{"_id":"d4dfddacfd3d7449a6af980db969ed7d","slug":"cut-on-the-birth-anniversary-of-hazrat-ali-cake-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हजरत अली की जयंती पर काटे गए केक ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हजरत अली की जयंती पर काटे गए केक
अमर उजाला ब्यूरो , जौनपुर
Updated Mon, 04 May 2015 12:45 AM IST
विज्ञापन
हजरत मोहम्मद साहब के दामाद हजरत अली (अ.स.) की जयंती रविवार को मनाई गई। जगह-जगह केक काटे गए और महफिलों का आयोजन हुआ।
शाही किला गेट के सामने मौलाना महफुजुल ने हजरत अली की नज्र की। यहां बच्चों में कापी किताब का वितरण किया गया और आसमान में गुब्बारे छोड़कर विश्व शांति के लिए दुआ की गई।
शाम छह बजे 20 किलोग्राम का केक काटा गया। यहां आयोजित महफिल में शोला जौनपुरी, इरफाना जौनपुरी, साबिर आदि ने मौलाए कायनात पर अकीदत पेश किया।
छतरीघाट स्थित इमामबाड़े में भी महफिल का हुआ। मछरहट्टा मानिक चौक में केक काटकर जयंती मनाई गई। जामा मस्जिद कसेरी बाजार में महफिल का आयोजन हुआ।
यहां रजमी जौनपुरी, इश्तियाक जौनपुरी, अलीमंजर डेजी, अफरोज, परवेज, गुलफाम आदि शायरों ने रचनाएं पढ़ी। मुफ्तीमोहल्ला स्थित शेख अब्दुल मजीद इमाम बाड़े में जश्न-ए-मौलूद-ए-काबा का आयोजन किया गया।
मौलाना सादिक अब्बास ने हजरत अली के जीवन पर प्रकाश डाला। इस मौके पर मिर्जा आफताब, वसी हसन, मो. अकरम, मसूदुल हसन, अंजार आबदी आदि शायरों ने कलाम पेश किए।
विज्ञापन
विज्ञापन
शाही किला गेट के सामने मौलाना महफुजुल ने हजरत अली की नज्र की। यहां बच्चों में कापी किताब का वितरण किया गया और आसमान में गुब्बारे छोड़कर विश्व शांति के लिए दुआ की गई।
शाम छह बजे 20 किलोग्राम का केक काटा गया। यहां आयोजित महफिल में शोला जौनपुरी, इरफाना जौनपुरी, साबिर आदि ने मौलाए कायनात पर अकीदत पेश किया।
छतरीघाट स्थित इमामबाड़े में भी महफिल का हुआ। मछरहट्टा मानिक चौक में केक काटकर जयंती मनाई गई। जामा मस्जिद कसेरी बाजार में महफिल का आयोजन हुआ।
यहां रजमी जौनपुरी, इश्तियाक जौनपुरी, अलीमंजर डेजी, अफरोज, परवेज, गुलफाम आदि शायरों ने रचनाएं पढ़ी। मुफ्तीमोहल्ला स्थित शेख अब्दुल मजीद इमाम बाड़े में जश्न-ए-मौलूद-ए-काबा का आयोजन किया गया।
विज्ञापन
मौलाना सादिक अब्बास ने हजरत अली के जीवन पर प्रकाश डाला। इस मौके पर मिर्जा आफताब, वसी हसन, मो. अकरम, मसूदुल हसन, अंजार आबदी आदि शायरों ने कलाम पेश किए।
विज्ञापन