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Jhansi News: जानलेवा हमले का आरोप सिद्ध होने पर 10 साल की जेल

Thu, 09 May 2024 02:41 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 09 May 2024 02:41 AM IST
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10 years jail if charge of murderous attack is proven
- न्यायालय ने 13 साल पुराने मामले में फैसला सुनाया, अर्थदंड भी लगाया
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। अपर सत्र न्यायाधीश विजय कुमार वर्मा-प्रथम की अदालत ने जानलेवा हमले का आरोप सिद्ध होने पर अभियुक्त को 10 साल के कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा अर्थदंड भी लगाया। न्यायालय ने 13 साल पुराने मामले में फैसला सुनाया।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता देवेंद्र पांचाल ने बताया कि गांव बैरीसालपुरा निवासी साहब सिंह ने बरुआसागर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि करीब पांच दिन पहले उसका नौकर जगत सिंह जानवर चराने के लिए जंगल में गया था। तब गांव के ही गोविंद सिंह यादव ने जानवरों के खेत में जाने पर उसे धमकाया था और मारपीट पर आमादा हो गया था। साहब सिंह ने बताया कि उसने हस्तक्षेप कर नौकर को बचाया था, लेकिन तब से गोविंद सिंह उससे दुश्मनी मानने लगा था। नौ नवंबर 2013 की दोपहर तकरीबन साढ़े बारह बजे वह अपने दरवाजे पर बैठा था। इसी दरम्यान गोविंद सिंह अन्य लोगों के साथ आया और गाली-गलौज करते हुए उस पर तमंचे से फायर झोंक दिया था। इससे वह लहूलुहान होकर मौके पर ही गिर गया था। इसी दरम्यान विपक्षी जान से मारने की धमकी देते हुए मौके से भाग गए थे।
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पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया था। न्यायालय ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद अभियुक्त गोविंद सिंह को 10 साल के कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा 60 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। जिसकी अदायगी न करने पर अभियुक्त को एक साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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पक्षद्रोही होने पर गवाहों को नोटिस
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि दौरान मुकदमा वादी साहब सिंह, चश्मदीद गवाह पंचम सिंह, पप्पू उर्फ भूप सिंह व पुष्पा देवी पक्षद्रोही हो गए थे। वादी साहब सिंह ने बयान दिया था कि गोविंद सिंह ने घटना नहीं की, जबकि चश्मदीद गवाहों ने स्वयं के घटनास्थल पर मौजूद न होने का झूठा साक्ष्य दिया था। मामले में अदालत ने निर्देश दिए कि चारों के खिलाफ धारा 344 के तहत अलग से प्रकरण दर्ज कर नोटिस जारी किया जाए। साथ ही धारा 344 के प्रावधानों के तहत दंडित किया जाए।
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