{"_id":"5b2aa0054f1c1bc5628b62fa","slug":"152952013511-jaunpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जायदाद के लिए रिश्तों की बलि, कोर्ट पहुंची पीड़िता","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
जायदाद के लिए रिश्तों की बलि, कोर्ट पहुंची पीड़िता
Updated Thu, 21 Jun 2018 12:12 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शाहगंज। जायदाद के लिए पट्टीदार ने एक महिला का सौदा कर लिया। इसकी जानकारी होने पर वह किसी तरह वहां से भाग निकली। न्याय के लिए वह दर-दर की ठोकरें खा रही है। मामला खुटहन थाना क्षेत्र के सौरैयां गांव का है। महीनों भटकने के बाद पीड़िता न्यायालय की शरण में पहुंची।
ताखा पश्चिम गांव निवासी ऊषा का विवाह खुटहन क्षेत्र के सौरैयां निवासी लालमन के साथ हुआ। दस वर्षों तक दोनों का जीवन हंसी-खुशी बीता। इस बीच इनके चार बच्चे भी हुए। तीन वर्ष पूर्व ऊषा के पति लालमन का निधन हो गया। पट्टीदार मिठाईलाल की निगाह में उसकी जायदाद पर थी। पट्टीदारों ने पहले ऊषा के साथ हमदर्दी का नाटक किया। विश्वास जीतने के बाद महीने भर मिठाईलाल की नातिन उसे अपने घर कैथर थाना चंदौसी जनपद संभल घुमाने ले गई। एक पखवाड़े बाद जब वह घर लौटने के लिए कहने लगी तो उसे प्रताड़ित किया जाना लगा। ऊषा का कहना है कि उसका वहां एक व्यक्ति के हाथ पचास हजार रुपये में सौदा तय कर दिया गया था। इसकी जानकारी मिलने पर वह चंगुल से छूट कर किसी तरह शाहगंज पहुंची। मायके जाकर उसने परिजनों को आपबीती सुनाई। इस दौरान पीड़िता के ससुर पर दबाव बनाकर पट्टीदारों ने जायदाद की वसीयत करा ली। वह अपने भाई विकास के साथ जब ससुराल पहुंची तो उसे धमकी देकर भगा दिया गया। पट्टीदारों ने उसे अपने ससुर से भी मिलने तक नहीं दिया। महिला ने थाने में शिकायत की लेकिन पुलिस ने उसकी बात ही नहीं सुनी। न्याय के लिए तहसील व अधिकारियों का चक्कर काटती रही। कहीं से न्याय नहीं मिला तो हारकर न्यायालय की शरण लेने पर मजबूर होना पड़ा। अधिवक्ता धीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि महिला को बेचना आपराधिक कृत्य है। इसमें कार्रवाई नहीं करने वाले अधिकारियों पर मुकदमा करने की अपील न्यायालय से की जाएगी।
विज्ञापन
ताखा पश्चिम गांव निवासी ऊषा का विवाह खुटहन क्षेत्र के सौरैयां निवासी लालमन के साथ हुआ। दस वर्षों तक दोनों का जीवन हंसी-खुशी बीता। इस बीच इनके चार बच्चे भी हुए। तीन वर्ष पूर्व ऊषा के पति लालमन का निधन हो गया। पट्टीदार मिठाईलाल की निगाह में उसकी जायदाद पर थी। पट्टीदारों ने पहले ऊषा के साथ हमदर्दी का नाटक किया। विश्वास जीतने के बाद महीने भर मिठाईलाल की नातिन उसे अपने घर कैथर थाना चंदौसी जनपद संभल घुमाने ले गई। एक पखवाड़े बाद जब वह घर लौटने के लिए कहने लगी तो उसे प्रताड़ित किया जाना लगा। ऊषा का कहना है कि उसका वहां एक व्यक्ति के हाथ पचास हजार रुपये में सौदा तय कर दिया गया था। इसकी जानकारी मिलने पर वह चंगुल से छूट कर किसी तरह शाहगंज पहुंची। मायके जाकर उसने परिजनों को आपबीती सुनाई। इस दौरान पीड़िता के ससुर पर दबाव बनाकर पट्टीदारों ने जायदाद की वसीयत करा ली। वह अपने भाई विकास के साथ जब ससुराल पहुंची तो उसे धमकी देकर भगा दिया गया। पट्टीदारों ने उसे अपने ससुर से भी मिलने तक नहीं दिया। महिला ने थाने में शिकायत की लेकिन पुलिस ने उसकी बात ही नहीं सुनी। न्याय के लिए तहसील व अधिकारियों का चक्कर काटती रही। कहीं से न्याय नहीं मिला तो हारकर न्यायालय की शरण लेने पर मजबूर होना पड़ा। अधिवक्ता धीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि महिला को बेचना आपराधिक कृत्य है। इसमें कार्रवाई नहीं करने वाले अधिकारियों पर मुकदमा करने की अपील न्यायालय से की जाएगी।
विज्ञापन