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दो आतंकी आरोपियों की कोर्ट में हुई पेशी
अमर उजाला ब्यूरो , जौनपुर
Updated Tue, 12 May 2015 12:11 AM IST
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श्रमजीवी एक्सप्रेस ट्रेन बम विस्फोट मामले में जिला कारागार में बंद आतंकी आरोपी ओबैदुर्रहमान और मो. आलमगीर सोमवार को कड़ी सुरक्षा के बीच एडीजे प्रथम नसीर अहमद की कोर्ट में पेश किए गए।
आतंकियों की पेशी को लेकर पहले से जारी अलर्ट के कारण दीवानी न्यायालय परिसर में चप्पे-चप्पे पर सशस्त्र पुलिस तैनात की गई थी। खुफिया विभाग भी नजर रखे था।
28 जुलाई 2005 को जौनपुर-सुल्तानपुर रेलमार्ग पर हरपालगंज रेलवे स्टेशन के हरिहरपुर क्रासिंग के समीप श्रमजीवी एक्सप्रेस की जनरल बोगी में शाम 5:30 बजे बम विस्फोट हुआ था।
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इसमें 14 लोगों की मौत हो गई थी और 18 लोग घायल हो गए थे। मामले के दो आरोपी आतंकी ओबैदुर्रहमान उर्फ बाबू भाई और मो. आलमगीर उर्फ रोनी जिला कारागार में बंद हैं।
इन दोनों को सोमवार को दीवानी न्यायालय में पेश किया गया। अभियोजन पक्ष से एडीजीसी अतुल श्रीवास्तव ने बहस की। बहस पूरी नहीं हुई। शेष बहस के लिए 20 मई की तिथि नियत की गई।
आतंकियों की पेशी को लेकर दीवानी न्यायालय के चारों गेटों के अलावा परिसर में कड़ी सुरक्षा थी। न्यायालय के मुख्य द्वार पर मेटल डिटेक्टर लगाया गया था। वादकारी और अधिवक्ताओं को भी मेटल डिटेक्टर से गुजरना पड़ा।
न्यायालय में आने वालों की तलाशी ली गई। तीन सीओ, पांच एसओ और 10 दरोगा सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी कर रहे थे। सुबह बम निरोधक दस्ता और डाग स्क्वायड ने भी कचहरी परिसर की जांच की थी।
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आतंकियों की पेशी को लेकर पहले से जारी अलर्ट के कारण दीवानी न्यायालय परिसर में चप्पे-चप्पे पर सशस्त्र पुलिस तैनात की गई थी। खुफिया विभाग भी नजर रखे था।
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28 जुलाई 2005 को जौनपुर-सुल्तानपुर रेलमार्ग पर हरपालगंज रेलवे स्टेशन के हरिहरपुर क्रासिंग के समीप श्रमजीवी एक्सप्रेस की जनरल बोगी में शाम 5:30 बजे बम विस्फोट हुआ था।
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इसमें 14 लोगों की मौत हो गई थी और 18 लोग घायल हो गए थे। मामले के दो आरोपी आतंकी ओबैदुर्रहमान उर्फ बाबू भाई और मो. आलमगीर उर्फ रोनी जिला कारागार में बंद हैं।
इन दोनों को सोमवार को दीवानी न्यायालय में पेश किया गया। अभियोजन पक्ष से एडीजीसी अतुल श्रीवास्तव ने बहस की। बहस पूरी नहीं हुई। शेष बहस के लिए 20 मई की तिथि नियत की गई।
आतंकियों की पेशी को लेकर दीवानी न्यायालय के चारों गेटों के अलावा परिसर में कड़ी सुरक्षा थी। न्यायालय के मुख्य द्वार पर मेटल डिटेक्टर लगाया गया था। वादकारी और अधिवक्ताओं को भी मेटल डिटेक्टर से गुजरना पड़ा।
न्यायालय में आने वालों की तलाशी ली गई। तीन सीओ, पांच एसओ और 10 दरोगा सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी कर रहे थे। सुबह बम निरोधक दस्ता और डाग स्क्वायड ने भी कचहरी परिसर की जांच की थी।