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सड़क किनारे पेड़ के नीचे गर्भवती ने तोड़ दिया दम
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महराजगंज। गर्भवती महिला की सही देखभाल को लेकर सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद लोग जागरुक नहीं हो रहे। ऐसी ही एक लापरवाही ने सोमवार को एक गर्भवती महिला की जान ले ली। चिकित्सक की ओर से स्थिति गंभीर बताकर रेफर किए जाने के बाद भी परिजन की जिद से महिला की सड़क किनारे पेड़ के नीचे ही जान चली गई। मामला स्थानीय सीएचसी का है।
सुजानगंज थाना क्षेत्र के रामनगर चेती ईंट भट्ठा पर रहकर बिहार के मुंगेर जिले के कुछ मजदूर काम करते हैं। इन्हीं मजदूरों में एक नवल की पत्नी मंजू (30) गर्भवती थी। सोमवार को तबीयत खराब होने पर नवल पत्नी को लेकर एंबुलेंस से महराजगंज सीएचसी पर आया। यहां काफी देर तक चली जांच व उपचार के बाद चिकित्सक ने महिला की हालत गंभीर बताते हुए उसे जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी। एंबुलेंस भी बुला ली गई, मगर बाद में पति व महिला ने तबीयत में सुधार की बात कह बाद में अस्पताल जाने को कहा। उनकी दलील थी कि तीन बच्चे ईंट भट्ठे पर अकेले हैं। उनकी देखभाल के लिए कोई नहीं है। वह पहले भट्ठे पर जाएंगे, उसके बाद वहां की स्थिति सही कर तब अस्पताल जाएंगे। यह कहते हुए नवल ने एंबुलेंस लौटा दिया और अस्पताल से सौ मीटर दूर सड़क के किनारे नीम के पेड़ के नीचे पत्नी को बैठाकर सवारी वाहन की तलाश में चला गया। कुछ देर बाद जब लौटा तो मंजू के प्राण पखेरू उड़ चुके थे। पति नवल का कहना था कि अस्पताल में उपचार के बाद मंजू ने तबीयत ठीक होने की बात कही थी। उसकी सहमति के बाद ही वह उसे पहले ईंट भट्ठे पर ले जा रहा था। उसे क्या पता था कि यह देरी उसे पत्नी से दूर कर देगी। उधर, महराजगंज सीएचसी के डॉ. स्वतंत्र गौतम का कहना था कि महिला की सांस फूल रही थी। ऐसे में उसकी गंभीर स्थिति को देख एंबुलेंस से जिला अस्पताल ले जाने को कहा गया। नवल ने एंबुलेंस में बैठने से इंकार कर दिया और पैदल ही आगे चला गया। महिला के मौत की सूचना दुखद है।
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सुजानगंज थाना क्षेत्र के रामनगर चेती ईंट भट्ठा पर रहकर बिहार के मुंगेर जिले के कुछ मजदूर काम करते हैं। इन्हीं मजदूरों में एक नवल की पत्नी मंजू (30) गर्भवती थी। सोमवार को तबीयत खराब होने पर नवल पत्नी को लेकर एंबुलेंस से महराजगंज सीएचसी पर आया। यहां काफी देर तक चली जांच व उपचार के बाद चिकित्सक ने महिला की हालत गंभीर बताते हुए उसे जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी। एंबुलेंस भी बुला ली गई, मगर बाद में पति व महिला ने तबीयत में सुधार की बात कह बाद में अस्पताल जाने को कहा। उनकी दलील थी कि तीन बच्चे ईंट भट्ठे पर अकेले हैं। उनकी देखभाल के लिए कोई नहीं है। वह पहले भट्ठे पर जाएंगे, उसके बाद वहां की स्थिति सही कर तब अस्पताल जाएंगे। यह कहते हुए नवल ने एंबुलेंस लौटा दिया और अस्पताल से सौ मीटर दूर सड़क के किनारे नीम के पेड़ के नीचे पत्नी को बैठाकर सवारी वाहन की तलाश में चला गया। कुछ देर बाद जब लौटा तो मंजू के प्राण पखेरू उड़ चुके थे। पति नवल का कहना था कि अस्पताल में उपचार के बाद मंजू ने तबीयत ठीक होने की बात कही थी। उसकी सहमति के बाद ही वह उसे पहले ईंट भट्ठे पर ले जा रहा था। उसे क्या पता था कि यह देरी उसे पत्नी से दूर कर देगी। उधर, महराजगंज सीएचसी के डॉ. स्वतंत्र गौतम का कहना था कि महिला की सांस फूल रही थी। ऐसे में उसकी गंभीर स्थिति को देख एंबुलेंस से जिला अस्पताल ले जाने को कहा गया। नवल ने एंबुलेंस में बैठने से इंकार कर दिया और पैदल ही आगे चला गया। महिला के मौत की सूचना दुखद है।
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