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Jaunpur News: पांच तहसीलों में हेलिपैड बनाने की तैयारी, शासन की मंजूरी का इंतजार
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जौनपुर। जिले की पांच तहसीलों में हेलिपैड निर्माण की कवायद शुरू हो गई है। बदलापुर, शाहगंज, सदर, केराकत और मड़ियाहूं तहसील क्षेत्रों में सरकारी जमीन चिह्नित कर प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। निर्माण की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को सौंपी गई है। हालांकि, चिह्नित स्थलों को लेकर कुछ आपत्तियां सामने आने और अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) की प्रक्रिया में अड़चन के कारण अभी शासन से स्वीकृति नहीं मिली है। तहसीलों के बाद जिले के सभी 21 ब्लॉक मुख्यालयों के आसपास भी हेलिपैड बनाने की योजना है।
हेलिपैड बनने से प्रशासनिक जरूरतों के साथ आपात परिस्थितियों में हेलीकॉप्टर उतारने की सुविधा मिल सकेगी। इसके अलावा वीवीआईपी और वीआईपी के आगमन पर हेलीकॉप्टर उतारने के लिए उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराने में भी सहूलियत होगी। सरकारी भूमि चिह्नित होने से निर्माण के लिए जमीन की व्यवस्था करने में आसानी होगी। योजना को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाना है।
इन गांवों में चिह्नित की गई सरकारी जमीन
हेलीपैड निर्माण के लिए अलग-अलग तहसील क्षेत्रों में कई गांवों को चिह्नित किया गया है। बदलापुर तहसील के बछुआर, शाहगंज के निजामपुर और सदर तहसील के धर्मापुर, सुंगुलपुर, सिकरारा, भकुरा व बेलापार गांव शामिल हैं। इसी तरह केराकत तहसील में मुफ्तीगंज, रेहटी, नाउपुर और बिशुनपुरवा, जबकि मड़ियाहूं तहसील में उंचनीखुर्द, विधमौवा, गनेशपुर और जोगापुर गांवों में जमीन चिह्नित की गई है। निर्माण के लिए नवीन परती, पशुचर, उसर और बंजर भूमि के अलावा खेल मैदान तथा विद्यालयों के खेल मैदानों को भी प्रस्तावित स्थलों में शामिल किया गया है। चिह्नित जमीन पर हेलीपैड निर्माण की प्रक्रिया शासन से मंजूरी मिलने के बाद आगे बढ़ेगी।
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300 मीटर के दायरे में नहीं होना चाहिए अवरोध
हेलिपैड निर्माण के लिए चिह्नित स्थलों पर अनापत्ति प्रमाणपत्र को लेकर पेच फंसा है। निर्धारित मानकों के अनुसार प्रस्तावित हेलिपैड के आसपास त्रिकोणीय आकार में 300 मीटर के दायरे में किसी तरह का अवरोध नहीं होना चाहिए। इस दायरे में पेड़, मोबाइल टावर और ऊंची इमारतों जैसी बाधाओं को प्रतिबंधित किया गया है। पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता राजेश राव ने बताया कि प्रस्तावित स्थलों को लेकर कुछ आपत्तियां हैं। हेलिपैड के आसपास त्रिकोणीय आकार में 300 मीटर तक किसी तरह का अवरोध नहीं होना चाहिए। निर्माण के लिए इसी मानक को आधार बनाया जाएगा। फिलहाल शासन से स्वीकृति नहीं मिली है।
तहसील मुख्यालयों पर हेलिपैड निर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है। इसके बाद ब्लॉक मुख्यालयों पर भी हेलिपैड बनाने की योजना है। पूरी प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी। -अजय अंबष्ट, सीआरओ।
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हेलिपैड बनने से प्रशासनिक जरूरतों के साथ आपात परिस्थितियों में हेलीकॉप्टर उतारने की सुविधा मिल सकेगी। इसके अलावा वीवीआईपी और वीआईपी के आगमन पर हेलीकॉप्टर उतारने के लिए उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराने में भी सहूलियत होगी। सरकारी भूमि चिह्नित होने से निर्माण के लिए जमीन की व्यवस्था करने में आसानी होगी। योजना को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाना है।
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इन गांवों में चिह्नित की गई सरकारी जमीन
हेलीपैड निर्माण के लिए अलग-अलग तहसील क्षेत्रों में कई गांवों को चिह्नित किया गया है। बदलापुर तहसील के बछुआर, शाहगंज के निजामपुर और सदर तहसील के धर्मापुर, सुंगुलपुर, सिकरारा, भकुरा व बेलापार गांव शामिल हैं। इसी तरह केराकत तहसील में मुफ्तीगंज, रेहटी, नाउपुर और बिशुनपुरवा, जबकि मड़ियाहूं तहसील में उंचनीखुर्द, विधमौवा, गनेशपुर और जोगापुर गांवों में जमीन चिह्नित की गई है। निर्माण के लिए नवीन परती, पशुचर, उसर और बंजर भूमि के अलावा खेल मैदान तथा विद्यालयों के खेल मैदानों को भी प्रस्तावित स्थलों में शामिल किया गया है। चिह्नित जमीन पर हेलीपैड निर्माण की प्रक्रिया शासन से मंजूरी मिलने के बाद आगे बढ़ेगी।
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300 मीटर के दायरे में नहीं होना चाहिए अवरोध
हेलिपैड निर्माण के लिए चिह्नित स्थलों पर अनापत्ति प्रमाणपत्र को लेकर पेच फंसा है। निर्धारित मानकों के अनुसार प्रस्तावित हेलिपैड के आसपास त्रिकोणीय आकार में 300 मीटर के दायरे में किसी तरह का अवरोध नहीं होना चाहिए। इस दायरे में पेड़, मोबाइल टावर और ऊंची इमारतों जैसी बाधाओं को प्रतिबंधित किया गया है। पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता राजेश राव ने बताया कि प्रस्तावित स्थलों को लेकर कुछ आपत्तियां हैं। हेलिपैड के आसपास त्रिकोणीय आकार में 300 मीटर तक किसी तरह का अवरोध नहीं होना चाहिए। निर्माण के लिए इसी मानक को आधार बनाया जाएगा। फिलहाल शासन से स्वीकृति नहीं मिली है।
तहसील मुख्यालयों पर हेलिपैड निर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है। इसके बाद ब्लॉक मुख्यालयों पर भी हेलिपैड बनाने की योजना है। पूरी प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी। -अजय अंबष्ट, सीआरओ।