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नगर पंचायत बोर्ड की बैठक में सभ्ाासद भ्ाड़के
Updated Sun, 01 Feb 2015 12:51 AM IST
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स्थानीय नगर पंचायत बोर्ड की बैठक में शनिवार को जमकर हंगामा हुआ। विकास कार्यों में 78 लाख का घोटाले का आरोप लगाते हुए मनोनीत सभासद धरने पर बैठ गए।
धरने पर बैठे सभासदों का आरोप था कि उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई तो उन्हें बोर्ड की बैठक से बाहर कर दिया गया। मौके पर पहुंचे विधायक शचींद्रनाथ त्रिपाठी ने इस संबंध में जिलाधिकारी से फोन पर वार्ता की। डीएम ने मामले की जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया तो शाम 4:45 बजे धरना समाप्त हुआ।
नगर पंचायत बोर्ड की बैठक में अधिशासी अधिकारी एसएन सिंह ने पिछली कार्यवाही को पढ़कर सुनाया। पिछली कार्यवाही की रिपोर्ट पढ़ रहे अधिशासी अधिकारी ने जैसे ही बताया कि कृपाशंकर प्रजापति के मकान से चंद्रदेव के मकान तक 78 लाख की लागत से तारकोल की सड़क व नाली बनाई गई है।
इस सड़क के निर्माण के लिए कुल चार किस्तों में भुगतान किया गया है। इस पर सभासद शिवेंद्र सेठ, जमाल हासमी और चमेला देवी ने कहा कि मौके पर कोई सड़क नहीं बनाई गई है। जिस स्थान पर सड़क और नाली निर्माण की बात की जा रही है वहां कोई काम ही नहीं हुआ है तो पैसा कैसे निकाल लिया गया।
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सभासदों ने आरोप लगाया कि अध्यक्ष और ईओ की मिलीभगत से सड़क निर्माण के नाम पर 78 लाख का घोटाला कर लिया गया है। इन सभासदों ने ईओ और अध्यक्ष से जवाब मांगा तो उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसी बात पर मिनी सदन में हंगामा मच गया।
सवाल का संतोषजनक जवाब न मिलने से गुस्साए सभासद सदन से बाहर निकल कर धरने पर बैठ गए। आरोप लगाया कि उन्हें जबरन बैठक से बाहर निकाल दिया गया। धरने पर बैठे सभासदों ने यह भी आरोप लगाया कि इस तरह के कई और घोटाले पहले हुए हैं जिसकी शिकायत विभागीय मंत्री आजम खां और सचिव से की गई है।
शिकायत पर जांच भी चल रही है। फिर भी शासकीय धन का दुरुपयोग बंद नहीं हो रहा है। यह भी आरोप है कि नाराज सभासदों को बाहर कर अंदर से दरवाजा बंद कर लिया गया।
सभासदों के धरने पर बैठने की सूचना पर पहुंचे विधायक शचींद्रनाथ त्रिपाठी ने डीएम से फोन पर वार्ता की। डीएम ने मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया तो सभासद शाम 4:45 बजे धरना समाप्त किए।
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धरने पर बैठे सभासदों का आरोप था कि उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई तो उन्हें बोर्ड की बैठक से बाहर कर दिया गया। मौके पर पहुंचे विधायक शचींद्रनाथ त्रिपाठी ने इस संबंध में जिलाधिकारी से फोन पर वार्ता की। डीएम ने मामले की जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया तो शाम 4:45 बजे धरना समाप्त हुआ।
नगर पंचायत बोर्ड की बैठक में अधिशासी अधिकारी एसएन सिंह ने पिछली कार्यवाही को पढ़कर सुनाया। पिछली कार्यवाही की रिपोर्ट पढ़ रहे अधिशासी अधिकारी ने जैसे ही बताया कि कृपाशंकर प्रजापति के मकान से चंद्रदेव के मकान तक 78 लाख की लागत से तारकोल की सड़क व नाली बनाई गई है।
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इस सड़क के निर्माण के लिए कुल चार किस्तों में भुगतान किया गया है। इस पर सभासद शिवेंद्र सेठ, जमाल हासमी और चमेला देवी ने कहा कि मौके पर कोई सड़क नहीं बनाई गई है। जिस स्थान पर सड़क और नाली निर्माण की बात की जा रही है वहां कोई काम ही नहीं हुआ है तो पैसा कैसे निकाल लिया गया।
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सभासदों ने आरोप लगाया कि अध्यक्ष और ईओ की मिलीभगत से सड़क निर्माण के नाम पर 78 लाख का घोटाला कर लिया गया है। इन सभासदों ने ईओ और अध्यक्ष से जवाब मांगा तो उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसी बात पर मिनी सदन में हंगामा मच गया।
सवाल का संतोषजनक जवाब न मिलने से गुस्साए सभासद सदन से बाहर निकल कर धरने पर बैठ गए। आरोप लगाया कि उन्हें जबरन बैठक से बाहर निकाल दिया गया। धरने पर बैठे सभासदों ने यह भी आरोप लगाया कि इस तरह के कई और घोटाले पहले हुए हैं जिसकी शिकायत विभागीय मंत्री आजम खां और सचिव से की गई है।
शिकायत पर जांच भी चल रही है। फिर भी शासकीय धन का दुरुपयोग बंद नहीं हो रहा है। यह भी आरोप है कि नाराज सभासदों को बाहर कर अंदर से दरवाजा बंद कर लिया गया।
सभासदों के धरने पर बैठने की सूचना पर पहुंचे विधायक शचींद्रनाथ त्रिपाठी ने डीएम से फोन पर वार्ता की। डीएम ने मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया तो सभासद शाम 4:45 बजे धरना समाप्त किए।