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आस्था का केंद्र है मां मैहर मंदिर
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Sat, 09 Apr 2016 01:14 AM IST
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परमानतपुर स्थित मां मैहर देवी की आकर्षक प्रतिमा।
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शहर के शास्त्रीनगर परमानतपुर मोहल्ला स्थित मां शारदा मंदिर लोगों की गहरी आस्था का केंद्र है। जनपद ही नहीं पूर्वांचल के तमाम जिलों से लोग यहां दर्शन पूजन के लिए आते हैं।
मंदिर की स्थापना सन 1988 में संत राधेश्याम गुप्त ने करवाया था। वह अक्सर बीमार रहते थे।
चिकित्सकों ने उन्हें जवाब दे दिया था। असहाय श्री गुप्त मां मैहर मंदिर, सतना, मध्य प्रदेश जाकर प्रसाद चढ़ाकर दर्शन पूजन किया और मातेश्वरी से प्रार्थना की कि मैं बीमार हूं डाक्टरों ने जवाब दे दिया है। मां से विनती किया कि मैं शारीरिक रूप से ठीक हो जाऊंगा तो आप के दर्शन के लिए जो लोग यहां तक नहीं पहुंच पाते हैं।
उनके लिए जौनपुर में मंदिर का निर्माण कराऊंगा। मां मैहर वाली ने उनकी विनती सुन ली ओर वह पूरी तरह से स्वस्थ हो गए। इसके बाद मंदिर का निर्माण कराया। तभी से यह मंदिर जिले ही नहीं गैर जनपद के लोगों के लिए आस्था और विश्वास का केंद्र बना हुआ है। हर वर्ष नवरात्र में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दरबार में मत्था टेकने आते हैं।
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मंदिर में हर वर्ष मांगलिक कार्यक्रम भी होते हैं। मंदिर के बगल स्थित हाल में गरीब और असहाय लोगों का मांगलिक कार्य कराया जाता है। प्रधान पुजारी सूर्य प्रकाश जायसवाल की देखरेख में हर वर्ष स्थापना दिवस पर भंडारा और प्रसाद वितरण होता है। रात्रि जागरण के अलावा भजन संध्या में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं।
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मंदिर की स्थापना सन 1988 में संत राधेश्याम गुप्त ने करवाया था। वह अक्सर बीमार रहते थे।
चिकित्सकों ने उन्हें जवाब दे दिया था। असहाय श्री गुप्त मां मैहर मंदिर, सतना, मध्य प्रदेश जाकर प्रसाद चढ़ाकर दर्शन पूजन किया और मातेश्वरी से प्रार्थना की कि मैं बीमार हूं डाक्टरों ने जवाब दे दिया है। मां से विनती किया कि मैं शारीरिक रूप से ठीक हो जाऊंगा तो आप के दर्शन के लिए जो लोग यहां तक नहीं पहुंच पाते हैं।
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उनके लिए जौनपुर में मंदिर का निर्माण कराऊंगा। मां मैहर वाली ने उनकी विनती सुन ली ओर वह पूरी तरह से स्वस्थ हो गए। इसके बाद मंदिर का निर्माण कराया। तभी से यह मंदिर जिले ही नहीं गैर जनपद के लोगों के लिए आस्था और विश्वास का केंद्र बना हुआ है। हर वर्ष नवरात्र में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दरबार में मत्था टेकने आते हैं।
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मंदिर में हर वर्ष मांगलिक कार्यक्रम भी होते हैं। मंदिर के बगल स्थित हाल में गरीब और असहाय लोगों का मांगलिक कार्य कराया जाता है। प्रधान पुजारी सूर्य प्रकाश जायसवाल की देखरेख में हर वर्ष स्थापना दिवस पर भंडारा और प्रसाद वितरण होता है। रात्रि जागरण के अलावा भजन संध्या में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं।