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गोमती किनारे बोरिंग का पानी हुआ दूषित
अमर उजाला ब्यूरो , जौनपुर
Updated Thu, 04 Jun 2015 12:47 AM IST
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गोमती में प्रदूषण का असर अब नदी किनारे के हैंडपंप में भी दिखने लगा है। प्रदूषित पानी पीकर लोग टायफाइड, मस्तिष्क ज्वर, पेट, सिरदर्द, पीलिया के शिकार हो रहे हैं।
इसका खुलासा पानी की जांच से हुआ है। यह जांच स्वच्छ गंगा रिसर्च लेबोरेट्री, वाराणसी में हुई है। वैसे तो जौनपुर में पांच नदियां हैं। जिसमें कुछ बरसाती हैं, सई औैर गोमती नदी के किनारे बसे गांवों का पानी भी नदियों में प्रदूषण की
वजह से प्रभावित हो गया है। स्थिति यह है कि जौनपुर में स्लाटर हाउस से निकलने वाले अपशिष्ट, सराफा मंडी से निकलने वाली खतरनाक तेजाब और शहर के गंदे नालों का पानी सीधे नदी में ही बहाए जा रहे हैं। इसकी वजह से
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जलीय जीव की प्रजातियां खत्म हो रहीं हैं। स्लाटर हाउस का खून भी देखा जा सकता है। इसका असर यह है कि नदी के पानी का टीडीएस 330 से ऊपर हो गया है। जबकि इसे 200 से कम होना चाहिए। नदी के पानी में आक्सीजन की
मात्रा भी घट रही है। इसी का नतीजा है कि आसपास के गांव वीरनपुर, जमैथा, धर्मापुर, पसेवा, मुफ्तीगंज, तूतीपुर, बलियावा, हकारीपुर, पानदरीबा, पचहटिया, देवचंदपुर, अलीखानपुर, उतरगंवा, सुल्तानपुर, कलंदरपुर, बाघमुर्तजा, जमालपुर,
चक हुसैनाबाद., विझवार सारंग, सहाबुद्दीनपुर, पठकौली, सिंहौली, केराकत कस्बा आदि गांवों में प्रदूषित पानी का असर दिखने लगा है। स्वच्छ गंगा रिसर्च सेंटर की जांच में एफसीसी ( फीकल कोलीफार्म काउंटिंग) अपशिष्ट पदार्थों की संख्या
2.40 लाख प्रति एमएल है जबकि 10 हजार से कम होना चाहिए। यहीं नहीं पानी में आक्सीजन की मात्रा 4.2 हो गई है। जबकि 10 से ऊपर होना चाहिए।
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इसका खुलासा पानी की जांच से हुआ है। यह जांच स्वच्छ गंगा रिसर्च लेबोरेट्री, वाराणसी में हुई है। वैसे तो जौनपुर में पांच नदियां हैं। जिसमें कुछ बरसाती हैं, सई औैर गोमती नदी के किनारे बसे गांवों का पानी भी नदियों में प्रदूषण की
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वजह से प्रभावित हो गया है। स्थिति यह है कि जौनपुर में स्लाटर हाउस से निकलने वाले अपशिष्ट, सराफा मंडी से निकलने वाली खतरनाक तेजाब और शहर के गंदे नालों का पानी सीधे नदी में ही बहाए जा रहे हैं। इसकी वजह से
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जलीय जीव की प्रजातियां खत्म हो रहीं हैं। स्लाटर हाउस का खून भी देखा जा सकता है। इसका असर यह है कि नदी के पानी का टीडीएस 330 से ऊपर हो गया है। जबकि इसे 200 से कम होना चाहिए। नदी के पानी में आक्सीजन की
मात्रा भी घट रही है। इसी का नतीजा है कि आसपास के गांव वीरनपुर, जमैथा, धर्मापुर, पसेवा, मुफ्तीगंज, तूतीपुर, बलियावा, हकारीपुर, पानदरीबा, पचहटिया, देवचंदपुर, अलीखानपुर, उतरगंवा, सुल्तानपुर, कलंदरपुर, बाघमुर्तजा, जमालपुर,
चक हुसैनाबाद., विझवार सारंग, सहाबुद्दीनपुर, पठकौली, सिंहौली, केराकत कस्बा आदि गांवों में प्रदूषित पानी का असर दिखने लगा है। स्वच्छ गंगा रिसर्च सेंटर की जांच में एफसीसी ( फीकल कोलीफार्म काउंटिंग) अपशिष्ट पदार्थों की संख्या
2.40 लाख प्रति एमएल है जबकि 10 हजार से कम होना चाहिए। यहीं नहीं पानी में आक्सीजन की मात्रा 4.2 हो गई है। जबकि 10 से ऊपर होना चाहिए।