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विधान परिषद में गूंजा एसटीपी और सीवर लाइन में अनियमितता का मामला

Sun, 21 Nov 2021 11:42 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 21 Nov 2021 11:42 PM IST
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Case of irregularity in STP and sewer line echoed in Legislative Council
नमामि गंगे परियोजना के तहत शहर में बन रहे एसटीपी और सीवर लाइन के कार्य में खुलकर मनमानी की जा रही है। इस मामले में बड़े पैमाने पर अनियमितता की बात सामने आ रही है। जिसे विधान परिषद ने गंभीरता से लिया है। 18 नवंबर को इस मामले में विधान समिति की बैठक हुई थी । मामले की गंभीरता को देखते हुए समिति ने आख्या मांगी। अधिकारियों ने इसे तैयार करने में दो माह का समय मांगा था। लेकिन, समिति ने पूरी आख्या एक दिसंबर तक उपलब्ध कराने को कहा है।
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नमामि गंगे के तहत 234 करोड़ की लागत का 30 एमएलडी एसटीपी व अमृत योजना के तहत 264 करोड़ की लगभग 400 किमी की सीवर पड़नी है। दोनों कार्यों का टेंडर जून 2019 में हुआ, जबकि इस प्रोजेक्ट पर कार्य नवंबर 2019 में शुरू हुआ, जिसे तत्कालीन अनुबंध के अनुसार 2020 दिसंबर में समाप्त करना था। लेकिन, अपरिहार्य कारणों से फर्म व विभाग ने विलंब किया, जिसके कारण मुख्य अभियंता (गंगा) लखनऊ द्वारा कार्यदायी फर्म पर कार्य में विलंब करने के फलस्वरूप 65 हजार 840 प्रतिदिन का अर्थदंड 30 दिसंबर 2020 से लगाया गया। जो अब तक बढ़कर लगभग 2 करोड़ हो गया। इधर अब तक नमामि गंगे द्वारा न तो एसटीपी कार्य पूर्ण किया गया, और न ही अमृत योजना द्वारा सीवर कार्य पूरा किया गया। देखा जाए तो दो सालों में अमृत योजना में कुल प्रस्तावित कार्य का सिर्फ 20 प्रतिशत कार्य ही पूरा किया गया है। इन दोनों योजनाओं में विलंब के कारण आमजनमानस को गम्भीर समस्याओं का सामना करना पड़ा है।
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इधर स्वच्छ गोमती अभियान के अध्यक्ष गौतम गुप्ता ने 9 बिंदुओं पर इसे लेकर शिकायत विधान परिषद में की थी। जिसमें नमामि गंगे तहत हो रहे एसटीपी व अमृत योजना के तहत हो रहे सीवर कार्य में व्याप्त घोटाले का आरोप लगाया है। इसे गंभीरता से लेते हुए विधान परिषद ने 18 नवंबर को बुलाई गई थी। इस बैठक में शिकायतकर्ता के अलावा अपना पक्ष रखने के लिए अपर मुख्य सचिव नगर विकास रजनीश दुबे, प्रबंध निदेशक जलनिगम आलोक कुमार तृतीय समेत जलनिगम के सभी आला अधिकारी बुलाए गए थे। जबकि जनपद से प्रशासनिक प्रतिनिधि के रूप में सीआरओ रजनीश राय मौजूद थे। समिति के सभापति विद्यासागर सोनकर द्वारा मामले पर सवाल पूछे जाने पर संबंधित अधिकारियों द्वारा साक्ष्य इकट्ठा करने के लिए दो माह का समय मांगा गया था। जिसपर सभापति विद्यासागर सोनकर व समिति के सदस्य बृजेश सिंह प्रिंसू ने कड़ी आपत्ति जताई थी। सभी साक्ष्यों को 14 दिन के भीतर इकट्ठा कर, एक दिसंबर को होने वाली समिति की अगली नियत बैठक में उपस्थित होने के लिए निर्देशित किया।
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स्वच्छ गोमती अभियान द्वारा शुरू से ही जौनपुर में एसटीपी व सीवर कार्य में वित्तीय व तकनीकी भ्रष्टाचार की बात उठाई जा रही है, सभी संबंधित साक्ष्य हमारी ओर से विधान परिषद समिति को सौंप दिए गए हैं। करोड़ों का खेल किया है, अधिकारियों ने सरकार की छवि को धूमिल करने का काम किया है सभी दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।- गौतम गुप्ता, अध्यक्ष, स्वच्छ गोमती अभियान
14 नवंबर को बैठक बुलाई गई थी। अधिकारी दो माह का समय मांग रहे थे, जिससे स्पष्ट हो रहा था कि वे मामले को टालना चाह रहे है। लेकिन, समिति ने 14 दिन का समय दिया है। एक दिसंबर को इसे लेकर पुन: बैठक बुलाई गई है। ब्रृजेश सिंह प्रिंसू, सदस्य, विधान परिषद समिति
विधान परिषद की समिति ने एक दिसंबर को पुन: इस मामले को लेकर बैठक बुलाई है। सक्षम अधिकारी को संपूर्ण आख्या के साथ आने को कहा गया है, जिसके लिए उन्हें किन-किन बिंदुओं पर जानकारी देनी है के भी बारे में बताया गया है। -विद्यासागर सोनकर, सभापति, विधान परिषद
प्रमुख रूप से लगे हैं ये आरोप------
-नमामि गंगे व अमृत योजना के टेंडर में स्पष्ट उल्लिखित था कि दोनों कार्य प्रारम्भ कराए जाने के पूर्व एक सीएमसी (सिटीजनशिप मॉनिटरिंग कमेटी) का गठन कर लिया जाएगा, जिसमे शहर के वो लोग होंगे, जो प्रत्यक्ष रूप से जल/पर्यावरण व नदियों के संरक्षण कार्य मे लगे हों, एवम पूरा प्रोजेक्ट इसी कमेटी के देख रेख में आगे बढ़ेगा, जबकि आज की तिथि तक ऐसी कोई कमेटी नहीं गठित की गई।
-एसटीपी की साइट पर लगभग 10 करोड़ की लागत से बने एरेशन टैंक की ड्राइंग व डिजाइन सभी मानकों को ताक पर रख कर बनाई गई है और यह बात तत्कालीन अधिशासी अभियंता जल निगम सुनील यादव ने अपने पत्र में स्वीकार किया था, इस मामले में आरोप है कि इस काम में करीब 2 करोड़ का खेल हुआ है।
-बिना मैटेरियल टेस्टिंग के एसटीपी की कार्यदायी फर्म को किस आधार पर लगभग 15 करोड़ का भुगतान कर दिया। आरोप है कि 3 करोड़ खेल किया गया।
- जलनिगम जौनपुर द्वारा सांठ गांठ करके डीपीआर के विपरीत जाकर अमृत योजना की फर्म टेक्नोक्राफ्ट को पहले रनिंग बिल 4 करोड़ 10 लाख के भुगतान में डीपीआर में ट्रांस गोमती क्षेत्र में 450 मीटर अनुमन्य बैरिकेटिंग की जगह मनमाने तरीके से 10 हजार मीटर (10किमी) का भुगतान कर दिया गया।
-जौनपुर में बन रहे बेहद कम क्षमता 30 एमएलडी के एसटीपी की जगह अग्रिम 30 वर्षीय योजना के लिए कम से कम 90 एमएलडी के एसटीपी की जरूरत है। पूरा डीपीआर कपोलकल्पित है, बिना तथ्य के बना है।
- नमामि गंगे के तहत बन रहे आईपीएस (इंटरमीडिएट पम्पिंग स्टेशन) कार्य में अनुबंध में उल्लिखित टाटा अथवा एसएआईएल की सरिया की जगह बेहद निम्न गुणवत्ता की फर्जी कम्पनी एईएल की सरिया प्रयोग की गई, जिसके लिए अवर अभियंता जलनिगम अरविंद यादव ने अधिशासी अभ्यन्ता को पत्र भी लिखा पर कोई कार्यवाही नहीं हुई, मामले में लगभग 95 लाख रुपये के खेल का आरोप है।

- नमामि गंगे की कार्यदायी फर्म द्वारा बिना किसी अनुमति के मनमाने तरीके से अनुबंध में उल्लिखित बेहद विशिष्ट एसआरसी पाइप (सल्फर रेसिस्टेन्स सीमेंट) की जगह सामान्य आरसीसी पाइप का प्रयोग किया गया, जबकि भुगतान 60 प्रतिशत किया गया।
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