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बारिश में फुंके 150 ट्रांसफार्मर
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Mon, 11 Jul 2016 01:31 AM IST
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अहियापुर स्थित कारखाने में मरम्मत के लिए रखे गए फुंके ट्रांसफार्मर।
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मानसून शुरू होते ही ट्रांसफार्मरों के जलने की संख्या बढ़ गई है। जहां पिछले महीने 60 जले थे वहीं 22 जून से अभी तक 150 ट्रांसफार्मर जल गए हैं। ट्रांसफार्मरों का रख रखाव भी ठीक ढंग से नहीं हो रहा है। तेल के स्तर की कभी जांच नहीं होती। मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति की जाती है।
उधर ट्रांसफार्मर जलने का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। मियांपुर सहित कई जगह मोबाइल ट्रांसफार्मर के भरोसे विद्युत की सप्लाई हो रही है। ट्रांसफार्मर जलने के बाद उसे बदलने का नियम तो 24 घंटे का है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में हफ्तों बीतने के बाद भी ट्रांसफार्मर नहीं बदले जाते।
बारिश शुरू होते ही अर्थिंग दुरुस्त नहीं होने से तो स्पार्किंग व तेल की कमी होने से ट्रांसफार्मर फुंकने का सिलसिला शुरु हो जाता है। जिससे अन्य मौसम की अपेक्षा बारिश के मौसम में ट्रासंफार्मर अधिक जलते हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 22 मई से 21 जून के बीच 60 ट्रासफार्मर फुंके थे।
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वहीं 22 जून से 10 जुलाई के बीच 150 ट्रासंफार्मर जल चुके हैं। बावजूद इसके विभाग ट्रांसफार्मरों के सुरक्षा केा लेकर गंभीर नहीं है। नगर क्षेत्र में रुहट्टा आदि स्थानों पर खुले में ट्रांसफार्मर रखे गए हैं, जो हर समय दुर्घटना को दावत दे रहे हैं। जिससे लोगों को शेड्यूल के मुताबिक बिजली नहीं मिल पा रही है।
हालत यह है कि ट्रांसफार्मर फुकने से जहां लोग अंधेरे में जीवन यापन करने को विवश हैं। वहीं किसान धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। सर्वाधिक ट्रांसफार्मर ग्रामीण अंचल के ही फुंके पड़े हैं।
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उधर ट्रांसफार्मर जलने का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। मियांपुर सहित कई जगह मोबाइल ट्रांसफार्मर के भरोसे विद्युत की सप्लाई हो रही है। ट्रांसफार्मर जलने के बाद उसे बदलने का नियम तो 24 घंटे का है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में हफ्तों बीतने के बाद भी ट्रांसफार्मर नहीं बदले जाते।
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बारिश शुरू होते ही अर्थिंग दुरुस्त नहीं होने से तो स्पार्किंग व तेल की कमी होने से ट्रांसफार्मर फुंकने का सिलसिला शुरु हो जाता है। जिससे अन्य मौसम की अपेक्षा बारिश के मौसम में ट्रासंफार्मर अधिक जलते हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 22 मई से 21 जून के बीच 60 ट्रासफार्मर फुंके थे।
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वहीं 22 जून से 10 जुलाई के बीच 150 ट्रासंफार्मर जल चुके हैं। बावजूद इसके विभाग ट्रांसफार्मरों के सुरक्षा केा लेकर गंभीर नहीं है। नगर क्षेत्र में रुहट्टा आदि स्थानों पर खुले में ट्रांसफार्मर रखे गए हैं, जो हर समय दुर्घटना को दावत दे रहे हैं। जिससे लोगों को शेड्यूल के मुताबिक बिजली नहीं मिल पा रही है।
हालत यह है कि ट्रांसफार्मर फुकने से जहां लोग अंधेरे में जीवन यापन करने को विवश हैं। वहीं किसान धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। सर्वाधिक ट्रांसफार्मर ग्रामीण अंचल के ही फुंके पड़े हैं।