शहीद रामदुलारे सिंह के शहादत दिवस पर बृहस्पतिवार को शहीद स्मारक पर स्टरलिंग स्कूल की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शहीद के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई।
वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान 18 अगस्त 1942 को करियांव गांव के 19 वर्षीय रामदुलारे सिंह के साथ युवाओं की टोली मछलीशहर तहसील में झंडा फहराने निकल पड़ी थी। उस टोली में माधव सिंह, भरत सिंह, दूधनाथ सिंह, माता प्रसाद दुबे, शीतला प्रसाद समेत कई अन्य नौजवान शामिल थे। वंदे मातरम का नारा लगाते हुए नौजवानों की टोली मछलीशहर तहसील मुख्यालय पहुंची और यूनियन जैक को उतारकर तिरंगा फहरा दिया। तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर अख्तर अली ने आंदोलनकारियों पर गोली चलाने का निर्देश दिया। अंग्रेज सिपाहियों की गोली से रामदुलारे सिंह घायल हो गए। रामदुलारे को उनके साथी घायल अवस्था में लेकर खेत के रास्ते करियांव गांव पहुंच गए थे। बस्ती के बाहर टीले पर उनका देशी उपचार शुरू किया गया। इस बीच 19 अगस्त को वह शहीद हो गए। वहीं पर उनकी अंत्येष्टि कर दी गई। अंत्येष्टि स्थल पर ही शहीद स्मारक बनाया गया है। शहादत दिवस पर स्टरलिंग स्कूल के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। इस मौके पर थानाध्यक्ष राणाप्रताप यादव, स्टरलिंग स्कूल के चेयरमैन राजेश सिंह, मनोज सिंह, सुधाकर सिंह, शीतला प्रसाद, कल्लू सिंह, शहीद की भतीजी गुलाबा देवी, केके दुबे ने प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। संचालन दीपक तिवारी ने किया।