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छह लोगों को पांच वर्ष का सश्रम कारावास
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Sun, 24 Jul 2016 01:18 AM IST
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11 साल से न्याय के लिए भटक रही है पीड़िता
- फोटो : Demo
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बक्शा थाना क्षेत्र में भूमि विवाद को लेकर 14 वर्ष पूर्व हुई मारपीट और हत्या के प्रयास के मामले में छह आरोपियों को दोषी करार देते हुए शनिवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय के जज बलराज सिंह ने सजा सुनाई। कोर्ट ने आरोपियों को पांच-पांच वर्ष का सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
साथ ही सभी आरोपियों पर साढ़े तीन-तीन हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है। जबकि आरोपी चंद्रबहादुर उर्फ चंदू की दौरान विचारण मुकदमा मौत हो गई थी। इसलिए उसके खिलाफ मुकदमा अबेट कर दिया गया।
बक्शा थाना क्षेत्र के बाहरपुर निवासी लाल साहब यादव ने थाने में इस आशय की रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि आरोपी राजबहादुर वगैरह से जमीन की पुरानी रंजिश चली आ रही है। इसी रंजिश को लेकर नौ जून 2002 के दिन 11 बजे आरोपीगण डीहजहनियां निवासी राजबहादुर यादव, चंद्रबहादुर उर्फ चंदू, जंगबहादुर, शेषनाथ, हरिशंकर उर्फ हरिबंश, रामबक्श व नरेंद्र
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अपने हाथ में लाठी डंडा, राड व बंदुक से लैस होकर गांव की सड़क पर पुलिया के पास आरोपी रामबक्श के ललकारने पर जान से मारने की नियत से मुझे मारने पीटने लगे। जिससे मेरे सिर पर गंभीर चोटें आई। शोर पर बचाने मेरे बड़े भाई कबीर आए। उन्हें भी मारपीट कर घायल कर दिया।
इसी दौरान आरोपी हरिशंकर उर्फ हरिबंश ने अपने लाइसेंसी बंदुक से फायर कर दिया। पुलिस ने मामले की आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। अभियोजन पक्ष से सहायक शासकीय अधिवक्ता इंद्रसेन सिंह व राजनाथ चौहान ने कुल सात गवाह कोर्ट में परिक्षित कराया।
न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की बहस एवं तर्को को सुनने के पश्चात आरोपी राजबहादुर यादव, जंगबहादुर, शेषनाथ, हरिशंकर उर्फ हरिबंश, रामबक्श व नरेंद्र को दोषी करार देते हुए पांच-पांच वर्ष का सश्रम कारावास और साढ़े तीन-तीन हजार रुपया अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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साथ ही सभी आरोपियों पर साढ़े तीन-तीन हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है। जबकि आरोपी चंद्रबहादुर उर्फ चंदू की दौरान विचारण मुकदमा मौत हो गई थी। इसलिए उसके खिलाफ मुकदमा अबेट कर दिया गया।
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बक्शा थाना क्षेत्र के बाहरपुर निवासी लाल साहब यादव ने थाने में इस आशय की रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि आरोपी राजबहादुर वगैरह से जमीन की पुरानी रंजिश चली आ रही है। इसी रंजिश को लेकर नौ जून 2002 के दिन 11 बजे आरोपीगण डीहजहनियां निवासी राजबहादुर यादव, चंद्रबहादुर उर्फ चंदू, जंगबहादुर, शेषनाथ, हरिशंकर उर्फ हरिबंश, रामबक्श व नरेंद्र
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अपने हाथ में लाठी डंडा, राड व बंदुक से लैस होकर गांव की सड़क पर पुलिया के पास आरोपी रामबक्श के ललकारने पर जान से मारने की नियत से मुझे मारने पीटने लगे। जिससे मेरे सिर पर गंभीर चोटें आई। शोर पर बचाने मेरे बड़े भाई कबीर आए। उन्हें भी मारपीट कर घायल कर दिया।
इसी दौरान आरोपी हरिशंकर उर्फ हरिबंश ने अपने लाइसेंसी बंदुक से फायर कर दिया। पुलिस ने मामले की आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। अभियोजन पक्ष से सहायक शासकीय अधिवक्ता इंद्रसेन सिंह व राजनाथ चौहान ने कुल सात गवाह कोर्ट में परिक्षित कराया।
न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की बहस एवं तर्को को सुनने के पश्चात आरोपी राजबहादुर यादव, जंगबहादुर, शेषनाथ, हरिशंकर उर्फ हरिबंश, रामबक्श व नरेंद्र को दोषी करार देते हुए पांच-पांच वर्ष का सश्रम कारावास और साढ़े तीन-तीन हजार रुपया अर्थदंड की सजा सुनाई है।