फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jaunpur News ›   Team of doctors will check medical resources in ambulance

एंबुलेंस में चिकित्सकीय संसाधनों की जांच करेगी चिकित्सकों की टीम

Tue, 10 May 2022 12:06 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 10 May 2022 12:06 AM IST
विज्ञापन
Team of doctors will check medical resources in ambulance
जौनपुर। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए जिले में लगाई गए एंबुलेंस में मरीजों के लिए उपलब्ध चिकित्सकीय संसाधनों की जांच अब चिकित्सकों की टीम करेगी। एंबुलेंस में मरीजों के लिए उपलब्ध दवाओं, ऑक्सीजन सिलेंडर, एसी, फैन, स्ट्रेचर स्वास्थ्य टीम आदि की जांच की जिम्मेदारी चिकित्सकों को सौंपी गई है लेकिन वाहन के फिटनेस की जांच एंबुलेंस कंपनी को एआरटीओ कार्यालय से ही लेगा होगा। अब चिकित्सकों के साथ ही एंबुलेंस की फिटनेस की जांच एआरटीओ कार्यालय को लेना होगा।
विज्ञापन

सीएमओ डा. लक्ष्मी सिंह का कहना है कि एंबुलेंस की जांच में 10 प्रतिशत की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की होती है। इसकी जांच डीएम के निर्देश पर समय-समय पर करके प्रमाणपत्र दे दिया जाता है। बिना प्रमाणपत्र के एंबुलेंस के संचालन की अनुमति नहीं दी जाती है। रही बात वाहन के फिटनेस की तो एआरटीओ उसकी जांचकर प्रमाणपत्र मुहैया कराता है। मरीजों की जान बचाने के लिए मानक युक्त एंबुलेंस में वेंटिलेटर, ऑटोमेटेड एक्सटरनल डिफेबरीलेटर, मल्टी पैरा मॉनीटर, फिटल डॉप्लर, गंभीर बीमारियों से संबंधित आपातकालीन दवाओं के अलावा दो फैन और फ्रीज भी होते है। जिसके जरिए हार्ट अटैक, सांस लेने में परेशानी, नवजात से जुड़े गंभीर मामले, बर्न केस, सड़क दुर्घटना में हेड इंजरी, प्रसव सहित आपातकालीन स्थिति के लिए आधुनिक चिकित्सा उपचार की सुविधा रहती है।
विज्ञापन

जिले में 104 एंबुलेंस का हो रहा संचालन
जौनपुर। मरीजों को इलाज के लिए अस्पताल तक पहुंचाने के लिए जिले में कुल 104 एंबुलेंस का संचालन हो रहा है। इसमें 108 नंबर की 50 एंबुलेंस, 102 नंबर की 51 और एलएस (लाइफ सपोर्ट सिस्टम) की तीन एंबुलेंस का संचालन हो रहा है। जिला अस्पताल के अलावा जिले के सीएचसी और पीएचसी पर भी एंबुलेंस सेवा का व्यवस्था की गई है, जो ब्लाक क्षेत्रों से मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

एंबुलेंस में मरीजों के लिए उपलब्ध दवाओं और अन्य संसाधनों की जांच स्वास्थ्य विभाग करता है। फिटनेस जांच एआरटीओ कार्यालय से करके प्रमाणपत्र दिया जाता है। उसके बाद ही एंबुलेंस को चलने की अनुमति दी जाती है। - डा. राजीव कुमार यादव, नोडल अधिकारी एंबुलेंस
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed