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Jaunpur News: दो साल से ज्यादा समय बीतने पर तहसील से नहीं जारी होगा जन्म-मृत्यु का प्रमाण पत्र

Wed, 12 Aug 2026 12:31 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 12 Aug 2026 12:31 AM IST
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Birth and death certificates won't be issued by the tehsil if more than two years have passed
मछलीशहर में एस डी एम से वार्ता करता अधिवक्ता संघ का प्रतिनिधि मंडल(संवाद)
मछलीशहर। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के पंजीकरण के नियमों में बदलाव किया गया है। नए प्रावधानों के तहत प्रमाण पत्र के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश होना जरूरी है। खासकर दो साल से ज्यादा पुराने जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी का आदेश अनिवार्य होगा। एसडीएम ने अधिवक्ता संघ के प्रतिनिधियों को जानकारी देते हुए कहा कि सभी लंबित प्रमाण पत्र निर्गत नहीं होंगे। उपजिलाधिकारी अजय उपाध्याय ने बताया कि नई व्यवस्था के अनुसार जन्म अथवा मृत्यु की घटना के 21 दिनों के भीतर पंजीकरण कराने पर प्रमाणपत्र निशुल्क जारी किया जाएगा। 21 दिन के बाद और एक साल के अंदर पंजीकरण कराने पर निर्धारित विलंब शुल्क देना होगा। वहीं, एक साल से ज्यादा और दो साल की अवधि के अंदर के मामलों में जिला मजिस्ट्रेट, एसडीएम या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति और सत्यापन के बाद ही पंजीकरण किया जा सकेगा। दो साल से ज्यादा पुराने मामलों में नियम और कड़े कर दिए गए हैं। ऐसे मामलों में अब कार्यकारी मजिस्ट्रेट के स्तर से पंजीकरण की अनुमति लेनी होगी। आवेदक को प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट से आदेश प्राप्त करना होगा। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत जन्म अथवा मृत्यु का पंजीकरण कराना होगा। एसडीएम अजय कुमार उपाध्याय ने बताया कि जन्म और मृत्यु का समय से पंजीकरण कराना बेहद जरूरी है। निर्धारित अवधि के भीतर पंजीकरण कराने से लोगों को अनावश्यक परेशानी से नहीं गुजरना पड़ेगा। उन्होंने अधिवक्ताओं और जरूरतमंद लोगों से अपील की कि जन्म और मृत्यु की घटनाओं का समय से पंजीकरण कराकर प्रमाण पत्र प्राप्त कर लें। नई व्यवस्था का उद्देश्य रिकॉर्ड को ज्यादा विश्वसनीय बनाना और फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र जारी होने पर प्रभावी रोक लगाना है। अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष जितेंद्र श्रीवास्तव के नेतृत्व में मिले प्रतिनिधिमंडल में महामंत्री आलोक विश्वकर्मा, हरिनायक तिवारी, भरत लाल यादव , इंदु प्रकाश सिंह,आरपी सिंह, सुरेन्द्र मणि शुक्ला एवं अन्य वकील शामिल रहे।
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