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आईएमए ने आयुष चिकित्सकों के खिलाफ खोला मोर्चा
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जौनपुर। आयुर्वेद चिकित्सकों को एलोपैथिक दवाओं से इलाज और आपरेशन करने की छूट देने पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सदस्यों ने विरोध किया है। उन्होंने 11 दिसंबर को ओपीडी बंद कर विरोध जताने का निर्णय लिया है।
आईएमए के सदस्यों का कहना है कि बिना पढ़ाई किए ही आयुष चिकित्सकों को सर्जरी करने की छूट देना मरीज के साथ खिलवाड़ है। सर्जरी करने के लिए तीन साल की पढ़ाई और अभ्यास की जरूरत होती है। यदि आयुर्वेद के चिकित्सकों को सर्जरी की छूट देनी है तो उन्हें अलग से तीन साल की सर्जरी पढ़ाई जाए और विशेषज्ञता दी जाए। आयुर्वेद में पाइल्स आदि का आपरेशन का तरीका जरूर सिखाया जाता है लेकिन उनको पूरी शल्यक्रिया नहीं सिखाई जाती है। सरकार ने पहले आयुर्वेद चिकित्सकों को एलोपैथिक दवाओं से इलाज करने की छूट देकर अनुचित किया है।
एलोपैथ में शल्यक्रिया की विशेष पढ़ाई होती है। नाक, कान, हड्डी, आंख आदि की शल्य क्रिया के लिए अलग से पढ़ना पड़ता है। तीन साल तक सर्जरी की पढाई होती है। इसके बाद हमें आपरेशन का अधिकार मिलता है। आयुष चिकित्सकों को आपरेशन करने की छूट देना अनुचित है क्योंकि वहां कुछ चुनिंदा विषयों में ही शल्यक्रिया होती है। आयुर्वेद को डाक्टरों को सर्जरी व एलोपैथी में इलाज की छूट देने से खिचड़ी चिकित्सा तंत्र विकसित होगा, जिसका हम विरोध करते हैं।
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डा. एनके सिंह, अध्यक्ष आईएमए
आयुर्वेदिक चिकित्सकों को भी सर्जरी की पढ़ाई कराई जाती है। बीएएमएस और एमएस करने वाले चिकित्सकों को शल्यक्रिया का पूरा अधिकार है। सर्जरी करने का अधिकार देने से पहले चिकित्सकों की कमेटी से इसकी जांच-परख की है। आयुर्वेद में भी वह सब पढ़ाया जो आधुनिक चिकित्सा पद्धति में पढ़ाया जाता है। सरकार का निर्णय सही है। आईएमए इसका विरोध क्यों कर रहा है, यह समझ से परे है। आयुर्वेद में भी चिकित्सकों की कमी नहीं है। जानकार और योग्य चिकित्सक अपनी जिम्मेदारी का पूरी तरह से निर्वहन करेंगे।
डा. कमर अब्बास, संरक्षक नीमा
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आईएमए के सदस्यों का कहना है कि बिना पढ़ाई किए ही आयुष चिकित्सकों को सर्जरी करने की छूट देना मरीज के साथ खिलवाड़ है। सर्जरी करने के लिए तीन साल की पढ़ाई और अभ्यास की जरूरत होती है। यदि आयुर्वेद के चिकित्सकों को सर्जरी की छूट देनी है तो उन्हें अलग से तीन साल की सर्जरी पढ़ाई जाए और विशेषज्ञता दी जाए। आयुर्वेद में पाइल्स आदि का आपरेशन का तरीका जरूर सिखाया जाता है लेकिन उनको पूरी शल्यक्रिया नहीं सिखाई जाती है। सरकार ने पहले आयुर्वेद चिकित्सकों को एलोपैथिक दवाओं से इलाज करने की छूट देकर अनुचित किया है।
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एलोपैथ में शल्यक्रिया की विशेष पढ़ाई होती है। नाक, कान, हड्डी, आंख आदि की शल्य क्रिया के लिए अलग से पढ़ना पड़ता है। तीन साल तक सर्जरी की पढाई होती है। इसके बाद हमें आपरेशन का अधिकार मिलता है। आयुष चिकित्सकों को आपरेशन करने की छूट देना अनुचित है क्योंकि वहां कुछ चुनिंदा विषयों में ही शल्यक्रिया होती है। आयुर्वेद को डाक्टरों को सर्जरी व एलोपैथी में इलाज की छूट देने से खिचड़ी चिकित्सा तंत्र विकसित होगा, जिसका हम विरोध करते हैं।
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डा. एनके सिंह, अध्यक्ष आईएमए
आयुर्वेदिक चिकित्सकों को भी सर्जरी की पढ़ाई कराई जाती है। बीएएमएस और एमएस करने वाले चिकित्सकों को शल्यक्रिया का पूरा अधिकार है। सर्जरी करने का अधिकार देने से पहले चिकित्सकों की कमेटी से इसकी जांच-परख की है। आयुर्वेद में भी वह सब पढ़ाया जो आधुनिक चिकित्सा पद्धति में पढ़ाया जाता है। सरकार का निर्णय सही है। आईएमए इसका विरोध क्यों कर रहा है, यह समझ से परे है। आयुर्वेद में भी चिकित्सकों की कमी नहीं है। जानकार और योग्य चिकित्सक अपनी जिम्मेदारी का पूरी तरह से निर्वहन करेंगे।
डा. कमर अब्बास, संरक्षक नीमा