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तीन साल से गांव हो रहे चयनित, विकास नहीं
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प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत जिले में तीन साल से लगातार गांवों का चयन हो रहा है, लेकिन इस योजना के तहत चयनित गांवों में अभी तक एक भी विकास कार्य नहीं हो पाए हैं। योजना के तहत अभी तक जिले में 130 ग्राम पंचायतों का चयन किया जा चुका है। विभाग बजट नहीं मिलने का रोना रो रहे हैं।
सरकार की तरफ से 50 फीसदी से अधिक अनुसूचित जाति वर्ग वाले गांवों के सर्वांगीण विकास के लिए वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना का शुभारंभ किया गया था। इसके तहत अनुसूचित जाति बाहुल्य वाले गांवों का चयन कर वहां अन्य योजनाओं के तहत जो विकास कार्य नहीं हुए हैं, उसे कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए प्रति गांव 20 लाख रुपये दिए जाने का प्रावधान है। इसके क्रम में जिले में वित्तीय वर्ष 2019-20 में 20, वर्ष 2020-21 में 55 और 2021-22 में 55 अनुसूचित बाहुल्य वाले गांवों का चयन किया गया। इन गांवों में सर्वे कराकर ऐसे विकास कार्यों की सूची बनाई गई, जो अन्य योजनाओं के तहत नहीं हो पाए हैं। सूची शासन को भेज दी गई, लेकिन अभी तक शासन स्तर से तीन साल में चयनित इन गांवों में विकास कार्य कराने के लिए अभी तक बजट जारी नहीं किया गया। इसके चलते चयनित गांवों में विकास कार्य ठप पड़े हुए हैं।
उधर, जिले में पीएम आदर्श ग्राम योजना के तहत तीन सालों में चयनित गांवों की ब्लॉकवार सूची पर नजर डालेंगे तो पता चलेगा कि सबसे अधिक रामपुर ब्लॉक में 12 गांव चयनित किए गए हैं। इसके अलावा केराकत ब्लॉक में पांच, डोभी में आठ, मुफ्तीगंज में छह, करंजाकला में आठ, जलालपुर में चार, सुईथाकला में आठ, मछलीशहर में आठ, धर्मापुर में आठ, बरसठी में चार, रामपुर में 12, खुटहन में आठ, मड़ियाहूं में सात, महराजगंज में छह, मुंगराबादशाहपुर में पांच, सिकरारा में सात, शाहगंज में सात, सिरकोनी में सात, सुजानगंज में तीन, बदलापुर में चार, रामनगर में दो व बक्शा में तीन गांव इस योजना के तहत चयनित हैं। जिला समाज कल्याण अधिकारी सुनील कुमार सिंह का कहना है कि तीन साल में योजना के तहत 130 गांवों का चयन किया गया है। विकास कार्य कराने के लिए प्रस्ताव भी शासन को भेजा गया है, लेकिन अभी तक शासन से धनराशि नहीं आई है। इसके चलते गांवों में प्रस्तावित विकास कार्य नहीं हो पा रहे हैं। शासन से धनराशि आने पर विकास कार्यों को कराने का कार्य किया जाएगा।
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सरकार की तरफ से 50 फीसदी से अधिक अनुसूचित जाति वर्ग वाले गांवों के सर्वांगीण विकास के लिए वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना का शुभारंभ किया गया था। इसके तहत अनुसूचित जाति बाहुल्य वाले गांवों का चयन कर वहां अन्य योजनाओं के तहत जो विकास कार्य नहीं हुए हैं, उसे कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए प्रति गांव 20 लाख रुपये दिए जाने का प्रावधान है। इसके क्रम में जिले में वित्तीय वर्ष 2019-20 में 20, वर्ष 2020-21 में 55 और 2021-22 में 55 अनुसूचित बाहुल्य वाले गांवों का चयन किया गया। इन गांवों में सर्वे कराकर ऐसे विकास कार्यों की सूची बनाई गई, जो अन्य योजनाओं के तहत नहीं हो पाए हैं। सूची शासन को भेज दी गई, लेकिन अभी तक शासन स्तर से तीन साल में चयनित इन गांवों में विकास कार्य कराने के लिए अभी तक बजट जारी नहीं किया गया। इसके चलते चयनित गांवों में विकास कार्य ठप पड़े हुए हैं।
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उधर, जिले में पीएम आदर्श ग्राम योजना के तहत तीन सालों में चयनित गांवों की ब्लॉकवार सूची पर नजर डालेंगे तो पता चलेगा कि सबसे अधिक रामपुर ब्लॉक में 12 गांव चयनित किए गए हैं। इसके अलावा केराकत ब्लॉक में पांच, डोभी में आठ, मुफ्तीगंज में छह, करंजाकला में आठ, जलालपुर में चार, सुईथाकला में आठ, मछलीशहर में आठ, धर्मापुर में आठ, बरसठी में चार, रामपुर में 12, खुटहन में आठ, मड़ियाहूं में सात, महराजगंज में छह, मुंगराबादशाहपुर में पांच, सिकरारा में सात, शाहगंज में सात, सिरकोनी में सात, सुजानगंज में तीन, बदलापुर में चार, रामनगर में दो व बक्शा में तीन गांव इस योजना के तहत चयनित हैं। जिला समाज कल्याण अधिकारी सुनील कुमार सिंह का कहना है कि तीन साल में योजना के तहत 130 गांवों का चयन किया गया है। विकास कार्य कराने के लिए प्रस्ताव भी शासन को भेजा गया है, लेकिन अभी तक शासन से धनराशि नहीं आई है। इसके चलते गांवों में प्रस्तावित विकास कार्य नहीं हो पा रहे हैं। शासन से धनराशि आने पर विकास कार्यों को कराने का कार्य किया जाएगा।
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