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यौमे गम के रूप में मनाया छह दिसंबर
जौनपुर ब्यूराे
Updated Mon, 07 Dec 2015 12:39 AM IST
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बाबरी मस्जिद की शहादत दिवस को मरकजी सीरत कमेटी ने यौमे गम के रूप में मनाया। रविवार को अटाला मस्जिद के सामने भारी संख्या में मौजूद मुसलमानों ने तत्कालीन घटना के विरोध में प्रदर्शन कर सभा की।
वक्ताओं ने कहा कि भारत के सांप्रदायिक सौहार्द पर 6 दिसंबर 1992 की घटना एक बदनुमा दाग है। इस दाग को तभी धुला जा सकता है जब उसी स्थान पर फिर से मस्जिद का निर्माण होगा। विरोध के लिए लोगों ने काली पट्टी बांध रखी थी।
मरकजी सीरत समेटी के अध्यक्ष पूर्व विधायक हाजी अफजाल अहमद की अध्यक्षता में नगर की ऐतिहासिक अटाला मस्जिद के सामने आयोजित कार्यक्रम में बड़ी तादात में लोग एकत्र हुए थे।
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कार्यक्रम का आगाज तेलावते कलाम पाक से हुआ। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए असलम शेर खान ने कहा कि बाबरी मस्जिद की शहादत के बाद मुसलमानों में असुरक्षा का माहौल है।
अध्यक्षता कर रहे पूर्व विधायक हाजी अफजाल अहमद ने कहा कि मौजूदा समय में जिस तरह से खुलेआम सांप्रदायिक शक्तियों द्वारा समाज में जहर घोलने का काम किया जा रहा है उससे समाज में नफरत बढ़ रही है।
ऐसे असहिष्णुता के माहौल में लोग खुद को गुलाम महसूस करने लगे हैं। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान की साझी विरासत को संरक्षित रखने के लिए इसे रोकना होगा।
समारोह को मौलाना वसीम याकूब, अनवारुल हक गुड्डू, डा. हसीन बब्लू, सभासद इरशाद मंसूरी, शकील मंसूरी, अरशद कुरैशी, अनीश अहमद, कमालुद्दीन अंसारी, नदीन, अंसार इदरीशी, हसीन जौनपुरी, शहाबुद्दीन राईन ने भी संबोधित किया। संचालन नेयाज ताहिर एडवोकेट ने किया।
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वक्ताओं ने कहा कि भारत के सांप्रदायिक सौहार्द पर 6 दिसंबर 1992 की घटना एक बदनुमा दाग है। इस दाग को तभी धुला जा सकता है जब उसी स्थान पर फिर से मस्जिद का निर्माण होगा। विरोध के लिए लोगों ने काली पट्टी बांध रखी थी।
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मरकजी सीरत समेटी के अध्यक्ष पूर्व विधायक हाजी अफजाल अहमद की अध्यक्षता में नगर की ऐतिहासिक अटाला मस्जिद के सामने आयोजित कार्यक्रम में बड़ी तादात में लोग एकत्र हुए थे।
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कार्यक्रम का आगाज तेलावते कलाम पाक से हुआ। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए असलम शेर खान ने कहा कि बाबरी मस्जिद की शहादत के बाद मुसलमानों में असुरक्षा का माहौल है।
अध्यक्षता कर रहे पूर्व विधायक हाजी अफजाल अहमद ने कहा कि मौजूदा समय में जिस तरह से खुलेआम सांप्रदायिक शक्तियों द्वारा समाज में जहर घोलने का काम किया जा रहा है उससे समाज में नफरत बढ़ रही है।
ऐसे असहिष्णुता के माहौल में लोग खुद को गुलाम महसूस करने लगे हैं। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान की साझी विरासत को संरक्षित रखने के लिए इसे रोकना होगा।
समारोह को मौलाना वसीम याकूब, अनवारुल हक गुड्डू, डा. हसीन बब्लू, सभासद इरशाद मंसूरी, शकील मंसूरी, अरशद कुरैशी, अनीश अहमद, कमालुद्दीन अंसारी, नदीन, अंसार इदरीशी, हसीन जौनपुरी, शहाबुद्दीन राईन ने भी संबोधित किया। संचालन नेयाज ताहिर एडवोकेट ने किया।