जौनपुर: 81 की उम्र में जज्बा नई पीढ़ी के शिक्षकों से ज्यादा, रिटायरमेंट के 21 साल बाद भी दे रहीं शिक्षा का दान
उम्र 81 वर्ष, लेकिन जज्बा किसी नौजवान से कम नहीं। चाहे सर्दी हो, गर्मी हो या बरसात। वह पूरी निष्ठा से अपने कर्तव्यपथ पर डटी हुई हैं। सेवानिवृत्ति के 21 वर्ष बाद भी स्कूल से उनका जुड़ाव ठीक वैसे ही है, जैसे सेवाकाल में था। उम्र की सीमा पार करने पर सरकार ने उन्हें सेवानिवृत्त कर दिया, लेकिन वह आज भी पूरे समर्पण भाव से शिक्षा दान कर नौनिहालों के भविष्य को ज्ञान की रोशनी से आलोकित करने में जुटी हैं।
जौनपुर जिले के बदलापुर तहसील अंतर्गत मिरशादपुर निवासी कमला सिंह की ऐसी ही शख्सियत है। अपने कर्तव्य पालन के लिए राष्ट्रपति के हाथों श्रेष्ठ शिक्षक के पुरस्कार से सम्मानित कमला सिंह का मानना है कि शिक्षा बांटने की चीज है। इसे जितना फैलाएंगे, उतना ही समाज और राष्ट्र आगे बढ़ेगा।
क्षेत्र के मिरशादपुर गांव निवासी सूर्यप्रताप सिंह की पत्नी कमला सिंह 18 दिसम्बर वर्ष 1965 को प्राथमिक विद्यालय में बतौर शिक्षक नियुक्त हुई। कुशल शिक्षक के रूप में इनकी पहचान बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक विद्यालयों में ही नहीं बल्कि समाज में भी होने लगी। परिणामस्वरूप बाद में वह गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापिका हो गईं।
कुशल शिक्षिका के साथ ही वह सामाजिक कार्यों में भी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेती थीं। उत्कृष्ट कार्य के चलते पांच सितम्बर वर्ष 1998 को शिक्षक दिवस के अवसर पर तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन ने राष्ट्रपति भवन में पुरस्कृत कर उन्हें श्रेष्ठ शिक्षक के सम्मान से अलंकृत किया था। 30 जून 2001 को सेवानिवृत्त होने के बाद भी वह 81 वर्ष की उम्र में बीस वर्ष से प्रति दिन विद्यालय आकर बच्चों को विज्ञान तथा अंग्रेजी व संस्कृत विषय की शिक्षा दे रही हैं।