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ठुमरी और महारास नृत्य पर बांधा समा
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ठुमरी और महारास नृत्य पर बांधा समा
पीयू में सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम का पहला दिन
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के महंत अवैद्यनाथ संगोष्ठी भवन में विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह के तहत मंगलवार को सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। कुलपति प्रो राजाराम यादव ने भी ठुमरी, दादरा सनाकर समा बांध दिया।
कुलपति ने ‘पनिया जो भरन गई री’ ‘ना मानूंगी, ना मानूंगी पिया बिना कृष्ण के मनाए...’ और ‘कौन गली गयो श्याम’ जैसी ठुमरियां सुनाईं। उसके बाद तराना ‘तुम तना ना ना ना’ पेश किया और बाद में ‘फुहार न जागी निकर आओ घमवा’ सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। तबले पर शंकर दा तथा वैभव बिंदुसार और वायलिन पर सुरेश ने संगत किया। सह गायक आशीष जायसवाल रहे। जयपुर घराने की प्रेरणा तिवारी ने गणेश वंदना पर कथक नृत्य की प्रस्तुति कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रेरणा तिवारी ने श्रृंगार को रहने दो ठुमरी पर जबरदस्त कथक नृत्य की प्रस्तुति की। लखनऊ घराने के प्रतिष्ठित कथक कलाकार रवि सिंह ने ओम नम: शिवाय की धुन पर अर्धनारीश्वर नृत्य प्रस्तुत किया तो ऐसा लगा जैसे वास्तव में भगवान शिव और पार्वती का आगमन हाल में हो गया है। रवि सिंह के साथ रायबरेली से आए नवागत कलाकारों श्रद्धा सिंह, शताक्षी, क्षमता, अवनी, शेखर सिंह और संयम रावत ने रघुकुल रीति सदा चली आई प्राण जाए पर वचन न जाए पर जोरदार नृत्य की प्रस्तुति की। सांस्कृतिक संध्या के इस समारोह में कथक और भरतनाट्यम दोनों की जुगलबंदी पर प्रेरणा तिवारी और रवि सिंह का महिषासुर वध नृत्य देखकर लोग भावविभोर हो उठे। दोनों कलाकारों ने महारास प्रस्तुत किया। जिसमें लोगों ने साक्षात् कृष्ण और राधा के दर्शन की अनुभूति की । इस अवसर पर कथावाचक आचार्य शांतनु जी महाराज ने शास्त्रीय गायन के लिए कुलपति प्रो. राजाराम को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। कथक कलाकार रवि सिंह, प्रेरणा तिवारी समेत सभी कलाकारों को कुलपति , कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल ने स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। संचालन डा. अनुराग मिश्र ने किया।
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पीयू में सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम का पहला दिन
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के महंत अवैद्यनाथ संगोष्ठी भवन में विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह के तहत मंगलवार को सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। कुलपति प्रो राजाराम यादव ने भी ठुमरी, दादरा सनाकर समा बांध दिया।
कुलपति ने ‘पनिया जो भरन गई री’ ‘ना मानूंगी, ना मानूंगी पिया बिना कृष्ण के मनाए...’ और ‘कौन गली गयो श्याम’ जैसी ठुमरियां सुनाईं। उसके बाद तराना ‘तुम तना ना ना ना’ पेश किया और बाद में ‘फुहार न जागी निकर आओ घमवा’ सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। तबले पर शंकर दा तथा वैभव बिंदुसार और वायलिन पर सुरेश ने संगत किया। सह गायक आशीष जायसवाल रहे। जयपुर घराने की प्रेरणा तिवारी ने गणेश वंदना पर कथक नृत्य की प्रस्तुति कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रेरणा तिवारी ने श्रृंगार को रहने दो ठुमरी पर जबरदस्त कथक नृत्य की प्रस्तुति की। लखनऊ घराने के प्रतिष्ठित कथक कलाकार रवि सिंह ने ओम नम: शिवाय की धुन पर अर्धनारीश्वर नृत्य प्रस्तुत किया तो ऐसा लगा जैसे वास्तव में भगवान शिव और पार्वती का आगमन हाल में हो गया है। रवि सिंह के साथ रायबरेली से आए नवागत कलाकारों श्रद्धा सिंह, शताक्षी, क्षमता, अवनी, शेखर सिंह और संयम रावत ने रघुकुल रीति सदा चली आई प्राण जाए पर वचन न जाए पर जोरदार नृत्य की प्रस्तुति की। सांस्कृतिक संध्या के इस समारोह में कथक और भरतनाट्यम दोनों की जुगलबंदी पर प्रेरणा तिवारी और रवि सिंह का महिषासुर वध नृत्य देखकर लोग भावविभोर हो उठे। दोनों कलाकारों ने महारास प्रस्तुत किया। जिसमें लोगों ने साक्षात् कृष्ण और राधा के दर्शन की अनुभूति की । इस अवसर पर कथावाचक आचार्य शांतनु जी महाराज ने शास्त्रीय गायन के लिए कुलपति प्रो. राजाराम को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। कथक कलाकार रवि सिंह, प्रेरणा तिवारी समेत सभी कलाकारों को कुलपति , कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल ने स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। संचालन डा. अनुराग मिश्र ने किया।
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