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मासूम बच्चे के सिर से पिता का साया छीना, बूढ़े बाप की लाठी टूटी

Tue, 09 Feb 2021 11:53 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 09 Feb 2021 11:53 PM IST
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Father's shadow was taken away from innocent child's head, old father's stick broken
करंजाकला क्षेत्र के जलालपुर गांव में सड़क दुर्घटना में मृत समरबहादुर का बिलखता पुत्र यश। - फोटो : JAUNPUR
जौनपुर। वाराणसी-जौनपुर मार्ग पर लहंगपुर के पास हुए हादसे के बाद जलालपुर गांव में हर तरफ कोहराम मचा था। गांव में चारों तरफ बस महिलाओं के रोने-बिलखने की आवाज ही सुनाई दे रही थी। दर्दनाक हादसे ने किसी की मांग का सिंदूर मिटा दिया तो किसी के बुढ़ापे की लाठी छीन ली। मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। सुध-बुध खोकर घरवाले बार-बार अपने प्रियजनों का नाम पुकार रहे थे। हृदय विदारक मंजर से पूरा गांव गमगीन रहा।
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हादसे में जान गंवाने वाले अमर बहादुर (55) और समर बहादुर (45) सगे भाई थे। दोनों का परिवार अलग-अलग रहता है। समर बहादुर के परिवार में पत्नी शीतला देवी और पुत्र यश (6) हैं। शीतला देवी धाड़ें मारकर रो रही थी। पति को पुकारते हुए वह पूछ रही थीं कि किसके भरोसे उन्हें छोड़कर चले गए। अब आगे की जिंदगी कैसे कटेगी। मां के साथ बेटा यश भी बिलख रहा था। पास-पड़ोस के लोग उसे ढांढ़स बंधाने में जुटे थे, मगर इस मंजर के सामने वह खुद को भी बेबस पा रहे थे। वहीं अमर बहादुर की पत्नी इंद्रावती देवी का रो-रोकर बुरा हाल था। पांच बेटों में विजय, दिनेश, रमेश बाहर रहते हैं। घर पर मौजूद ललई और महेेश हादसे की खबर मिलते ही जिला अस्पताल चले गए थे। वहां पहुंचने पर उन्हें पिता के मौत की खबर मिली तो बदहवास हो गए। दलशृंगार के परिवार में भी पत्नी प्रमिला और तीन बेटे अमित, मनीष रमित हैं। हादसे में चौथे मृतक रामकुमार (65) की पत्नी कुटुरा की छह वर्ष पहले मौत हो गई थी। तीन बेटे रामजीत, लालजीत और अमरजीत बाहर रहकर रोजगार करते हैं। पिता के मौत की खबर पाकर वह घर के लिए रवाना हो गए थे। बेटी सुशीला पिता के गम में बेसुध थी। दोपहर तक गांव में सिर्फ महिलाएं और छोटे बच्चे ही थे। पुरुष सदस्य शव लाने पोस्टमार्टम हाउस गए थे या फिर घायलों के उपचार के लिए अस्पताल में थे।
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कइसे जियब ऐ लाल, अब के खयाल करी...
- छाती पीटते-पीटते विलाप कर रहे थे मुन्नीलाल के बुजुर्ग पिता
अमर उजाला ब्यूरो
जौनपुर। हमार बेटवा काहे हमके छोड़ गइला..., अब कइसे जियब ऐ लाल... के खयाल करी... यह कहते हुए बार-बार रामदुलार विलाप कर रहे थे। हादसे में मृत मुन्नीलाल (40) उनके पुत्र थे। बुजुर्ग पिता का पूरा ख्याल वही रखते थे। रिक्शा ठेला चलाकर और खेती कर परिवार का भरण पोषण करने वाले मुन्नीलाल से पिता का गहरा लगाव था। बेटे के मौत की खबर मिली तो जैसे उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। वह बिस्तर पर थे। सुनकर अचानक खड़े हुए और फिर निढ़ाल गिर पड़े। छाती पीटते हुए वह विलाप कर रहे थे। रामदुलार ने बताया कि बेटा बहुत सज्जन था। ठेला चलाने और खेती से जो भी पैसा मिलता था, लाकर चुपके से मुझे दे देता था। मैं मना करता था कि पैसे का क्या करुंगा, बस मेरा ख्याल रखो, मगर वह कहता कि सब कुछ तो आपका ही है। आप ही रखिए। अब मेरा ख्याल कौन रखेगा। काश भगवान बेटे की जगह मुझे उठा लेते। मुन्नीलाल के परिवार में पत्नी आरती और एक सात वर्षीय बेटा आदित्य है। रामदुलार अपने पोते को निहारते हुए कहते रहे कि मेरी तो फिर भी जिंदगी गुजर गई, मासूम बच्चे का सहारा कौन बनेगा।
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बेटी के विवाह का सपना रह गया अधूरा
करंजाकला। सड़क हादसे में मृत कमला यादव की आठ संतानों में चार पुत्र और चार पुत्रियां हैं। इनमें तीन पुत्र राकेश, अशोक और अखिलेश की शादी हो चुकी है। वहीं तीन बेटी सरोजा, सरिता, अनिता का भी वह विवाह कर चुके थे। सबसे छोटी बेटी सविता और पुत्र विकास की शादी शेष थी। बेटी की शादी के लिए वह प्रयासरत थे। लगातार वर ढूंढ रहे थे। उनकी कोशिश थी कि इस वर्ष हर हाल में बेटी का विवाह कर दें, मगर उनकी यह हसरत अधूरी रह गई। पत्नी प्रभुदेई बार-बार यह कहते हुए विलाप कर रही थीं। बेटा, बहू और बेटियों का रो-रोकर बुरा हाल था।
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बड़े भाई को घर रोककर खुद गया था इंद्रजीत
करंजाकला। हादसे में हरबसपुर निवासी इंद्रजीत यादव की भी जान गई है। धनदेई देवी उनकी मौसी लगती थी। घर से अर्थी लेकर परिवार के लोग जब वाराणसी जाने लगे तो वहां मौजूद इंद्रजीत के बड़े भाई हरिराम यादव भी साथ चलने के लिए पिकअप में सवार हुए। तभी इंद्रजीत वहां पहुंच गए। बड़े भाई को नीचे उतारकर कहा, भइया आप रहने दीजिए। ठंड ज्यादा है। आपकी तबीयत भी ठीक नहीं है। मैं चला जा रहा हूं। किसी को क्या पता था कि इंद्रजीत को काल अपने पास बुला रहा है। छोटे भाई की बातों को यादकर हरिराम सिसक रहे थे। इंद्रजीत की पत्नी ललिता अपनी दो बेटियों तनू और दीया के साथ लंबे समय से मायके बक्शा में ही रहती हैं।
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आंखों देखी...
समय से मदद मिलती तो कमला दादा को बचा लेते...
- दर्दनाक हादसे के प्रत्यक्षदर्शी मनोज ने सुनाई आपबीती, घटना के बाद फरार हो गया था चालक
- पुलिस और एंबुलेंस के पहुंचने तक अकेले ही घायलों को बचाने में लगा रहा मनोज
अमर उजाला ब्यूरो
जौनपुर। रात करीब डेढ़ बजे अंतिम संस्कार कर हम लोग घर के लिए निकले थे। रास्ते में एक होटल पर रुककर सभी ने चाय-पानी पीया। इसके बाद पिकअप से हमलोग घर की ओर बढ़े। चालक रमेश, पूर्व प्रधान उमाशंकर यादव और संतोष मास्टर (शिक्षक) आगे बैठे थे। बाकी अन्य लोग पीछे थे। घर पहुंचकर अंतिम संस्कार के बाद की औपचारिकताएं पूरी करने पर चर्चा चल रही थी। करीब 20 मिनट बाद अचानक तेज आवाज हुई। सामने से आ रही एक ट्रक ने साइड से जोरदार टक्कर मारी और फिर हमारा वाहन सड़क किनारे जाकर पलट गया। कुछ देर तक आंखों के सामने धूल का गुबार छाया रहा। इसके छंटते ही मैं खड़ा हुआ तो देखा सब लोग यहां-वहां बिखरे पड़े हैं। कुछ लोग कराह रहे थे तो किसी की आवाज भी नहीं निकल रही थी। वाहन में फंसे लोगों को बाहर निकालने में जुट गए। कमला दादा पिकअप के नीचे था। उनका सिर वाहन के नीचे दबा था। अकेले प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। कुछ देर में संतोष मास्टर भी होश में आकर मदद में जुट गए, मगर तब तक देर हो चुकी थी। लालू को भी होश आ गया था, मगर जब उसने शव देखा तो उसकी हिम्मत टूट गई। वह ऊपर ही नहीं आ रहा था। करीब बीस मिनट में ही पुलिस पहुंच गई और उसके तुरंत बाद एंबुलेंस भी आ गई। रामकुमार, कमला यादव, अमर बहादुर, मुन्नीलाल, दलश्रृंगार, इंद्रजीत यादव की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। अन्य सभी घायलों को अस्पताल भेजवाया गया। पिकअप चालक रमेश का कहीं पता नहीं था। वह मौके से भाग गया था। अगर वहां होता तो कम से कम कमला दादा सहित एक-दो अन्य लोगों की जान बचा लेते।
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वृद्धा की अंतिम इच्छा पूरी करने गए थे, खुद की जान गंवा बैठे
- वाराणसी में ही अपना अंतिम संस्कार चाहती थीं मृतका धनदेई देवी
- बेटी-दामाद को छोड़ सभी चाहते थे कि जौनपुर में ही किया जाए दाह संस्कार
अमर उजाला ब्यूरो
जौनपुर। जलालपुर गांव निवासी धनदेई देवी की उम्र करीब सौ वर्ष थी। उनका कोई पुत्र नहीं था। दो बेटियों में मंतोरा देवी अपने पति लक्ष्मीशंकर के साथ मायके में रहकर मां की देखभाल करती थीं। लंबी उम्र और बीमारी के कारण सोमवार को दोपहर बाद धनदेई देवी की मौत हो गई। मरने से पहले उन्होंने इच्छा जताई थी कि पति की तरह ही उनका भी अंतिम संस्कार वाराणसी के गंगा घाट पर ही हो। हालांकि मौत के बाद ग्रामीण व अन्य रिश्तेदारों ने जौनपुर में गोमती तट पर ही दाह संस्कार करने की बात कही, लेकिन बेटी और दामाद ने अंतिम इच्छा को पूरी करने का हवाला देते हुए शव वाराणसी ही ले जाने की बात कही। थक-हारकर सभी शाम करीब साढ़े छह बजे शव लेकर घर से वाराणसी के लिए रवाना हुए और वहां मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार हुआ। घटना के बाद हर किसी की जुबां पर यही चर्चा थी कि अगर अंतिम इच्छा पूरी करने की जिद में लोग वाराणसी नहीं जाते तो सात अन्य लोगों की जिंदगी खत्म नहीं होती। एक-दूसरे को यह ढांढ़स बंधाते रहे कि शायद नियति को यही मंजूर था।
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डीएम-एसपी ने अस्पताल पहुंच जाना घायलों का हाल
अमर उजाला ब्यूरो
जौनपुर। वाराणसी-जौनपुर हाईवे पर जलालपुर के लहंगपुर के पास भीषण हादसे की खबर के बाद एएसपी सिटी डॉ. संजय कुमार भोर में ही घटनास्थल पर पहुंच गए। सभी घायलों को अस्पताल पहुंचवाने के बाद वाहनों को सड़क सेे हटवाया। सुबह डीएम मनीष कुमार वर्मा और एसपी राजकरन नय्यर ने जिला अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना। उनसे घटना के बारे में जानकारी ली। सीएमएस डॉ. अनिल कुमार शर्मा को सभी घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के निर्देश दिए। सीएमओ डॉ. राकेश कुमार को बिना देर किए डॉक्टरों का पैनल बनाकर पोस्टमार्टम कराने को कहा। डीएम की पहल पर दोपहर में ही सभी छह मृतकों के शव का पोस्टमार्टम हुआ। समर बहादुर की मौत वाराणसी में हुई थी। लिहाजा उनका पोस्टमार्टम वाराणसी में कराया गया। जिला अस्पताल में पीड़ितों से मिलने और मृतक के परिजनों को ढांढ़स बंधाने के लिए शाहगंज विधायक व पूर्व मंत्री शैलेंद्र यादव ललई, मल्हनी विधायक लकी यादव, सपा जिलाध्यक्ष लालबहादुर यादव, वरिष्ठ नेता डॉ. केपी यादव, ऋषि यादव सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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हाईवे पर हादसों का जिम्मेदार कौन
- एक लेन से ही आ-जा रहे वाहन, मोड़ पर नहीं कोई सुरक्षा इंतजाम
संवाद न्यूज एजेंसी
जलालपुर। निर्माणाधीन वाराणसी-जौनपुर हाईवे पर आए दिन हादसे हो रहे हैं। तीन दिन पहले ही सवारियों से भरी बस एक पिकअप से टकरा गई थी। इसमें 12 से अधिक लोग घायल हुए थे। इसके पहले छह दिसंबर को इसी मार्ग पर बरातियों से भरी बोलेरो और बस में आमने-सामने की भिड़ंत में दूल्हे के मामा सहित चार लोगों की मौत हुई थी। बस और पिकअप की टक्कर शाम ढलने के बाद हुई तो बोलेरो और बस में भिड़ंत की घटना भोर की है। यह सभी घटनाएं निर्माणाधीन हाइवे पर महज पांच सौ मीटर के दायरे में हुई हैं। इसके अलावा भी इस मार्ग पर आए दिन हादसे हो रहे हैं। इनके पीछे निर्माण करा रही संस्था की लापरवाही को भी कारण बताया जा रहा है। जलालपुर के पास हाईवे के एक लेन को चालू कर दिया गया है, जबकि दूसरे लेन पर काम चल रहा है। त्रिलोचन, फूलपुर, पिंडरा बाजार की भीड़ से बचने के लिए जौनपुर से बनारस आने-जाने वाले नए बाईपास मार्ग का ही इस्तेमाल करते हैं। उनमें यह भ्रम होता है कि इस लेन में सिर्फ एक तरफ से ही वाहन आ रहे हैं। नतीजा अचानक दूसरी तरफ से वाहन के सामने आने पर चालक संतुलन खो दे रहे हैं। दिन में तो दूर से ही वाहन आते दिख जाते हैं, लेकिन अंधेरा होने पर इसका अनुमान नहीं लग पाता। इसके अलावा जगह-जगह मिट्टी का ढूहा खोदकर छोड़ देना भी एक वजह है।
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हाईवे पर हुए पिछले कुछ वर्षों में हुए बड़े हादसे::
* 6 फरवरी 2020: जलालपुर थाना क्षेत्र के राष्ट्रीय राजमार्ग पर रेहटी गांव के पास शाम करीब सात बजे पिकअप और रोडवेज बस की आमने-सामने टक्कर में 12 से अधिक यात्री घायल हो गए।
* 06 दिसंबर 2020: जलालपुर थाना क्षेत्र के लखनऊ-वाराणसी हाईवे पर बरातियों से भरी बोलेरो एक प्राइवेट बस से टकरा गई। हादसे में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 4 लोग बुरी तरह जख्मी हो गए। एक घायल ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था।
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* 21 अगस्त 2018: निर्माणाधीन हाईवे पर जलालपुर चौराहे के पास बेकाबू ट्रेलर ने सामने से आ रहे छह बाइक व सायकिल सवारों को रौंद दिया था। सभी की मौत हो गई थी। चार लोग गंभीर रुप से घायल हो गए थे।
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* एक मार्च 2013: जलालपुर के पास सई नदी पर पुल की रेलिंग तोड़ जीप नदी में गिरी। हादसे में जीप सवार 11 लोगों की मौत हो गई थीं। जीप सवार गांव के वृद्ध बेनीराम यादव का अंतिम संस्कार कर वाराणसी से लौट रहे थे।

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करंजाकला क्षेत्र के जलालपुर गांव में सड़क दुर्घटना में मृत मुन्नी लाल की बेसुध बैठी पत्नी।

करंजाकला क्षेत्र के जलालपुर गांव में सड़क दुर्घटना में मृत मुन्नी लाल की बेसुध बैठी पत्नी।- फोटो : JAUNPUR

करंजाकला क्षेत्र के जलालपुर गांव में सड़क दुर्घटना में मृत राम कुमार के रोते बिलखते परिजन।

करंजाकला क्षेत्र के जलालपुर गांव में सड़क दुर्घटना में मृत राम कुमार के रोते बिलखते परिजन।- फोटो : JAUNPUR

जौनपुर में करंजाकला क्षेत्र के जलालपुर गांव में सड़क दुर्घटना में मृत मुन्नी लाल के गम में चारपा?

जौनपुर में करंजाकला क्षेत्र के जलालपुर गांव में सड़क दुर्घटना में मृत मुन्नी लाल के गम में चारपा?- फोटो : JAUNPUR

जिला अस्पताल में सड़क दुर्घटना में मृत लोगों को एम्बुलेंस से बाहर निकलवाते पुलिसकर्मी।संवाद

जिला अस्पताल में सड़क दुर्घटना में मृत लोगों को एम्बुलेंस से बाहर निकलवाते पुलिसकर्मी।संवाद- फोटो : JAUNPUR

जिला अस्पताल मर्चरी के पास जुटी लोगों की भीड़।संवाद

जिला अस्पताल मर्चरी के पास जुटी लोगों की भीड़।संवाद- फोटो : JAUNPUR

जौनपुर के जलालपुर क्षेत्र के लहंगपुर गांव के पास हुई भीषण सड़क दुर्घटना में मृत लोगों के परिजनों

जौनपुर के जलालपुर क्षेत्र के लहंगपुर गांव के पास हुई भीषण सड़क दुर्घटना में मृत लोगों के परिजनों - फोटो : JAUNPUR

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