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Jaunpur News: पुलिसकर्मियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए होगा शोध

Sun, 06 Oct 2024 02:08 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 06 Oct 2024 02:08 AM IST
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Research will be done for mental and physical health of policemen
करंजाकला। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के व्यावहारिक मनोविज्ञान विभाग और उमानाथ सिंह स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, जौनपुर की टीम वाराणसी जोन के पुलिसकर्मियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण शोध करेगी। यह परियोजना प्रदेश सरकार से प्राप्त अनुदान के तहत संचालित होगी। इसमें जौनपुर, चंदौली, गाजीपुर और वाराणसी के पुलिसकर्मी शामिल होंगे। गत 26 सितंबर को जारी सूची के अनुसार पूर्वांचल विश्वविद्यालय के सहायक आचार्य डॉ. मनोज कुमार पांडेय को इस शोध के लिए अनुदान दिया गया है। उनके साथ उमानाथ सिंह स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के मनोचिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विनोद वर्मा सह-शोध निदेशक के रूप में काम करेंगे।
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पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य की चुनौती
पुलिसकर्मियों का कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण और तनावपूर्ण होता है। उनके काम में न केवल खतरे और जोखिम शामिल होते हैं, बल्कि नौकरशाही प्रक्रियाओं और सामुदायिक संबंधों से जुड़े तनाव भी होते हैं। हालांकि पुलिसकर्मियों को उनके नियमित काम के लिए प्रशिक्षित किया जाता है, लेकिन मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण नहीं दिया जाता। इसी कारण, पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना न केवल सरकारी एजेंसियों के लिए बल्कि उनके परिवार, दोस्तों और समाज के लिए भी बेहद जरूरी है। यह शोध परियोजना इसी दिशा में एक पहल है।
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शोध के प्रमुख उद्देश्य
1. स्वास्थ्य का मूल्यांकन : पुलिसकर्मियों के वर्तमान और पिछले मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य की स्थिति का आकलन किया जाएगा।
2. मनोवैज्ञानिक कारकों की पहचान : तनाव, कार्य जीवन संघर्ष, अवसाद और अन्य कारकों का अध्ययन, जो पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डालते हैं। साथ ही उनकी अपनाई गई रणनीतियों का आकलन।
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3. प्रशिक्षण कार्यक्रम : प्रत्येक सर्कल स्तर पर एक महीने का प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य देखभाल, तनाव प्रबंधन, और कार्य जीवन संतुलन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

4. फॉलोअप और परामर्श : मनोवैज्ञानिक उपचार के दौरान उचित फॉलोअप और परामर्श प्रदान किया जाएगा।
5. परिणामों का आकलन : हस्तक्षेप के बाद पुलिसकर्मियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में आए सुधार का मूल्यांकन।
6. रिपोर्ट तैयार करना : शोध के प्रमुख निष्कर्षों को सरकारी एजेंसियों और प्रतिष्ठित जर्नल में प्रकाशित करने के लिए विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
यह शोध पुलिसकर्मियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ उनके जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। - डॉ. मनोज कुमार पांडेय, विभागाध्यक्ष मनोविज्ञान संकाय, पूविवि
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