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Jaunpur News: मित्र के दुख में दुखी होना ही सच्ची मित्रता की पहचान है

Sat, 26 Sep 2026 01:49 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 26 Sep 2026 01:49 AM IST
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Being sad when your friend is sad is the true sign of friendship.
बदलापुर। मिरशादपुर गांव में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में अंतिम दिन शुक्रवार को सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए राहुल पांडेय पराशर महराज ने कहा कि मित्र के सुख में सुखी व उसके दुख में दुखी होना ही सच्ची मित्रता है। उन्होंने कहा कि मित्रता की परिभाषा अब स्वार्थ तक सीमित हो गई है, जब तक धन, वैभव पास में है तब तक तमाम मित्र हैं। स्थिति खराब होने पर परिचय बताना भी मुनासिब नहीं समझते। उन्होंने कृष्ण व सुदामा की मित्रता का वर्णन करते हुए कहा कि कृष्ण त्रिलोकीनाथ थे उनसे विप्र सुदामा की क्या बराबरी थी, लेकिन बचपन के मित्र होने के नाते अपने आसन पर बैठाकर स्वागत किया। यही असली मित्रता है। इससे पहले उन्होंने रुक्मिणी विवाह का चित्रण करते हुए कहा कि बेटियों का विवाह सदैव उनके अनुकूल करें। घर, बर और कुल अगर उसके अनुरूप न हो तो विवाह नहीं करना चाहिए। आज जो भी विघटन हो रहे हैं उसी की देन है। कथा में श्रीकांत मिश्रा, महेंद्र, आशीष, धर्मेंद्र, इंद्रभान मिश्र आदि उपस्थित रहे। मुख्य यजमान रामचंद्र मिश्रा ने आभार ज्ञापित किया।
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