जौनपुर: मासूम से दुष्कर्म और हत्या करने के दोषी को आजीवन कारावास, 15 जून की रात घटी थी खौफनाक घटना
जौनपुर जिले मुंगराबादशाहपुर थाना क्षेत्र के एक गांव 15 जून की रात पेड़ के नीचे एक परिवार के साथ सोया था। रात में किसी समय आरोपी उसकी सात वर्षीय बच्ची को उठा ले गया। सुबह बच्ची का शव मिला था।
विस्तार
अपर सत्र न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट काशी प्रसाद सिंह यादव ने रात में सोती हुई बच्ची के साथ दरिंदगी कर गला दबाकर हत्या के मामले में आरोपी कलीम उर्फ डफाली को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।
बच्ची के पिता ने जौनपुर के मुंगराबादशाहपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अभियोजन के मुताबिक वह परिवार के साथ पंचायत भवन के पास खुले में रहता था। मांग कर भोजन की व्यवस्था करता था। 15 जून को पेड़ के नीचे परिवार के साथ सोया था। रात करीब एक बजे आरोपी कलीम उर्फ डफाली उससे बीड़ी,माचिस व चिलम ले गया था। इसके बाद वो लोग सो गए।
रात में किसी समय आरोपी उसकी सात वर्षीय बच्ची को उठा ले गया। सुबह बच्ची नहीं दिखी तो इधर-उधर तलाश किया। डेढ़ सौ मीटर दूर वह मृत पड़ी मिली। मुंह से खून निकला था। गर्दन पर नाखून के खंरोच तथा शरीर में घाव के निशान थे। उसके साथ दरिंदगी करने के बाद आरोपी कलीम ने पकड़े जाने की डर से उसकी हत्या कर दी थी।
मृत्युदंड से दंडित किए जाने की थी मांग
पढ़ेंः स्कूल में बच्ची से दरिंदगी: 9वीं के छात्र ने लंच के समय दिया था वारदात को अंजाम, भेजा गया बाल सुधार गृह
शिक्षिका से दुष्कर्म और आत्महत्या के मामले में डायरेक्टर दोषमुक्त
अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम अरविंद कुमार श्रीवास्तव ने शाहगंज थाना क्षेत्र के एक स्कूल की शिक्षिका से दुराचार करने एवं आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने के मामले में स्कूल डायरेक्टर को दोषमुक्त कर दिया। तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक शाहगंज पूर्णमासी कन्नौजिया ने 26 जनवरी 2011 को शाहगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
इसके मुताबिक. शिक्षिका के सुसाइड नोट में अंकित विवरण में पाया गया कि वह विधवा थी। स्कूल के डायरेक्टर आरोपी रणधीर ठाकुर से उसकी प्रगाढ़ता थी। शादी का झूठा आश्वासन देकर आरोपी ने शिक्षिका के साथ संबंध बनाया। कुछ समय बाद आरोपी उसे और उसके पुत्र को जान से मारने की धमकी देने लगा, जिससे तंग आकर 26 जनवरी 2011 को आरोपी के आवास के सामने खुद अपने शरीर पर पेट्रोल डालकर आत्महत्या कर ली थी।
पुलिस ने कोर्ट में केस डायरी दाखिल की। अभियोजन पक्ष से शासकीय अधिवक्ता अनूप शुक्ला तथा बचाव पक्ष से पंकज कुमार श्रीवास्तव ने मामले की पैरवी की। कोर्ट में मृत्यु पूर्व बयान और अन्य साक्ष्य संदेहास्पद साबित हुआ। घटना के समय आरोपी मौके पर नहीं था।
आरोपी का भाई ही शिक्षिका को चिकित्सक के पास ले गया था। कोर्ट में यह भी साबित नहीं हुआ कि आरोपी ने मृतका को आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित किया था। अन्य तथ्य भी कोर्ट में साबित नहीं हो पाया। कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में आरोपी को दोषमुक्त कर दिया।