्रीवास्तव, सब रजिस्ट्रार
विवाह का पंजीकरण कराने ज्यादातर वही लोग आते हैं, जिन्हें पत्नी को अपने साथ बाहर ले जाने के लिए पासपोर्ट - वीजा की आवश्यकता होती है। इसे लेकर लोगों में अभी जागरूकता का अभाव है।
- लक्ष्मण प्रसाद शर्मा, एडवोकेट
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वैसे तो विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया एक दशक से अधिक पुरानी है, परंतु पहले हिंदू विवाह का ही पंजीकरण होता था। लेकिन, उत्तर प्रदेश सरकार ने फरवरी 2017 में विवाह का पंजीकरण कराना सभी के लिए अनिवार्य कर दिया था। बावजूद, इसके आंकड़ों में कोई ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है। अनिवार्य किए जाने के बाद से चार साल के दरम्यान में जिले में महज 2,914 लोगों ने ही अपनी शादी को कानूनी जामा पहनाया है। जबकि, अब तक जिले में महज 11,241 शादियों का ही पंजीकरण हुआ है। इनमें भी ज्यादातर वे लोग हैं, जिन्हें पासपोर्ट - वीजा हासिल करने के लिए विवाह के पंजीकरण प्रमाण पत्र की आवश्यकता महसूस हुई। जबकि, इसकी प्रक्रिया बेहद आसान है। इसके लिए किसी भी साइबर कैफे या जनसेवा केंद्र पर जाकर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर और महज 50 रुपये अदा कर विवाह का पंजीकरण कराया जा सकता है। बावजूद, लोेगों में इसे लेकर जागरूकता नहीं है।
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पंजीकरण के कई हैं लाभ
झांसी। विवाह पंजीकरण के तमाम लाभ हैं। खासतौर पर महिलाओं को ये ज्यादा सहूलियत देने वाला है। इसके जरिये बाल विवाह पर लगाम लगाई जा सकती है। पति या पत्नी के जीवित रहते हुए दूसरी शादी पर लगाम लगाई जा सकती है। कोई अपनी पत्नी को बगैर कानूनी प्रक्रिया के तलाक नहीं दे सकता। पति के न रहने पर पत्नी को उसका हक और क्लेम हासिल करने में आसानी होती है। साथ ही पंजीकरण शादी को कानूनी जामा पहनाता है।
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आसान है प्रक्रिया
झांसी। विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया बेहद आसान है। ऑनलाइन आवेदन व ऑनलाइन ही फीस जमा की जा सकती है। इसके लिए नवीन फोटो 40 केवी से कम साइज में जेपीजी फॉर्मेट में होना जरूरी है। इसके अलावा पहचान प्रमाण पत्र, आयु प्रमाण पत्र व निवास प्रमाण पत्र भी देना होता है। आवेदन के बाद आवंटित तिथि पर एक बार रजिस्ट्री दफ्तर आना होगा। दफ्तर में ही बायोमेट्रिक अंगूठे की छाप और फोटो ली जाती है, जो सर्टिफिकेट पर दर्ज होती है। सब रजिस्ट्रार के सामने यह बताना होता है कि शादी कब और कहां की। दो गवाह की जरूरत होती है।
पिछले चार साल के पंजीकरण के आंकड़े
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2017 - 637
2018 - 1135
2019 - 954
2020 - 198
विवाह पंजीकरण शादी का एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रमाण होता है। इसकी प्रक्रिया भी बेहद आसान है। साथ ही फीस भी महज 50 रुपये है। प्रदेश सरकार ने सभी के लिए फरवरी 2017 से अनिवार्य कर रखा है।
- विवेक श्रीवास्तव, सब रजिस्ट्रार
विवाह का पंजीकरण कराने ज्यादातर वही लोग आते हैं, जिन्हें पत्नी को अपने साथ बाहर ले जाने के लिए पासपोर्ट - वीजा की आवश्यकता होती है। इसे लेकर लोगों में अभी जागरूकता का अभाव है।
- लक्ष्मण प्रसाद शर्मा, एडवोकेट