... तो पुलिस हिरासत में हुआ था गैंगरेप!
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सीजेएम प्रथम ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश मीरगंज पुलिस को दिया है। लेकिन पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज नही किया है। मीरगंज थाना क्षेत्र में तीस अक्तूबर 2015 को एक अधिवक्ता की हत्या कर दी गई थी। मामले में मृतक की पुत्री ने सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
आरोप है कि तत्कालीन एसओ ने इस मामले में एक युवती उसकी बड़ी बहन और मां को हिरासत में लिया। इसके बाद हथियार बरामद करने के बहाने उसके घर ले गए। जहां छह लोगों ने युवती के साथ गैंगरेप किया। युवती के गर्भवती होने का मामला अमर उजाला ने 10 जुलाई के अंक में प्रकाशित किया तो हड़कंप मच गया।
कारागार मंत्री ने जांच डीआईजी जेल को सौंपी। उधर, डीएम ने भी मजिस्ट्रेटी जांच का आदेश दिया। लेकिन जांच में कुछ नही हुआ। 11 जुलाई को युवती का आपरेशन कराकर बच्चा पैदा करा दिया गया। उस वक्त युवती की मां और बहन भी जेल में थीं।
इस मामले में युवती के पिता ने न्यायालय में अधिवक्ता उपेंद्र विक्रम सिंह के माध्यम से 28 अक्तूबर को धारा 156 (3) के तहत प्रार्थना पत्र दिया। जिसमें आरोप लगाया कि उसकी पुत्री को पुलिस पूछताछ करने के नाम पर एक नवंबर की रात दस बजे घर ले गई जहां छह लोगों ने दुष्कर्म किया।
पुलिस ने पूरे परिवार को जेल भेज दिया। जहां उनकी पुत्री ने एक बच्चे को 11 जुलाई को जन्म दिया। इस मामले में सीजेएम अभिनय कुमार मिश्र ने 28 जनवरी को एसओ मीरगंज को केस दर्ज करने के लिए आदेश दिया। बावजूद पुलिस केस दर्ज नही कर रही है।