{"_id":"3795029671bb0348fb59a54979b3b75b","slug":"women-held-fast-to-the-longevity-of-husband-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पति की दीर्घायु के लिए महिलाओं ने रखा व्रत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पति की दीर्घायु के लिए महिलाओं ने रखा व्रत
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Mon, 22 Dec 2014 11:42 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सोमवती अमावस्या के अवसर पर महिलाओं ने व्रत रखकर पति की दीर्घायु के लिए नदी और सरोवरों में डुबकी लगाई और दान दिया। भगवान शिव शंकर, माता पार्वती और तुलसी का पूजन किया।
साथ ही पीपल की परिक्रमा करके विधिविधान से पूजा करने के उपरांत निर्धनों को भोजन कराया। सोमवार को बड़ी संख्या में महिलाएं शहर के विभिन्न पीपल के वृक्षों पर एकत्रित होकर आस्था और विश्वास के साथ पूजन करती देखी
गईं। ऐसा माना जाता है कि आज के दिन पीपल के पूजन से सौभाग्य की वृद्धि होती है और पितरों को जल देने से उन्हें तृप्ति मिलती है। ज्ञात हो कि सोमवार को भगवान शिव का दिन माना जाता है।
विज्ञापन
इसलिए सोमवती अमावस्या शिवजी की आराधना को समर्पित होती है। तभी पीपल के वृक्ष में शिव का वास मानकर पूजा और परिक्रमा करती है।
माना गया है कि पीपल के मूल में भगवान विष्णु, तने में शिवजी और अग्र भाग में ब्रम्हा जी का वास होता है। यह पर्व हमारे भीतर आशा और विश्वास का चंद्रमा उदित करने के लिए है।
दृढ़ विश्वास के सहारे हम किसी भी संकट को पार कर लेते हैं और निर्धनों को दान आदि करके संकट के समय भी अपने सद्गुणों से न डगमगाने का संबल पाते हैं।
यह व्रत पितृ दोष के लिए अति महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि दोष नहीं है तो भी पितरों के लिए कल्याण कारी होता है।
विज्ञापन
साथ ही पीपल की परिक्रमा करके विधिविधान से पूजा करने के उपरांत निर्धनों को भोजन कराया। सोमवार को बड़ी संख्या में महिलाएं शहर के विभिन्न पीपल के वृक्षों पर एकत्रित होकर आस्था और विश्वास के साथ पूजन करती देखी
विज्ञापन
गईं। ऐसा माना जाता है कि आज के दिन पीपल के पूजन से सौभाग्य की वृद्धि होती है और पितरों को जल देने से उन्हें तृप्ति मिलती है। ज्ञात हो कि सोमवार को भगवान शिव का दिन माना जाता है।
विज्ञापन
इसलिए सोमवती अमावस्या शिवजी की आराधना को समर्पित होती है। तभी पीपल के वृक्ष में शिव का वास मानकर पूजा और परिक्रमा करती है।
माना गया है कि पीपल के मूल में भगवान विष्णु, तने में शिवजी और अग्र भाग में ब्रम्हा जी का वास होता है। यह पर्व हमारे भीतर आशा और विश्वास का चंद्रमा उदित करने के लिए है।
दृढ़ विश्वास के सहारे हम किसी भी संकट को पार कर लेते हैं और निर्धनों को दान आदि करके संकट के समय भी अपने सद्गुणों से न डगमगाने का संबल पाते हैं।
यह व्रत पितृ दोष के लिए अति महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि दोष नहीं है तो भी पितरों के लिए कल्याण कारी होता है।