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रेलवे कालोनी में कमरे की छत का हिस्सा गिरा
Updated Mon, 17 Jul 2017 01:54 AM IST
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रेलवे कालोनी में कमरे की छत का हिस्सा गिरा
तालबेहट। रविवार को रेलवे कालोनी में एक कमरे की छत का कुछ भाग रात में अचानक गिर गया। हादसे में कमरे में अपनी मां के साथ सो रही चार माह की मासूम लड़की बाल-बाल बच गई।
रेलवे स्टेशन पर कर्मचारियों के रहने के लिए कमरा बने हुए है। इन कमरों में कुछ कमरे तो इतने जर्जर स्थिति में है जो रहने लायक नहीं है। लेकिन फिर भी विभागीय कर्मचारी इसमें रहने को मजबूर है। झारखंड के टाटा नगर निवासी मंगल हसदा पुत्र बाबूलाल हसदा सिग्नल इंस्पेक्टर के पद पर तालबेहट में कार्यरत है। वह कमरा नंबर आरबी - थ्री - 26 ए में रहता है। प्रति दिन की तरह शनिवार की रात वह कमरे में सो रहा था। पास ही दूसरे पलंग पर उनकी पत्नी मृदला अपनी चार माह की बेटी के साथ लेटी थी। अचानक रात में ग्यारह बजे के कमरे की छत का कुछ हिस्सा गिरा। जिसके चपेट में आने से मृदला को हल्की चोट आई।
इस संबंध में कमरे में रहने वाले मंगल हसदा का कहना है कि वह 5 जनवरी 2015 से उक्त भवन में निवास कर रहे है। भवन की जर्जर हालत के संबंध में वह कई बार उच्चाधिकारियों को बता चुके है।
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इनका कहना है
ऐसे घरों में रहते ही क्यों हो
शनिवार को रेलवे कालोनी में गिरी छत के मामले में आईओडब्लू (कार्य निरीक्षक) का कहना है पिछले साल की इन कमरों का मेंटीनेंस कराया गया था। इतनी जल्दी छत के खराब होने का सवाल की पैदा नहीं होता है। और अगर गिर भी गई तो उन्होंने कहा कि जब कमरे जर्जर है तो ऐसे कमरों में रहते ही क्यों हो।
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तालबेहट। रविवार को रेलवे कालोनी में एक कमरे की छत का कुछ भाग रात में अचानक गिर गया। हादसे में कमरे में अपनी मां के साथ सो रही चार माह की मासूम लड़की बाल-बाल बच गई।
रेलवे स्टेशन पर कर्मचारियों के रहने के लिए कमरा बने हुए है। इन कमरों में कुछ कमरे तो इतने जर्जर स्थिति में है जो रहने लायक नहीं है। लेकिन फिर भी विभागीय कर्मचारी इसमें रहने को मजबूर है। झारखंड के टाटा नगर निवासी मंगल हसदा पुत्र बाबूलाल हसदा सिग्नल इंस्पेक्टर के पद पर तालबेहट में कार्यरत है। वह कमरा नंबर आरबी - थ्री - 26 ए में रहता है। प्रति दिन की तरह शनिवार की रात वह कमरे में सो रहा था। पास ही दूसरे पलंग पर उनकी पत्नी मृदला अपनी चार माह की बेटी के साथ लेटी थी। अचानक रात में ग्यारह बजे के कमरे की छत का कुछ हिस्सा गिरा। जिसके चपेट में आने से मृदला को हल्की चोट आई।
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इस संबंध में कमरे में रहने वाले मंगल हसदा का कहना है कि वह 5 जनवरी 2015 से उक्त भवन में निवास कर रहे है। भवन की जर्जर हालत के संबंध में वह कई बार उच्चाधिकारियों को बता चुके है।
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इनका कहना है
ऐसे घरों में रहते ही क्यों हो
शनिवार को रेलवे कालोनी में गिरी छत के मामले में आईओडब्लू (कार्य निरीक्षक) का कहना है पिछले साल की इन कमरों का मेंटीनेंस कराया गया था। इतनी जल्दी छत के खराब होने का सवाल की पैदा नहीं होता है। और अगर गिर भी गई तो उन्होंने कहा कि जब कमरे जर्जर है तो ऐसे कमरों में रहते ही क्यों हो।