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ट्यूशन से कमा रहे और धरती को सजा रहे
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ट्यूशन से मिली फीस के पैसों से पौधरोपण
पांच वर्षों में लगाए हजारों पौधे, दूसरों को भी दे रहे प्रेरणा
संवाद न्यूज एजेंसी
जफराबाद। प्रकृति की सुंदरता को ही मानव स्वास्थ्य मानकर पर्यावरण संरक्षण में जुटे जफराबाद के अरविंद सिंह लोगों के लिए मिसाल हैं। पिछले पांच वर्षों में ट्यूशन से मिली फीस के पैसों से अब तक 10 हजार से अधिक पौधे लगा चुके हैं। यह उनका प्रकृति से लगाव ही बताता है कि उन्होंने पौधरोपण में अब तक कई लाख रुपए खर्च कर चुके हैं।
वर्ष 2014 में दो हजार पौधों से शुरुआत की। 2015 में तीन हजार और 2016 में पांच हजार पौधे लगाए। 2017-18 में एक हजार और 2019 में एक हजार। इस वर्ष अपने घर के छोटे से बगिया में बरगद, पीपल और पाकड़ की नर्सरी तैयार कर रहे हैं। लगभग एक हजार पौधे तैयार कर लिए हैं। इनसे प्रभावित होकर क्षेत्र के तमाम युवा पौधरोपण करने में रुचि लेने लगे हैं। जफराबाद के रसूलाबाद निवासी बजरंगबली प्रजापति ने इनसे प्रेरित होकर अपनी लगभग डेढ़ एकड़ भूमि में वर्ष 2018 में पौधरोपण किया। हौज गांव निवासी अध्यापक प्रद्युम्न सिंह, अहमदपुर गांव के अजीत कुमार सिंह, राघवेंद्र प्रताप सिंह, सौरभ सिंह भी इनसे प्रेरणा लेते हुए अपनी भूमि में सैकड़ों पौधे लगाए हैं। अरविंद सिंह ने तिलकधारी महाविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन और एलएलएम की डिग्री ली है। वक्ता के साथ-साथ अच्छे कवि और लेखक भी है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के सेमिनारों में पुरस्कृत किए गए हैं।
इंसेट:
अभियान से ऐसे जुड़े लोग
मेहनत व पैसा लगाकर नि:शुल्क पौधरोपण के पीछे का कारण रोचक है। अरविंद सिंह कहते हैं कि पेड़ों की कटाई के पीछे मनुष्य का उद्देश्य धनार्जन है। मैंने भी वही किया। नि: शुल्क शीशम और महंगे फलदार, छायादार पौधा लगाकर लोगों को लाभ का सपना दिखाया। बस यही योजना इन पौधों को सुरक्षित रखने में कारगर साबित हुई। एक-एक पौधा लोगों के लिए फिक्स डिपॉजिट के तौर पर दिखाई देने लगा। इससे दो लाभ हुए, पहला भूस्वामियों की देख-रेख में सभी पौधे लहलहा रहे हैं। दूसरा पर्यावरण के लिए ेप्रयास सफल हो रहा है।
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पांच वर्षों में लगाए हजारों पौधे, दूसरों को भी दे रहे प्रेरणा
संवाद न्यूज एजेंसी
जफराबाद। प्रकृति की सुंदरता को ही मानव स्वास्थ्य मानकर पर्यावरण संरक्षण में जुटे जफराबाद के अरविंद सिंह लोगों के लिए मिसाल हैं। पिछले पांच वर्षों में ट्यूशन से मिली फीस के पैसों से अब तक 10 हजार से अधिक पौधे लगा चुके हैं। यह उनका प्रकृति से लगाव ही बताता है कि उन्होंने पौधरोपण में अब तक कई लाख रुपए खर्च कर चुके हैं।
वर्ष 2014 में दो हजार पौधों से शुरुआत की। 2015 में तीन हजार और 2016 में पांच हजार पौधे लगाए। 2017-18 में एक हजार और 2019 में एक हजार। इस वर्ष अपने घर के छोटे से बगिया में बरगद, पीपल और पाकड़ की नर्सरी तैयार कर रहे हैं। लगभग एक हजार पौधे तैयार कर लिए हैं। इनसे प्रभावित होकर क्षेत्र के तमाम युवा पौधरोपण करने में रुचि लेने लगे हैं। जफराबाद के रसूलाबाद निवासी बजरंगबली प्रजापति ने इनसे प्रेरित होकर अपनी लगभग डेढ़ एकड़ भूमि में वर्ष 2018 में पौधरोपण किया। हौज गांव निवासी अध्यापक प्रद्युम्न सिंह, अहमदपुर गांव के अजीत कुमार सिंह, राघवेंद्र प्रताप सिंह, सौरभ सिंह भी इनसे प्रेरणा लेते हुए अपनी भूमि में सैकड़ों पौधे लगाए हैं। अरविंद सिंह ने तिलकधारी महाविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन और एलएलएम की डिग्री ली है। वक्ता के साथ-साथ अच्छे कवि और लेखक भी है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के सेमिनारों में पुरस्कृत किए गए हैं।
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अभियान से ऐसे जुड़े लोग
मेहनत व पैसा लगाकर नि:शुल्क पौधरोपण के पीछे का कारण रोचक है। अरविंद सिंह कहते हैं कि पेड़ों की कटाई के पीछे मनुष्य का उद्देश्य धनार्जन है। मैंने भी वही किया। नि: शुल्क शीशम और महंगे फलदार, छायादार पौधा लगाकर लोगों को लाभ का सपना दिखाया। बस यही योजना इन पौधों को सुरक्षित रखने में कारगर साबित हुई। एक-एक पौधा लोगों के लिए फिक्स डिपॉजिट के तौर पर दिखाई देने लगा। इससे दो लाभ हुए, पहला भूस्वामियों की देख-रेख में सभी पौधे लहलहा रहे हैं। दूसरा पर्यावरण के लिए ेप्रयास सफल हो रहा है।
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