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झुलसी दुष्कर्म पीड़िता की उपचार के दौरान मौत
Updated Tue, 12 Jun 2018 12:28 AM IST
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बदलापुर/घनश्यामपुर। बदलापुर पुलिस की लापरवाही ने सामूहिक बलात्कार पीड़ित किशोरी की जान ले ली। केस दर्ज कराने के दस महीने तक गिरफ्तार नहीं होनेे पर हौसला बुलंद आरोपियों ने सबूत मिटाने के लिए युवती को जलाकर मारने की कोशिश की। झुलसने के डेढ़ महीने बाद रविवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सर सुंदरलाल चिकित्सालय में किशोरी की मौत हो गई। मौत के बाद भी पुलिस लीपापोती करने में लगी है।
बदलापुर थाने में किशोरी की मां ने एक जून 2017 को तहरीर दी थी कि योगेंद्र निगम उर्फ सुद्धू, मनोज निगम व आशीष ऊर्फ पंडित पर अपनी पुत्री के साथ कई बार सामूहिक बलात्कार किया। इससे वह गर्भवती हो गई। विवेचना के दौरान ही तीन माह बाद किशोरी का गर्भपात भी हो गया। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया लेकिन किसी को आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया। किशोरी की मां ने एसपी तक से गुहार लगाई लेकिन आरोपी गिरफ्तार नहीं किए गए। खुलेआम घूम रहे आरोपी महिला को लगातार धमकाते रहे और मुकदमा वापसी के लिए दबाव बनाते रहे। इस मामले में थाने के एक दरोगा पर आरोपियों की मदद का आरोप लगा था। 26 अप्रैल को किसी संदिग्ध हाल में झुलस गई। वह 80 फीसदी जल गई थी। उसे बीएचयू में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान रविवार को उसकी मौत हो गई। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम कराकर परिवार वालों को सौंप दिया।
पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
बदलापुर। पुलिस ने दस माह तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया। किशोरी के झुलसने के बाद पुलिस की नींद खुली और तीनों आरोपियों को दस माह बाद गिरप्तार कर जेल भेज दिया। पीड़ित किशोरी की मां ने पुलिस अधीक्षक , आईजी जोन सहित तमाम आला अधिकारियों से से शिकायत की कि ए आरोपियों ने ही जलाया है। मगर न तो आरोपियों पर हत्या के प्रयास की धारा लगाई गई और न ही आरोपियों को छु्ट्टा घूमने देने वाले पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई। झुलसी किशोरी के उपचार में भी प्रशासन ने मदद नहीं की। स्वयं सेवी संस्था की रेनू सिंह भीख मांग कर इलाज के लिए पैसे जुटाए और अंतिम संस्कार में भी मदद की। अब पुलिस लीपापोती करने में लगी है। एसपीआरए संजय राय का कहना है कि किशोरी की मां की वीडियो रिकार्डिंग है, जिसमें उसने कहा है कि उसकी बेटी खाना बनाते समय झुलसी है। अब वह आरोपियों पर जलाने का आरोप लगा रही है।
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बदलापुर थाने में किशोरी की मां ने एक जून 2017 को तहरीर दी थी कि योगेंद्र निगम उर्फ सुद्धू, मनोज निगम व आशीष ऊर्फ पंडित पर अपनी पुत्री के साथ कई बार सामूहिक बलात्कार किया। इससे वह गर्भवती हो गई। विवेचना के दौरान ही तीन माह बाद किशोरी का गर्भपात भी हो गया। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया लेकिन किसी को आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया। किशोरी की मां ने एसपी तक से गुहार लगाई लेकिन आरोपी गिरफ्तार नहीं किए गए। खुलेआम घूम रहे आरोपी महिला को लगातार धमकाते रहे और मुकदमा वापसी के लिए दबाव बनाते रहे। इस मामले में थाने के एक दरोगा पर आरोपियों की मदद का आरोप लगा था। 26 अप्रैल को किसी संदिग्ध हाल में झुलस गई। वह 80 फीसदी जल गई थी। उसे बीएचयू में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान रविवार को उसकी मौत हो गई। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम कराकर परिवार वालों को सौंप दिया।
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पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
बदलापुर। पुलिस ने दस माह तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया। किशोरी के झुलसने के बाद पुलिस की नींद खुली और तीनों आरोपियों को दस माह बाद गिरप्तार कर जेल भेज दिया। पीड़ित किशोरी की मां ने पुलिस अधीक्षक , आईजी जोन सहित तमाम आला अधिकारियों से से शिकायत की कि ए आरोपियों ने ही जलाया है। मगर न तो आरोपियों पर हत्या के प्रयास की धारा लगाई गई और न ही आरोपियों को छु्ट्टा घूमने देने वाले पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई। झुलसी किशोरी के उपचार में भी प्रशासन ने मदद नहीं की। स्वयं सेवी संस्था की रेनू सिंह भीख मांग कर इलाज के लिए पैसे जुटाए और अंतिम संस्कार में भी मदद की। अब पुलिस लीपापोती करने में लगी है। एसपीआरए संजय राय का कहना है कि किशोरी की मां की वीडियो रिकार्डिंग है, जिसमें उसने कहा है कि उसकी बेटी खाना बनाते समय झुलसी है। अब वह आरोपियों पर जलाने का आरोप लगा रही है।
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