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अस्पतालों में बंद रही ओपीडी इलाज के लिए भटकते रहे मरीज
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जौनपुर। आयुर्वेेद के चिकित्सकों को शल्यक्रिया की अनुमति देने के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर नगर के निजी एलोपैथिक चिकित्सकों ने क्लीनिक बंद रखी। शुक्रवार को 12 घंटे तक सभी निजी अस्पतालों की ओपीडी बंद रही। इससे मरीजों को परेशानी हुई और उन्हें सरकारी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ा। गनीमत है कि आपातकालीन सेवाएं हड़ताल से बाहर थीं। आईएमए से जुडे चिकित्सकों का कहना है कि सरकार के फैसले से चिकित्सा की गुणवत्ता में गिरावट आएगी और मरीजों का हित प्रभावित होगा।
आईएमए के अध्यक्ष डा. एनके सिंह ने कहा कि 95 प्रतिशत सघन चिकित्सा सेवाएं आधुनिक चिकित्सा पद्धति के अस्पतालों में ही मिलती हैं। अब केंद्रीय भारतीय चिकित्सा काउंसिल की ओर से आयुर्वेद चिकित्सकों को 58 प्रकार की शल्य चिकित्सा करने की छूट दे दी गई। सरकार एलोपैथी अथवा (आधुनिक चिकित्सा पद्धति) को आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में मिलाने की कोशिश कर रही है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन मिलावटी चिकित्सा पद्धति का विरोध करता है। सरकार के इस निर्णय से चिकित्सकों की गुणवत्ता के साथ ही चिकित्सा के स्तर में गिरावट आएगी। बेहतर और सस्ते इलाज की चाहत में विदेशों से मरीज भारत में इलाज कराने आते हैं। गुणवत्ता गिरने पर ऐसे मरीज नहीं आएंगे। इसको देखते हुए सरकार को अपने फैसले पर फिर से विचार करना चाहिए। सचिव एए जाफरी ने कहा कि आईएमए मांग करता है कि चिकित्सा में खिचड़ी विधा को बढ़ावा न दिया जाए। हर पद्धति को इलाज करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए लेकिन उन्हें अपनी पद्धति के मुताबिक काम करना चाहिए। संगठन के पदाधिकारियों ने अपनी मांगों से संबधित ज्ञापन प्रधानमंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री को भेज दिया है।
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आईएमए के अध्यक्ष डा. एनके सिंह ने कहा कि 95 प्रतिशत सघन चिकित्सा सेवाएं आधुनिक चिकित्सा पद्धति के अस्पतालों में ही मिलती हैं। अब केंद्रीय भारतीय चिकित्सा काउंसिल की ओर से आयुर्वेद चिकित्सकों को 58 प्रकार की शल्य चिकित्सा करने की छूट दे दी गई। सरकार एलोपैथी अथवा (आधुनिक चिकित्सा पद्धति) को आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में मिलाने की कोशिश कर रही है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन मिलावटी चिकित्सा पद्धति का विरोध करता है। सरकार के इस निर्णय से चिकित्सकों की गुणवत्ता के साथ ही चिकित्सा के स्तर में गिरावट आएगी। बेहतर और सस्ते इलाज की चाहत में विदेशों से मरीज भारत में इलाज कराने आते हैं। गुणवत्ता गिरने पर ऐसे मरीज नहीं आएंगे। इसको देखते हुए सरकार को अपने फैसले पर फिर से विचार करना चाहिए। सचिव एए जाफरी ने कहा कि आईएमए मांग करता है कि चिकित्सा में खिचड़ी विधा को बढ़ावा न दिया जाए। हर पद्धति को इलाज करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए लेकिन उन्हें अपनी पद्धति के मुताबिक काम करना चाहिए। संगठन के पदाधिकारियों ने अपनी मांगों से संबधित ज्ञापन प्रधानमंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री को भेज दिया है।
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