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Jaunpur News: पीली नदी का जीर्णोद्धार सुखद पहल लेकिन गोमती को भी बचाएं

Fri, 20 Jun 2025 12:16 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 20 Jun 2025 12:16 AM IST
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Restoration of Yellow River is a good initiative but save Gomti too
जौनपुर। जिले में पीली नदी का जीर्णोद्धार जोरों पर है। प्रशासन की तरफ से ये सुखद पहल है लेकिन जिले की प्रमुख नदी गोमती उपेक्षा का शिकार है। प्रदूषण और गंदगी के कारण नदी का अस्तित्व संकट में है। नदी में जलकुंभी के ढेर हैं, पानी भी बहुत कम है। पाट छोटा होता जा रहा है। इसके बाद भी इसकी सफाई पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सीएम के निर्देश के क्रम में पालिका कर्मियों ने एक गोमती की सफाई कर फोटो खिंचवाई और फिर नदारद हो गए। नदी को बचाने के लिए प्रशासन के साथ ही सामाजिक संस्थाओं के प्रयास की जरूरत है। ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए नदी को संरक्षित किया जा सके। प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलाधिकारियों को अपने जिले में नदियाें और जलाशयों के जीर्णोद्धार के निर्देश दिए हैं। इस क्रम में डीएम डा. दिनेश चंद्र ने जिले के बदलापुर तहसील स्थित पीली नदी का जीर्णोद्धार करा रहे हैं। पीली नदी के लिए क्षेत्रीय विधायक की सक्रियता और स्थानीय लोगों के सहयोग से काम तेजी से हो रहा है। जल्द ही पीली नदी अस्तित्व में आ जाएगी और पानी का एक बड़ा व बेहतर स्रोत बनेगी। वहीं, दूसरी ओर शहर के बीचोंबीच बहने वाली गोमती नदी उपेक्षा का शिकार है। आदि गंगा का स्वरूप मां गोमती आज अपना अस्तित्व खोने को मजबूर हैं। गोमती नदी की साफ-सफाई की जिम्मेदारी शहर की प्रमुख समाजसेवी संस्थाएं, क्लब, जनप्रतिनिधि, जिला प्रशासन, नगर पालिका सभी ने ले रखी है, लेकिन निभा कोई नहीं पा रहा है। वर्तमान में गोमती नदी सूख रही है। पानी नाम मात्र का है। गंदगी से पटी नदी में जलकुंभी तैरती दिखाई दे रही है।
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प्रतिदिन निकलता है 30 एमएलडी गंदा पानी-3.50 लाख आबादी वाले शहर में प्रतिदिन 30 एमएलडी गंदा पानी निकालता है, जो 14 नालियों और नालों से होकर आदि गंगा गोमती नदी में गिरता है। इससे गोमती का पानी भी दूषित हो रहा है।
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206 करोड़ से बनी एसटीपी, फिर भी नदी में गिर रहा गंदा पानी-गोमती का पानी दूषित न हो और शहर से निकलने वाले गंदे पानी को शोधित कर अन्य प्रयोग में लाया जा सके, इसके मद्देनजर सरकार ने नमामि गंगे और अमृत योजना के तहत एसटीपी का निर्माण कराया है। नमामि गंगे योजना के तहत 206.05 करोड़ की धनराशि से 30 एमएलडी क्षमता का एसटीपी और तीन पंपिंग स्टेशन बनाया गया है। इसके बावजूद नदी में गंदा पानी गिरता है।
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14 बड़े नालों से गोमती में गिरता है सीवेज-जौनपुर। शहर से रोजाना निकलने वाला गंदा पानी कुल 14 नालों से होकर गोमती नदी में गिरता है। इसमें हनुमान घाट, बजरंग घाट, बलुआ घाट, मछरहट्टा, मियांपुर, कटघरा, नखास, अहियापुर, जेसिज, मुफ्ती मोहल्ला सहित अन्य नाले हैं। नालों के पानी को एसटीपी में शोधित कर खेतों की सिंचाई सहित अन्य उपयोग में लाया जाता है।


गोमती नदी में पानी कम है लेकिन बरसात में जलस्तर बढ़ेगा। सफाई के लिए पालिका की ओर से दस सदस्यों की एक टीम लगाई गई है, जो हर दो-दो दिन पर सफाई कर रही है। जल्द ही गोमती को पूरी तरह से साफ किया जाएगा। - पवन कुमार, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद, जौनपुर
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