{"_id":"588ba88b4f1c1b165dcf4797","slug":"enhanced-with-rain-rot","type":"story","status":"publish","title_hn":"बारिश के साथ बढ़ी गलन ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बारिश के साथ बढ़ी गलन
jaunpur
Updated Sat, 28 Jan 2017 01:37 AM IST
विज्ञापन
शुक्रवार को दोपहर में हुई बारिश के बाद सड़क पर निकले लोग।
मौसम ने अचानक मिजाज बदला और जिले के कई हिस्सों में बारिश हुई। बारिश के साथ तापमान अचानक गिर गया और गलन बढ़ गई। बारिश से गेहूं, चना और अरहर को लाभ होगा जबकि मटर, आलू और गोभी की फसल में रोग लगने का खतरा बढ़ गया है।
बारिश और ठंड के मौसम के बीच पूरे दिन 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल रही थी। दोपहर में शहर समेत जिले के कई हिस्सों में हवा का तेज झोका भी चला जिससे लोगों को परेशानी बढ़ गई। गुरुवार की आधी रात के बाद से ही आसमान में बाद छाने लगे थे।
भोर में करीब पांच बजे बारिश की फुहारें पड़ने लगी। गुरुवार को जहां अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेस्लियस रिकार्ड किया गया था वहीं शुक्रवार को जिले में अधिकतम तापमान तीन डिग्री लुढ़क कर 22 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। हालांकि न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस ही रहा।
विज्ञापन
सुबह से ही मौसम खराब होने की वजह से किसानों के यहां गन्ना की पेराई का काम रोकना पड़ा। कृषि विज्ञान केंद्र के फसल सुरक्षा वैज्ञानिकडा. संदीप कुमार कहते हैं कि गेहूं, अरहर, चना के लिए इस बारिश से लाभ होगा। उन्होंने कहा कि वायुमंडल में फैली गैसों में 78 प्रतिशत नाइट्रोजन होती है जो बारिश के साथ घुलकर खेत
में पहुंच गई है। इससे फसलों में एक प्रकार से सिंचाई के साथ यूरिया का छिड़काव भी हो गया है। गेहूं का पीलापन अपने आप दूर हो जाएगा। इसके उलट आलू में झुलसा, मटर में गेरुई और गोभी में काला सड़न रोग लगने का खतरा बढ़ गया है।
विज्ञापन
बारिश और ठंड के मौसम के बीच पूरे दिन 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल रही थी। दोपहर में शहर समेत जिले के कई हिस्सों में हवा का तेज झोका भी चला जिससे लोगों को परेशानी बढ़ गई। गुरुवार की आधी रात के बाद से ही आसमान में बाद छाने लगे थे।
विज्ञापन
भोर में करीब पांच बजे बारिश की फुहारें पड़ने लगी। गुरुवार को जहां अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेस्लियस रिकार्ड किया गया था वहीं शुक्रवार को जिले में अधिकतम तापमान तीन डिग्री लुढ़क कर 22 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। हालांकि न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस ही रहा।
विज्ञापन
सुबह से ही मौसम खराब होने की वजह से किसानों के यहां गन्ना की पेराई का काम रोकना पड़ा। कृषि विज्ञान केंद्र के फसल सुरक्षा वैज्ञानिकडा. संदीप कुमार कहते हैं कि गेहूं, अरहर, चना के लिए इस बारिश से लाभ होगा। उन्होंने कहा कि वायुमंडल में फैली गैसों में 78 प्रतिशत नाइट्रोजन होती है जो बारिश के साथ घुलकर खेत
में पहुंच गई है। इससे फसलों में एक प्रकार से सिंचाई के साथ यूरिया का छिड़काव भी हो गया है। गेहूं का पीलापन अपने आप दूर हो जाएगा। इसके उलट आलू में झुलसा, मटर में गेरुई और गोभी में काला सड़न रोग लगने का खतरा बढ़ गया है।