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ब्राह्मणों को साधने की पुरजोर कोशिश, गिनाए एक-एक नाम

Tue, 17 Aug 2021 12:14 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 17 Aug 2021 12:14 AM IST
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Efforts are made to cultivate brahmins, name one by one
बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने बिना रुके एक घंटे तक सम्मेलन को संबोधित किया है। इस दौरान ब्राह्मणों को बसपा से जोड़ने की भरपूर कोशिश की। दावा किया कि साल 2022 के चुनाव में योगी सरकार को बाहर का रास्ता दिखाने में ब्राह्मण महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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शाम पांच बजे सभा स्थल पर पहुंचे सतीश चंद्र मिश्रा का स्वागत माल्यार्पण और वैदिक मंत्रोचार के साथ हुआ। इस दौरान पार्टी के नेताओं ने चांदी की गड़ासी, गणेश की प्रतिमा भी भेंट किया। माइक संभालते ही बसपा के राष्ट्रीय महासचिव ने भाजपा पर वार करना शुरू कर दिया। कहा, कि ब्राह्मण सच मायने में परशुराम के अनुयायी हैं तो एकजुट आकर आगे आए। वह अपने गोत्र पर न जाकर खुद को ब्राह्मण माने। यदि वह ऐसा करते हैं तो उनकी संख्या प्रदेश के 16 प्रतिशत हो जाएगी। इस तरह तीन करोड़ ब्राह्मण यूपी में रहते हैं। हालांकि सरकारी आंकड़े में इन्हें 13 प्रतिशत माना जा रहा है। ब्राह्मणों ने पांच जुलाई 2007 को लखनऊ में दिखा दिया था, जहां एक दो नहीं 11 हजार ब्राह्मणों ने शंख बजाया था। इसी का परिणाम रहा कि 85 ब्राह्मणों को बसपा से टिकट दिया गया और उसमें से 45 जीते। यही नहीं ब्राह्मणों ने बसपा को रिजर्व सीट की 16 सीटों पर विजयी बनाया। ब्राह्मणों के ही इस पहल को लोग सोशल इंजीनियरिंग कहने लगे और इसपर शोध शुरू हो गया। मायावती ने अपने कैबिनेट में 15 ब्राह्मणों को कैबिनेट मंत्री बनाया। जबकि भाजपा ने सिर्फ ब्राह्मणों से वोट लिया है। जबकि सबसे ज्यादा अत्याचार दलित और ब्राह्मणों के साथ हुआ। भाजपा की सरकार बनते ही 2017 में रायबरेली में पांच ब्राह्मणों का हाथ पैर कटवा दिए गए। सरकार की पोल खोलने में लगे लखनऊ में कमलेश तिवारी को घर से उठाकर मार दिया गया। एप्पल जैसी प्रतिष्ठित कंपनी में काम करने वाले विनय तिवारी को ठिकाने लगा दिया गया। राकेश पांडेय को शूट आउट कर दिया गया। बिकरू कांड की घटना तो सबके सामने है। महोबा में व्यापारी को गोली मारकर दिया गया। कानपुर, कन्नौज, इटावा आदि इलाके के 50 ब्राह्मणों का भी यही हर्ष हुआ। कानपुर बिकरू कांड में शादी के अगले दिन पति को खोने वाली खुशी दुबे पर भी सरकार को तरह नहीं आया और उसे फर्जी तरीके से फंसाकर अभी तक जेल में रखा गया है। गोरखपुर में सीनियर वकील और दो जर्नलिस्ट की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस तरह सैकड़ों ब्राम्हणों को मार दिया गया।
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