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142 वर्ष बाद: अपने पूर्वजों को खोजने वेस्टइंडीज से जौनपुर पहुंची महिला, तीन पीढ़ियों से नहीं चल रहा परिजनों का
Wed, 07 Sep 2022 04:31 PM IST
वाराणसी ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर
अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर
Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 07 Sep 2022 04:31 PM IST
सार
वेस्टइंडीज की महिला अपने पूर्वजों की तलाश में जौनपुर पहुंची। महिला ने अपने परिजनों के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की। हालांकि कोई जानकारी नहीं मिल सकी।
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142 वर्ष बाद अपने पूर्वजों को खोजने वेस्टइंडीज से बरसठी पहुंची महिला
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जौनपुर के बरसठी थाना क्षेत्र के बारीगांव में रविवार को वेस्टइंडीज से महिला निर्मला अपने पूर्वजों को खोजने के लिए पहुंची। लेकिन उन्हें पूर्वजों का पता नहीं लग पाया। महिला पूरे गांव में घूमकर सबसे मुलाकात की और ग्राम प्रधान अर्जुन यादव के घर भोजन किया। बताया कि वह तीसरी पीढ़ी की हैं। करीब 142 वर्ष से वहां हैं। गांव में रहने के बाद वह प्रयागराज इस्कॉन मंदिर पर चली गई।
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महिला ने बताया कि वर्ष 1880 में अंग्रेज शासन में इनके परदादा रहे विश्वनाथ यादव को साथ ले गए थे। तभी से वहां वह लोग रह रहे है। इसके साथ ही परिवार बढ़ा तो परिवार के लोग इस समय कई देशों में वेस्टइंडीज के गयाना, कनाडा व साउथ अफ्रीका में रह रहे हैं। महिला निर्मला के पिता गणेश व दादा का नाम शिवदयाल है।
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ग्राम प्रधान अर्जुन यादव ने बताया कि निर्मला ने भारतीय दूतावास से संपर्क किया। वह इस्कॉन मंदिर संस्था की सदस्य भी हैं। उन्होंने अपने परदादा के जन्म स्थान को देखने और परिवार का पता लगाने की इच्छा जाहिर की। उन्होंने बताया कि दूतावास के जरिए डीएम जौनपुर से संपर्क कीं। डीएम ने सीडीओ को पता लगाने के लिए कहा सीडीओ ने शनिवार को फोन कर काफी देर तक बात कर जानकारी ली।
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ग्रामीणों में बांटी मिठाई
रविवार को सुबह 10 बजे बरसठी थाने पर पहुंची। इसके बाद पहले से वहां मौजूद ग्राम प्रधान अर्जुन यादव अपने साथ गांव में ले गए। निर्मला गांव में पहुंच कर काफी प्रभावित हुई। वह गांव के लोगों से मुलाकात की और अपने साथ लाए प्रसाद के रूप में सभी को मिठाई दी।
इसके बाद ग्राम प्रधान अर्जुन यादव के घर पर भोजन की। निर्मला यहां के लोगों से प्रभावित होकर फिर बारीगांव गांव आने के लिए कहकर गई हैं। ग्राम प्रधान ने बताया कि अभी उनके परिवार का पता नहीं लग पाया, लेकिन वह हमें ही अपना परिवार व घर मान लिया है। वह दोबारा आने की बात कहकर कहकर वापस प्रयागराज स्थित इस्कॉन मंदिर चली गईं।