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दो सौ से अधिक गांवों की बत्ती गुल
अमर उजाला ब्यूरो, जौनपुर
Updated Fri, 31 Jul 2015 12:29 AM IST
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बिजली को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। सैकड़ों गांवों में अंधेरा छाया होने के बाद भी समस्या दूर नहीं हो रही है। हर कोई बिजली को लेकर परेशान है। दैनिक कार्य भी लोगों का बिजली की वजह से प्रभावित हो रहा है।
सुइथाकला गांव के 50 गांव, शाहगंज के 15, जफराबाद के 25, मुंगराबादशाहपुर के 8, खुटहन के बारह, बदलापुर के छह, बक्शा के 10, सुजानगंज के आठ, केराकत के 14 समेत दो सौ से अधिक गांवों में बत्ती गुल होने से लोगों की जिंदगी बद से
बदतर हो गई है। उक्त क्षेत्रों में कहीं ट्रांसफार्मर जल गए हैं तो कहीं तार टूटकर गिर गए हैं। लेकिन जनता के अधिकतर रहनुमा इस समस्या को लेकर संजीदा नहीं हैं। यही कारण है कि गत दिनों जनता ने चंदौली जिले में एक विधायक को
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बंधक बनाकर अपने गुस्से का इजहार किया था। जिले में एक कैबिनेट मंत्री, तीन राज्यमंत्री और सत्ता पक्ष के सात विधायकों के बावजूद भी बिजली का हालत ठीक नहीं है। कहने को तो जिले में भाजपा के दो सांसद, सपा के सात विधायक,
कांग्रेस और भाजपा के एक-एक विधायक हैं। लेकिन कुछ क्षेत्रों को छोड़ दिया जाए तो बाकी इलाकों में बिजली की हालत काफी खराब है। हालात तो यह है कि महीने में सैकड़ों से अधिक की संख्या में ट्रांसफार्मर जले पड़े हैं लेकिन उन्हें समय से
ठीक नहीं किया गया। ग्रामीणों की शिकायत पर भी जनप्रतिनिधि या तो ध्यान नहीं देते या तो उनकी बातें कोई सुनता ही नहीं है।
बता दें कि शासन का निर्देश है कि ग्रामीण अंचल में 10 घंटे और शहरी इलाकों में 15 घंटे बिजली दी जाए। लेकिन सच्चाई यह है कि ग्रामीण अंचलों में चार से पांच घंटे और शहरी इलाकों में 8 से 10 घंटे बिजली मिल रही है। इससे लोगों में काफी नाराजगी है।
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सुइथाकला गांव के 50 गांव, शाहगंज के 15, जफराबाद के 25, मुंगराबादशाहपुर के 8, खुटहन के बारह, बदलापुर के छह, बक्शा के 10, सुजानगंज के आठ, केराकत के 14 समेत दो सौ से अधिक गांवों में बत्ती गुल होने से लोगों की जिंदगी बद से
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बदतर हो गई है। उक्त क्षेत्रों में कहीं ट्रांसफार्मर जल गए हैं तो कहीं तार टूटकर गिर गए हैं। लेकिन जनता के अधिकतर रहनुमा इस समस्या को लेकर संजीदा नहीं हैं। यही कारण है कि गत दिनों जनता ने चंदौली जिले में एक विधायक को
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बंधक बनाकर अपने गुस्से का इजहार किया था। जिले में एक कैबिनेट मंत्री, तीन राज्यमंत्री और सत्ता पक्ष के सात विधायकों के बावजूद भी बिजली का हालत ठीक नहीं है। कहने को तो जिले में भाजपा के दो सांसद, सपा के सात विधायक,
कांग्रेस और भाजपा के एक-एक विधायक हैं। लेकिन कुछ क्षेत्रों को छोड़ दिया जाए तो बाकी इलाकों में बिजली की हालत काफी खराब है। हालात तो यह है कि महीने में सैकड़ों से अधिक की संख्या में ट्रांसफार्मर जले पड़े हैं लेकिन उन्हें समय से
ठीक नहीं किया गया। ग्रामीणों की शिकायत पर भी जनप्रतिनिधि या तो ध्यान नहीं देते या तो उनकी बातें कोई सुनता ही नहीं है।
बता दें कि शासन का निर्देश है कि ग्रामीण अंचल में 10 घंटे और शहरी इलाकों में 15 घंटे बिजली दी जाए। लेकिन सच्चाई यह है कि ग्रामीण अंचलों में चार से पांच घंटे और शहरी इलाकों में 8 से 10 घंटे बिजली मिल रही है। इससे लोगों में काफी नाराजगी है।