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नगर पालिका को नाम मात्र किराया, वसूल रहे हजारों

Sun, 12 Sep 2021 11:47 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 12 Sep 2021 11:47 PM IST
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Nominal rent to the municipality, thousands are being charged
नगर पालिका जौनपुर की किराए पर ली गई दुकानों में से अधिकांश को आवंटियों ने दूसरे को किराए पर उठा दिया है। अपने तो लोग नगर पालिका को नाम मात्र का किराया दे रहे हैं और दूसरे से पांच से दस हजार रुपये तक किराया वसूल रहे हैं। ऐसा करने वालों की संख्या भी एक दो नहीं बल्कि 30 से 40 प्रतिशत है। इस तरह की बात सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। प्रशासन की तरफ से फिलहाल नगर पालिका की किराए पर दी गई 490 दुकानों की जांच कराई जाएगी।
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नगर पालिका के आय-व्यय को लेकर हाल ही में किए गए समीक्षा में हैरान करने वाली बातें सामने आई हैं। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में 30-40 प्रतिशत ऐसे लोगों के नाम सामने आए हैं, जिन्होंने नाम मात्र के मासिक किराये पर दुकान आवंटित कराकर दूसरे को पांच से दस हजार रुपये प्रतिमाह के किराये पर दे दिया है। इस जांच रिपोर्ट में नगर पालिका के कई जिम्मेदारों की लापरवाही भी सामने आई है। नगर पालिका जौनपुर की तरफ से वर्ष 1972-73 से 490 दुकानों को किराए पर देने की व्यवस्था शुरू की गई। नियमानुसार इन दुकानों को अधिकतम 30 साल तक किराए पर दिया सकता है। नवीनीकरण के लिए किराए के पुनर्निर्धारण के बाद इसकी अवधि फिर बढ़ाई जा सकती है।
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महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन 490 दुकानों को किराए पर दिया गया है, उसमें से 25 से 30 प्रतिशत ऐसे लोग हैं जिनकी मौत हो चुकी है और उनका किराया भी आना बंद हो चुका है। इसके बावजूद जिम्मेदारों का ध्यान नगर पालिका प्रशासन को हो रही आर्थिक क्षति की तरफ नहीं गया। इसी प्रकार करीब 30-40 प्रतिशत ऐसे भी लोग हैं, जो नाम मात्र की धनराशि किराया के नाम पर नगर पालिका परिषद को दो रहे हैं और दूसरे को किराए पर उठाकर उनसे पांच से दस हजार रुपये तक अपने किराया वसूल रहे हैं। नगर पालिका की दुकानों का स्वरूप भी बदले जाने पर मनाही है जबकि कई किराएदारों ने दुकानों का स्वरूप भी बदल दिया है। पालिका प्रशासन लगातार इसकी अनदेखी करता आ रहा है। जिसके चलते अब तक 23 लाख रुपये केवल दुकानों का किराया बकाया है। इसकी समीक्षा में जब गड़बड़ी सामने आई तो अपर जिलाधिकारी ने इसकी जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी है। टीम में एसडीएम सदर, वरिष्ठ कोषाधिकारी और नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी शामिल हैं। जांच की निगरानी के लिए अपर जिलाधिकारी को नामित किया गया है। तीन अधिकारियों की टीम दुकानों का सत्यापन करेगी। बकाया की वास्तविक जानकारी प्राप्त करेगी। इसके बाद बकाया जमा कराएगी। दुकानों का वर्तमान में चल रहे रेट के हिसाब से किराए का पुनर्निर्धारण करेगी, उसके बाद दुकान को किराए पर दिए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। अपर जिलाधिकारी राम कुमार द्विवेदी का कहना है कि प्रारंभिक जांच में नगर पालिका प्रशासन की तरफ से नवीनीकरण, किराए के पुनर्निर्धारण एवं वसूली आदि के कार्य में अनियमितता बरते जाने की बात सामने आई है। संबंधित अधिकारियों व कर्मियों पर समय से कार्रवाई नहीं किए जाने कारण नगर पालिका को आर्थिक क्षति हुई है। इस तरह की गड़बड़ी की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट हिमांशु नागपाल का कहना है कि नगर पालिका को दुकानों से संबंधित से सारे अभिलेख उपलब्ध कराने को कहा गया है। नए सिरे से किराए का निर्धारण करके किराए पर दुकानों को देने के लिए नई नीति बनाई जाएगी। उसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
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