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इंसीनेटर में नहीं लगाए टायल्स
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आधा अधूरा बनाकर छोड़ दिया इंस्टीनेटर
झांसी। जनपद के उच्च प्राथमिक स्कूलों में उपयोग हो चुके सेनेटरी पैड्स और कूड़ा निस्तारण के लिए इंसीनेटर बनाए गए हैं लेकिन कई स्कूलों में इन्हें आधा अधूरा बनाकर छोड़ दिया गया है। इनमें टायल्स भी नहीं लगाए गए है। ऐसे में फोटो सहित सूचना देने के निर्देश स्कूलों को दिए गए हैं। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। जनपद में वर्ष 2018 - 19 में 111 इंस्टीनेटर बनाने को आठ - आठ हजार रुपये आए थे।
विद्यालय में स्वच्छता अभियान को बढ़ावा मिले, इस उद्देश्य से समग्र शिक्षा के तहत उच्च प्राइमरी स्कूलों में 111 इंस्टीनेटर बनाने को धनराशि आई थी। इसमें दो फुट लंबा, दो फुट चौड़ा और चार फुट ऊंचा इंसीनेटर भट्टी और डस्टबिन के रूप में रहता है। इसमें छात्राओं द्वारा उपयोग किए गए सेनेटरी पैड्स और कूड़ा का निस्तारण होता है। इसी प्रकार से बीते वर्ष 2017 - 18 में 172 इंसीनेटर बनाए गए थे। वर्ष 2018 - 19 में 111 इंसीनेटर में बबीना में सर्वाधिक 52, बामौर में 48 बनाए गए हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार कई स्कूलों में इनका निर्माण कार्य अधूरा छोड़ दिया गया है। इनकी सुंदरता के लिए टायल्स भी नहीं लगाए गए हैं। इससे इनका उपयोग भी ठीक से नहीं हो पा रहा है। जिला समन्वयक निर्माण रमेश चंद्र के अनुसार इंसीनेटर निर्माण की सूचनाएं प्राप्त हुई हैं। इनके सत्यापन के लिए सभी खंड शिक्षाधिकारियों से फोटो भी मंगवाई गई हैं, जो शासन को भेजी जाएगी।
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झांसी। जनपद के उच्च प्राथमिक स्कूलों में उपयोग हो चुके सेनेटरी पैड्स और कूड़ा निस्तारण के लिए इंसीनेटर बनाए गए हैं लेकिन कई स्कूलों में इन्हें आधा अधूरा बनाकर छोड़ दिया गया है। इनमें टायल्स भी नहीं लगाए गए है। ऐसे में फोटो सहित सूचना देने के निर्देश स्कूलों को दिए गए हैं। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। जनपद में वर्ष 2018 - 19 में 111 इंस्टीनेटर बनाने को आठ - आठ हजार रुपये आए थे।
विद्यालय में स्वच्छता अभियान को बढ़ावा मिले, इस उद्देश्य से समग्र शिक्षा के तहत उच्च प्राइमरी स्कूलों में 111 इंस्टीनेटर बनाने को धनराशि आई थी। इसमें दो फुट लंबा, दो फुट चौड़ा और चार फुट ऊंचा इंसीनेटर भट्टी और डस्टबिन के रूप में रहता है। इसमें छात्राओं द्वारा उपयोग किए गए सेनेटरी पैड्स और कूड़ा का निस्तारण होता है। इसी प्रकार से बीते वर्ष 2017 - 18 में 172 इंसीनेटर बनाए गए थे। वर्ष 2018 - 19 में 111 इंसीनेटर में बबीना में सर्वाधिक 52, बामौर में 48 बनाए गए हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार कई स्कूलों में इनका निर्माण कार्य अधूरा छोड़ दिया गया है। इनकी सुंदरता के लिए टायल्स भी नहीं लगाए गए हैं। इससे इनका उपयोग भी ठीक से नहीं हो पा रहा है। जिला समन्वयक निर्माण रमेश चंद्र के अनुसार इंसीनेटर निर्माण की सूचनाएं प्राप्त हुई हैं। इनके सत्यापन के लिए सभी खंड शिक्षाधिकारियों से फोटो भी मंगवाई गई हैं, जो शासन को भेजी जाएगी।
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