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जौनपुर: धनंजय सिंह के खिलाफ अपहरण और रंगदारी की बात से मुकरा वादी, मामले में गिरफ्तार भी हो चुके हैं पूर्व सांसद

Fri, 15 Apr 2022 06:31 PM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर
अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर Published by: उत्पल कांत Updated Fri, 15 Apr 2022 06:31 PM IST
सार

पूर्व सांसद धनंजय सिंह और उनके साथी पर अपहरण और रंगदारी आरोप लगाने वाला अदालत में मुकर गया। उसने बयान दिया कि न तो उसका अपहरण हुआ था और ना ही रंगदारी मांगी गई थी। 

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bahubali mp dhananjay singh kidnapping and extortion case plaintiff denied in  jaunpur court
पूर्व सांसद धनंजय सिंह - फोटो : सोशल मीडिया।

विस्तार

अपर सत्र न्यायाधीश (एमपी-एमएलए कोर्ट) की अदालत में नमामि गंगे के प्रोजेक्ट मैनेजर अभिनव सिंघल का अपहरण कराने, रंगदारी मांगने, षड्यंत्र तथा गालियां और धमकी देने के मामले में पूर्व सांसद धनंजय सिंह व उनके सहयोगी संतोष विक्रम कोर्ट में शुक्रवार को हाजिर हुए। वादी अभिनव सिंघल ने अपना बयान अदालत में दिया।

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सरकारी वकील अरुण ने बताया कि वादी अभिनव सिंघल अपहरण और रंगदारी की बात से मुकर गया और उसे पक्ष द्रोही घोषित किया गया। आरोपियों की ओर से जिरह करने वाले अधिवक्ता उमेश ने बताया कि वादी का कहना है कि वह स्वेच्छा से पूर्व सांसद धनंजय सिंह के घर गया था। उसका न तो अपहरण हुआ न रंगदारी मांगी गई और न ही धमकी दी गई। कोर्ट ने अगले गवाह सत्य प्रकाश को 21 अप्रैल को तलब किया है।

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ये है पूरा मामला

मुजफ्फरनगर निवासी अभिनव सिंघल ने 10 मई 2020 को थाना लाइनबाजार में अपहरण रंगदारी व अन्य धाराओं में धनंजय सिंह व उनके साथी विक्रम पर मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप लगाया था कि संतोष विक्रम दो साथियों के साथ वादी का अपहरण कर पूर्व सांसद के आवास पर ले गए थे। वहां धनंजय सिंह पिस्टल लेकर आए और गालियां देते हुए वादी को कम गुणवत्ता वाली सामग्री की आपूर्ति करने के लिए दबाव बनाए। इंकार करने पर धमकी देते हुए रंगदारी मांगी।

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मामले में गिरफ्तार भी हुए थे धनंजय सिंह

मुकदमा होने के बाद इस मामले में पूर्व सांसद गिरफ्तार हुए और बाद में जमानत उच्च न्यायालय इलाहाबाद से हुई। पिछली तारीख पर धनंजय व संतोष विक्रम ने आरोप मुक्ति प्रार्थना पत्र दिया था। इसमें कहा था कि वादी पर दबाव डालकर मुकदमा दर्ज करवाया गया। उच्चाधिकारियों के दबाव में कोर्ट में केस डायरी दाखिल की गई। वादी ने पुलिस को दिए बयान व धारा 164 के बयान में घटना का समर्थन नहीं किया है। शासकीय अधिवक्ता ने लिखित आपत्ति किया कि वादी की लिखित तहरीर पर मुकदमा दर्ज हुआ।

सीसीटीवी फुटेज, सीडीआर, व्हाट्सएप मेसेज, गवाहों के बयान के आधार पर आरोपियों के खिलाफ अपराध साबित है। वादी पर मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाया गया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद आरोपियों का प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया था। अगली तिथि पर दोनों आरोपी न्यायालय में उपस्थित हुए और आरोप तय हुआ था। कोर्ट ने वादी अभिनव को गवाही के लिए तलब किया था।
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