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थर्मल पावर प्लांट की 35 साल पुरानी 110 मेगावाट की उत्पादन इकाई बंद
Fri, 03 Jan 2020 03:34 AM IST
झांसी ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
Published by: झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jan 2020 03:34 AM IST
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उत्पादन इकाई बंद
- फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन ने पारीछा थर्मल पावर प्लांट की एक के बाद दूसरी 110 मेगावाट की इकाई को भी हमेशा के लिए बंद कर दिया है। इस इकाई को 1985 में स्थापित किया गया था। 110 मेगावाट की नंबर एक इकाई को जुलाई 2016 में बंद कर दिया गया था। वर्तमान में प्लांट में 210 मेगावाट की दो व 250 मेगावाट की दो इकाइयां स्थापित हैं, जिनसे उत्पादन हो रहा है।
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प्रदेश में सर्दियों में करीब 17 हजार और गर्मियों में 20 हजार मेगावाट बिजली की मांग चल रही है। इसमें प्रदेश सरकार के पारीछा, ओबरा, पनकी, हरदुआ गंज और अनपरा पावर प्लांट से चार से साढ़े चार हजार मेगावाट की बिजली बन पा रही हैं।
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बाकी बिजली प्राइवेट कंपनियों और एनटीपीसी से खरीदी जा रही है। प्राइवेट कंपनियों ने 660 मेगावाट से अधिक की यूनिटें लगा रखी हैं, जिससे बिजली एक साथ बड़ी मांग उपलब्ध हो जाती हैं। नई मशीनें होने से उत्पादन भी सस्ता पड़ रहा है।
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यही कारण है कि पावर सेक्टर ने डिमांड कम बताकर अपनी पुरानी इकाइयों को एक के बाद एक बंद करना शुरू कर दिया है। बताया गया है कि उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन करोड़ों रुपये के घाटे में चल रहा है।
हां, यह बात सही है कि मुख्यालय के आदेश पर प्लांट में स्थापित 110 मेगावाट की दो नंबर इकाई को बंद कर दिया गया है। इकाई से उत्पादन महंगा पड़ रहा था। पर्यावरण के नियमों का पालन करना भी मुश्किल हो रहा था।
मुख्यालय ने इस इकाई को हमेशा के लिए खत्म (डिलीट) करने के लिए सरकार को पत्र लिख दिया है। सरकार की संस्तुति (क्लीयरेंस) मिलते ही इसको हमेशा के लिए बंद माना जाएगा।
-आरसी श्रीवास्तव, मुख्य महाप्रबंधक, पारीछा थर्मल पावर प्लांट
ये भी कारण
- पुरानी मशीनों का रखरखाव बढ़ गया था।
- एश (राख) रखने के लिए नए डैम नहीं।
- मशीनों से पूर्ण क्षमता के साथ नहीं हो पाता उत्पादन।
- रांची, धनबाद से कोयला मंगाना पड़ रहा मंहगा।
- पर्यावरण के नियमों का पालन करना भी होता है मुश्किल।
तीन सौ मजदूरों के सामने खड़ा हो जाएगा रोजगार का संकट
पारीछा थर्मल पावर प्लांट से आठ हजार लोग परोक्ष और अपरोक्ष रूप से जुड़े हैं। प्लांट में 1400 कर्मचारी और अधिकारी तैनात हैं। बाकी ठेकेदार के मजदूर कोयले को भरने से लेकर मशीन के अंदर तक रखरखाव के काम में लगे हैं। आसपास के 12 गांव से हर दूसरे परिवार का कोई न कोई सदस्य ठेकेदार के अंडर में काम करता है। बिहार के मजदूर बड़ी संख्या में यहां काम करते हैं। पारीछा का बाजार भी प्लांट में काम करने वाले लोगों से चलता है। इस प्लांट के बंद होने से ठेकेदार के तीन सौ मजदूरों के समक्ष रोजगार का संकट खड़ा होना तय है।
90 लाख की पड़ती है एक रैक
पारीछा थर्मल पावर प्लांट की सभी इकाइयों को चलाने के लिए प्रतिदिन चार से पांच मालगाड़ी (रैक) कोयले की आवश्यकता है। एक रैक में 3600 टन कोयला आता है, जो लगभग 90 लाख का पड़ता है। हर महीने पांच से छह लाख टन राख निकलती है, जिसमें अभी एक लाख टन की कंपनी और फैक्ट्री संचालक अपने उपयोग के लिए ले जा रहे हैं।