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संस्कृति और मूल्यों से जोड़ने का माध्यम है नई शिक्षा नीति
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सिंगरामऊ। राजा हरपाल सिंह महाविद्यालय के शिक्षा संकाय में सोमवार को एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन किया गया। इसमें नई शिक्षा नीति के स्वरूप और उसकी विशेषताओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
उद्घाटन सत्र की मुख्य वक्ता मानव रचना विवि फरीदाबाद के शिक्षा व मानविकी संकाय की डीन डॉ. बबीता पाराशर ने बताया कि नई शिक्षा नीति से हमारी संस्कृति और मूल्यों से जोड़ने का एक प्रयास किया गया है। इसमें कई अवसर छिपे हुए हैं। साथ ही अनेक चुनौतियां भी खड़ी हैं, जिनको साथ लेकर चलने की आवश्यकता है।
तकनीकी सत्र के मुख्य अतिथि केएल डीएवी पीजी कॉलेज रुड़की के प्रोफेसर डॉ. मनोज शर्मा और डॉ. योगेश कुमार रहे। इस सत्र में डॉ. जी.नागेश्वर राव, प्रज्ञा सिंह, रश्मि राज, दीपक कनौजिया, सतीश गुप्ता, हिदायतुल्ला आदि के शोध पत्र पढ़े गए। डॉ मनोज शर्मा ने सभी पत्रों का सार बताते हुए नई शिक्षा नीति के महत्व पर प्रकाश डाला। समापन सत्र की मुख्य अतिथि केएम कॉलेज भिवानी की डॉ. अनुराधा सिंधवानी ने कहा कि नई शिक्षा नीति में तकनीकी शिक्षा के समावेश और वर्तमान में मौजूद सुविधाओं, संरचनात्मक ढांचे की क्षमता का एक तुलनात्मक प्रारूप प्रस्तुत किया गया है। अंत में प्राचार्य डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह ने नई शिक्षा नीति को दूरदर्शी नीति बताते हुए इसके उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए सभी को तत्पर रहने का मूल मंत्र दिया। इसमें डॉ. विभा सिंह, डॉ. अनुभा शुक्ला, राहुल यादव, डॉ. अंजनी कुमार मिश्र आदि ने हिस्सा लिया।
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उद्घाटन सत्र की मुख्य वक्ता मानव रचना विवि फरीदाबाद के शिक्षा व मानविकी संकाय की डीन डॉ. बबीता पाराशर ने बताया कि नई शिक्षा नीति से हमारी संस्कृति और मूल्यों से जोड़ने का एक प्रयास किया गया है। इसमें कई अवसर छिपे हुए हैं। साथ ही अनेक चुनौतियां भी खड़ी हैं, जिनको साथ लेकर चलने की आवश्यकता है।
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तकनीकी सत्र के मुख्य अतिथि केएल डीएवी पीजी कॉलेज रुड़की के प्रोफेसर डॉ. मनोज शर्मा और डॉ. योगेश कुमार रहे। इस सत्र में डॉ. जी.नागेश्वर राव, प्रज्ञा सिंह, रश्मि राज, दीपक कनौजिया, सतीश गुप्ता, हिदायतुल्ला आदि के शोध पत्र पढ़े गए। डॉ मनोज शर्मा ने सभी पत्रों का सार बताते हुए नई शिक्षा नीति के महत्व पर प्रकाश डाला। समापन सत्र की मुख्य अतिथि केएम कॉलेज भिवानी की डॉ. अनुराधा सिंधवानी ने कहा कि नई शिक्षा नीति में तकनीकी शिक्षा के समावेश और वर्तमान में मौजूद सुविधाओं, संरचनात्मक ढांचे की क्षमता का एक तुलनात्मक प्रारूप प्रस्तुत किया गया है। अंत में प्राचार्य डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह ने नई शिक्षा नीति को दूरदर्शी नीति बताते हुए इसके उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए सभी को तत्पर रहने का मूल मंत्र दिया। इसमें डॉ. विभा सिंह, डॉ. अनुभा शुक्ला, राहुल यादव, डॉ. अंजनी कुमार मिश्र आदि ने हिस्सा लिया।
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