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हत्यारोपी तीन सगे भाइयों को उम्रकैद
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Fri, 07 Oct 2016 01:10 AM IST
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खुटहन थाना क्षेत्र में 15 वर्ष पहले मंदिर के सामने मिट्टी समतल करने एवं रंजिश को लेकर गोली मारकर की गई हत्या के मामले में गुरुवार को कोर्ट ने सजा सुनाई। स्पेशल जज (ईसी एक्ट) बंश बहादुर यादव ने हत्यारोपी तीन सगे भाईयों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
साथ ही तीनों आरोपियों पर साढ़े पच्चीस-पच्चीस हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। जबकि एक आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अभियोजन कथानक के अनुसार खुटहन थाना क्षेत्र के गभीरन (भैरवा) निवासी ओम प्रकाश यादव पुत्र रामनाथ ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि छह जून 2001 को मेरे घर के पास बने मंदिर के सामने गांव के सुरेेंद्र
यादव मनौती का मिट्टी ट्रैक्टर से लाकर गिराया। जिसे मेरे पिता रामनाथ यादव समतल कर रहे थे। इसी पर गांव के देवदत्त, उदयराज अपने हाथ में लाइसेंसी बंदूक लिए पुरानी रंजिश को लेकर 11 बजे दिन में मेरे पिता के पास आकर गाली गलौज करते हुए मिट्टी समतल करने से मना करने लगे। इसका विरोध करने पर गांव के कंशराज यादव और हरिलाल यादव ने
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ललकारा तो उदयराज और देवदत्त ने लाइसेंसी बंदूक से मेरे पिता के ऊपर फायर कर दिया। जिससे वह जमीन पर गिर गए। मेरी मां गंभीर रूप से घायल हो गई। बचाने मेरी पत्नी शीला आई तो कंशराज ने उसे लाठी से मारा। शोर सुनकर गांव के राम अवध, राम मिलन आदि आए और बीच बचाव किया। आरोपी गाली देते हुए फरार हो गए। अस्पताल ले जाते हुए पिता
रामनाथ यादव की मौत हो गई। पुलिस ने मामले की विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। अभियोजन पक्ष से सहायक शासकीय अधिवक्ता संजय श्रीवास्तव और पंकज श्रीवास्तव ने कुल 6 गवाह पेश किया। न्यायाधीश ने दोनेां पक्षों की बहस एवं तर्कों को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार गभीरन भैरवा निवासी आरोपी उदयराज, कंशराज और हीरालाल को दोषी करार देते हुए उम्रकैद एवं 25500-25500 रुपये का अर्थदंड की सजा सुनाई। जबकि आरोपी देवदत्त को बरी कर दिया।
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साथ ही तीनों आरोपियों पर साढ़े पच्चीस-पच्चीस हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। जबकि एक आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अभियोजन कथानक के अनुसार खुटहन थाना क्षेत्र के गभीरन (भैरवा) निवासी ओम प्रकाश यादव पुत्र रामनाथ ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि छह जून 2001 को मेरे घर के पास बने मंदिर के सामने गांव के सुरेेंद्र
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यादव मनौती का मिट्टी ट्रैक्टर से लाकर गिराया। जिसे मेरे पिता रामनाथ यादव समतल कर रहे थे। इसी पर गांव के देवदत्त, उदयराज अपने हाथ में लाइसेंसी बंदूक लिए पुरानी रंजिश को लेकर 11 बजे दिन में मेरे पिता के पास आकर गाली गलौज करते हुए मिट्टी समतल करने से मना करने लगे। इसका विरोध करने पर गांव के कंशराज यादव और हरिलाल यादव ने
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ललकारा तो उदयराज और देवदत्त ने लाइसेंसी बंदूक से मेरे पिता के ऊपर फायर कर दिया। जिससे वह जमीन पर गिर गए। मेरी मां गंभीर रूप से घायल हो गई। बचाने मेरी पत्नी शीला आई तो कंशराज ने उसे लाठी से मारा। शोर सुनकर गांव के राम अवध, राम मिलन आदि आए और बीच बचाव किया। आरोपी गाली देते हुए फरार हो गए। अस्पताल ले जाते हुए पिता
रामनाथ यादव की मौत हो गई। पुलिस ने मामले की विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। अभियोजन पक्ष से सहायक शासकीय अधिवक्ता संजय श्रीवास्तव और पंकज श्रीवास्तव ने कुल 6 गवाह पेश किया। न्यायाधीश ने दोनेां पक्षों की बहस एवं तर्कों को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार गभीरन भैरवा निवासी आरोपी उदयराज, कंशराज और हीरालाल को दोषी करार देते हुए उम्रकैद एवं 25500-25500 रुपये का अर्थदंड की सजा सुनाई। जबकि आरोपी देवदत्त को बरी कर दिया।