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देर रात तक चला हाईप्रोफाइल ड्रामा
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Mon, 07 Nov 2016 01:13 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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केंद्रीय लाइसेंस प्राधिकारी उत्तरी क्षेत्र द्वारा लाइसेंस निलंबन के उल्लंघन के मामले में झूला वनस्पति फैक्ट्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने को लेकर रविवार को हाईप्रोफाइल ड्रामा देखने को मिला। तीन घंटे की जद्दोजेहद के बाद मंडलीय अधिकारी भारी पड़े और एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी।
केराकत तहसील के नाऊपुर में स्थित झूला वनस्पति लि. फैक्ट्री का लाइसेंस केंद्रीय लाइसेंस प्राधिकारी ने तीन अक्तूबर 2016 को निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद भी फैक्ट्री में उत्पादन कार्य धड़ल्ले से चल रहा था। इसकी शिकायत पर जिले के अफसरों ने छापा मारा तो शिकायत सही पाई गई।
तीन नवंबर को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सत्येंद्र कुमार की अगुवाई में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने छापा मारकर भारी मात्रा में माल सील कर दिया था। इसके बाद जनपद स्तरीय आला अधिकारियों के निर्देश पर फैक्ट्री के कुछ अधिकारियों को पूछ ताछ के लिए पुलिस ने थाने बुला लिया।
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इसी के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव पड़ने लगे। मंत्री के अलावा मंडल के अधिकारी भी दबाव बनाने लगे । दबाव का जिले के अधिकारियों पर तो कोई असर नहीं पड़ा पर मंडलीय अधिकारी फैक्ट्री के अधिकारियों के पक्ष खड़े हो गए। स्थानीय पुलिस अधिकारियों के समझ में नहीं आ रहा था कि वह किसकी बात मानें।
तीन घंटे तक चले इस ड्रामे में मंडलीय अधिकारी भारी पड़े और अंतत: प्राथमिकी दर्ज नहीं हो सकी। इस दौरान थाने में काफी लोग मौजूद रहे। उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी जेवीएल कंपनी का लाइसेंस केंद्रीय लाइसेंस प्राधिकारी लखनऊ डा. मनीषा नारायण द्वारा दो जुलाई 2015 को निलंबित किया गया था। फैक्ट्री का उत्पाद जांच में अनसेफ पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई थी। फैक्ट्री का खाद्य उत्पाद जांच में अनसेफ पाए जाने पर एफएसएस एक्ट की धारा 32(2), (3) के तहत दंडनीय है।
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केराकत तहसील के नाऊपुर में स्थित झूला वनस्पति लि. फैक्ट्री का लाइसेंस केंद्रीय लाइसेंस प्राधिकारी ने तीन अक्तूबर 2016 को निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद भी फैक्ट्री में उत्पादन कार्य धड़ल्ले से चल रहा था। इसकी शिकायत पर जिले के अफसरों ने छापा मारा तो शिकायत सही पाई गई।
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तीन नवंबर को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सत्येंद्र कुमार की अगुवाई में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने छापा मारकर भारी मात्रा में माल सील कर दिया था। इसके बाद जनपद स्तरीय आला अधिकारियों के निर्देश पर फैक्ट्री के कुछ अधिकारियों को पूछ ताछ के लिए पुलिस ने थाने बुला लिया।
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इसी के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव पड़ने लगे। मंत्री के अलावा मंडल के अधिकारी भी दबाव बनाने लगे । दबाव का जिले के अधिकारियों पर तो कोई असर नहीं पड़ा पर मंडलीय अधिकारी फैक्ट्री के अधिकारियों के पक्ष खड़े हो गए। स्थानीय पुलिस अधिकारियों के समझ में नहीं आ रहा था कि वह किसकी बात मानें।
तीन घंटे तक चले इस ड्रामे में मंडलीय अधिकारी भारी पड़े और अंतत: प्राथमिकी दर्ज नहीं हो सकी। इस दौरान थाने में काफी लोग मौजूद रहे। उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी जेवीएल कंपनी का लाइसेंस केंद्रीय लाइसेंस प्राधिकारी लखनऊ डा. मनीषा नारायण द्वारा दो जुलाई 2015 को निलंबित किया गया था। फैक्ट्री का उत्पाद जांच में अनसेफ पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई थी। फैक्ट्री का खाद्य उत्पाद जांच में अनसेफ पाए जाने पर एफएसएस एक्ट की धारा 32(2), (3) के तहत दंडनीय है।