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श्रमजीवी बम ब्लास्ट: दोषी करार दिए जाने पर झुक गया था सिर, पकड़ लिया माथा; ऐसा है आतंकी का हाल

Sat, 23 Dec 2023 11:03 AM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जौनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जौनपुर Published by: किरन रौतेला Updated Sat, 23 Dec 2023 11:03 AM IST
सार

आठ साल पहले वर्ष 2016 से पहले दोनों ही आतंकी किसी अन्य मामले में हैदराबाद की जेल में बंद थे। श्रमजीवी विस्फोट मामले की सुनवाई के लिए इन दोनों को यहां लाया गया। जेल सूत्रों के अनुसार आने के बाद इन दोनों को जेल की तनहा बैरक में रखा गया। वह हर रात जेल की बैरक में अकेले टहलते देखे जाते थे।

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Shramjeevi bomb blast: Terrorists in isolated barracks for eight years, no one came to meet them for two year
श्रमजीवी एक्सप्रेस विस्फोट कांड में दो आतंकी दोषी करार - फोटो : संवाद

विस्तार

श्रमजीवी एक्सप्रेस में बम विस्फोट मामले में दोषी बांग्लादेशी आतंकी हिलालुद्दीन और पश्चिम बंगाल के नफीकुल विश्वास पिछले आठ वर्षों से तनहा बैरक में है। दो वर्षों से कोई मिलने तक नहीं आया है। दोषी करार दिए जाने के बाद दोनों दोषी सुस्त दिखे। कुछ खाया भी नहीं है।

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आठ साल पहले वर्ष 2016 से पहले दोनों ही आतंकी किसी अन्य मामले में हैदराबाद की जेल में बंद थे। श्रमजीवी विस्फोट मामले की सुनवाई के लिए इन दोनों को यहां लाया गया। जेल सूत्रों के अनुसार आने के बाद इन दोनों को जेल की तनहा बैरक में रखा गया। वह हर रात जेल की बैरक में अकेले टहलते देखे जाते थे। इन आठ सालों में इनसे मिलने वाला कोई नहीं मिला। यह जेल की गतिविधियों में किसी प्रकार का हिस्सा नहीं लेते रहे। इनके अंदर किसी प्रकार की सीखने की ललक नहीं रही। यह केवल जेल की दाल, रोटी, सब्जी व चावल ही खाते थे। इन्हें किसी प्रकार की कोई सुविधा नहीं उपलब्ध थी।

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दोषी करार दिए जाने पर झुक गया था सिर, पकड़ लिया माथा

घटना को लेकर दोनों ही बांग्लादेशी आतंकी हिलालुद्दीन व पश्चिम बंगाल के नफीकुल विश्वास काे कोर्ट में दोषी करार दिया गया। इसके बाद लौटने पर दोनों ही आतंकियों का सिर झुक गया था और उन्होंने माथा पकड़ लिया था। उनके झुके हुए सिर को देखकर लोग तरह-तरह की चर्चा कर रहे थे।

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18 साल 04 माह 25 दिन पहले हुई थी घटना

43 गवाह इस मामले में कराए गए परीक्षित

12 लोगों की इस हादसे में गई थी जान

62 लोग हुए थे घायल हुए थे

24 जुलाई 2006 को दाखिल हुआ था आरोप पत्र

बूंदाबांदी के बीच गुल थी बिजली, लग गया था शवों का ढेर

Shramjeevi bomb blast: Terrorists in isolated barracks for eight years, no one came to meet them for two year
श्रमजीवी विस्फोट कांड के आरोपी - फोटो : अमर उजाला

ट्रेन हादसे में 12 की मौत व 62 हो गए थे घायल

28 जुलाई 2005 की सायं 5.20 बजे पटना से दिल्ली जा रही श्रमजीवी एक्सप्रेस सिंगरामऊ के हरपालगंज के पास अटैची में बम के विस्फोट से इलाका दहल उठा था। इसमें 12 की मौत व 62 लोग घायल हुए थे। बृहस्पतिवार के दिन का काला मंजर ऐसा रहा कि घटना के समय बूंदाबांदी के बीच बिजली गुल थी और शवों का ढेर लग गया था।

हादसा इतना भयावह था कि ट्रेन की बोगियों ने गोल आकार ले लिया था। तेज आवाज सुनकर आस-पास के लोग दौड़ पड़े। सभी घायलों को पिकअप पर लादकर सीएचसी सिंगरामऊ पहुंचाए। जहां बिजली गुल थी और मौसम भी खराब था। स्वास्थ्य केंद्र पर न तो चिकित्सक पर्याप्त रहे न ही चिकित्सा कर्मी। ऐसे में बड़ी संख्या में जिले से सरकारी व प्राइवेट चिकित्सक दवा व टीम के साथ पहुंच गए। घटना स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल था। वहां पर पहुंचने वालों के पैर शव पर पड़ते तो लोगों की रूह कांप जाती रही। ऐसे में दो दिनों तक शवों की शिनाख्त व घायलों की पहचान की जाती रही। ट्रेन हरिहरपुर रेलवे क्राॅसिंग के बीचों-बीच खड़ी थी जिससे वाहनों की लंबी कतार लग गई थी।

लालू यादव भी पहुंचे थे घटना स्थल

तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव भी पहुंचे :-घटना की जानकारी होने पर तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव भी रात को ही पहुंचे। वह करीब रात में चार बजे सिंगरामऊ व जिला चिकित्सालय पहुंचे। वहां घायलों को मुलाकात कर मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सिंगरामऊ से जिला मुख्यालय तक अधिकारियों के वाहनों के हूटर बजते रहे। रेलवे, पुलिस, प्रशासनिक व चिकित्सा से जुड़े हर बड़ा अधिकारी मौके पर पहुंचता रहा।

विवेचना में लश्कर व हूजी आतंकी संगठन का भी आया था नाम

घटना में सभी आतंकी लश्कर-ए-तैयबा व हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी(हूजी) के सदस्य थे। इस पूरे विस्फोट कांड के मामले में कुल सात आरोपी बनाए गए थे। जिसमें एक की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो चुकी हैं। इस मामले में जांच के दौरान तीन अधिकारी बदले गए थे।

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