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Jaunpur News: खेत से लौटते समय सांड़ के हमले से वृद्ध की मौत
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मीरगंज। थाना क्षेत्र के अदारी गांव में मंगलवार की देर शाम खेत से लौटते समय सांड़ के हमले से एक वृद्ध व्यक्ति की मौत हो गई। इस घटना से परिजनों में मातम छा गया। परिवार के लोगों ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया। अदारी गांव निवासी सुरेंद्रनाथ गिरी (72) मंगलवार की देर शाम अपने घर के पीछे स्थित आम के बगीचे से लौट रहे थे। खेत के पास पहुंचे थे तभी अचानक सांड़ ने उनपर हमला कर दिया। साड़ ने अपने सींग से उनका पेट फाड़ डाला। यह घटना देख रहे आस पास लोग दौड़े तो किसी तरह सांड़ को भगाया गया, लेकिन तब तक सुरेंद्र नाथ गंभीर रूप से घायल हो चुके थे। गंभीर स्थिति में उन्हें मछलीशहर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया। इसकी सूचना पुलिस को दी गई। परिवार के लोग पंचनामा के बाद अंतिम संस्कार कर दिए। घटना की सूचना मिलने पर परिवार में मातम छा गया। ग्राम प्रधान चंद्रसेन गिरी ने बताया सांड़ अभी तक कई को घायल कर चुका है। घटना के बाद पुलिस और एसडीएम को सूचना दी गई।
मुआवजे का है प्रावधान
कहीं भी सांड़ या नीलगाय के हमले में किसी व्यक्ति की मौत होती है तो उस मामले में मुआवजे का प्रावधान है। आपदा विशेषज्ञ प्रदीप कुमार ने बताया कि आपदा राहत कोष से चार लाख रुपये तक मुआवजा दिलाने की भी व्यवस्था है। इसके लिए संबंधित लेखपाल, एसडीएम की रिपोर्ट होनी जरूरी है।
पहले हो चुकी हैं इस तरह की घटनाएं
सांड़ व छुट्टा पशुओं के हमले से मौत के मामले पहले भी हो चुके हैं। सितंबर 2022 में जौनपुर शहर के मुफ्ती मोहल्ले में सांड़ के हमले से एक किशोर की मौत हो गई थी। इसी तरह जनवरी 2020 में सिकरारा क्षेत्र के बाकी गांव में एक बुजुर्ग अलाव ताप रहे थे तब सांड़ ने हमला कर दिया था। इससे वह घायल हो गए थे। वाराणसी में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। मार्च 2018 में रामपुर थाना क्षेत्र के नई यादव नगर नई बस्ती घर के बाहर सो रही बुजुर्ग महिला की मौत सांड़ के हमले में हो गई थी। अक्तूबर 2017 में रामपुर थाना क्षेत्र के जोगापुर में सांड के हमले से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। सितंबर 2021 में जलालपुर के छतारी गांव में फसल से छुट्टा पशुओं को भगाने के दौरान मवेशियों ने एक व्यक्ति पर हमला कर दिया था।
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मुआवजे का है प्रावधान
कहीं भी सांड़ या नीलगाय के हमले में किसी व्यक्ति की मौत होती है तो उस मामले में मुआवजे का प्रावधान है। आपदा विशेषज्ञ प्रदीप कुमार ने बताया कि आपदा राहत कोष से चार लाख रुपये तक मुआवजा दिलाने की भी व्यवस्था है। इसके लिए संबंधित लेखपाल, एसडीएम की रिपोर्ट होनी जरूरी है।
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पहले हो चुकी हैं इस तरह की घटनाएं
सांड़ व छुट्टा पशुओं के हमले से मौत के मामले पहले भी हो चुके हैं। सितंबर 2022 में जौनपुर शहर के मुफ्ती मोहल्ले में सांड़ के हमले से एक किशोर की मौत हो गई थी। इसी तरह जनवरी 2020 में सिकरारा क्षेत्र के बाकी गांव में एक बुजुर्ग अलाव ताप रहे थे तब सांड़ ने हमला कर दिया था। इससे वह घायल हो गए थे। वाराणसी में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। मार्च 2018 में रामपुर थाना क्षेत्र के नई यादव नगर नई बस्ती घर के बाहर सो रही बुजुर्ग महिला की मौत सांड़ के हमले में हो गई थी। अक्तूबर 2017 में रामपुर थाना क्षेत्र के जोगापुर में सांड के हमले से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। सितंबर 2021 में जलालपुर के छतारी गांव में फसल से छुट्टा पशुओं को भगाने के दौरान मवेशियों ने एक व्यक्ति पर हमला कर दिया था।
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