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अटाला मस्जिद प्रकरण: प्रयागराज से जौनपुर तक अदालती लड़ाई जारी, सबकी नजरें 16 दिसंबर पर, जानिए क्या है मामला

Wed, 11 Dec 2024 05:05 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर। Published by: प्रगति चंद Updated Wed, 11 Dec 2024 05:05 PM IST
सार

अटाला मस्जिद प्रकरण में अमीन की सुरक्षा के लिए बहस हुई। मामले में कोर्ट ने पुनः सुनवाई के लिए 16 दिसंबर की तिथि नियत की है। अब सबकी निगाहें इस तारीख पर लगी हैं। बताया जा रहा है कि इस दिन सर्वे का प्रारूप तय हो सकता है।  

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Atala Masjid dispute Court battle continues from Prayagraj to Jaunpur
मस्जिद को अटाला माता मंदिर बताने का मामला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जौनपुर की अटाला मस्जिद को लेकर कानूनी लड़ाई जोरों पर है। हिंदू पक्ष का कहना है कि कन्नौज के राजा विजय चंद्र ने अटला देवी का मंदिर बनवाया था। 14 वीं सदी में फिरोह शाह तुगलक ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनवा दी और वहां पूजा पाठ बंद हो गई। इसी मामले को लेकर स्वराज वाहिनी एसोसिएशन ने जौनपुर की सिविल कोर्ट में याचिका दायर की और सिविल कोर्ट ने याचिका को स्वीकार किया और 2 जुलाई को अमीन सर्वे का आदेश दिया। 30 जुलाई को सर्वे की टीम पहुंची जिसका भारी विरोध हुआ।

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बताया जा रहा है कि मस्जिद के सभी दरवाजे बंद कर दिए गए लिहाजा सर्वे टीम के लोग लौट गए। 31 जुलाई को सर्वे टीम ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट को दी कहा सर्वे करने गए तो भारी भीड़ हुई जिससे सर्वे पूरा नहीं हो पाया लिहाजा इसके लिए पर्याप्त सुरक्षा बल उपलब्ध हो। वहीं मुस्लिम पक्ष हाईकोर्ट की शरण में है और जौनपुर कोर्ट के फैसले को चैलेंज कर रहा है। हिंदू पक्ष ने सर्वे को पूरा कराने के लिए गुहार लगाई है और 16 दिसंबर को सर्वे का प्रारूप तय होना है कि सर्वे में कौन लोग जाएंगे। दोनो ओर से कितने लोग शामिल होंगे। 

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जौनपुर कोर्ट में हिंदू पक्ष की दलील

स्वराज वाहिनी एसोसिएशन और संतोष कुमार मिश्र द्वारा जौनपुर की सिविल कोर्ट में एक वाद दाखिल किया गया और उस वाद में मांग की गई कि विवादित संपत्ति अटाला देवी का मंदिर है। जहां सनातन धर्म के अनुयायियों को पूजा करने का अधिकार है। बताया गया है कि राजा विजय चंद्र द्वारा 13वीं शताब्दी में बनवाया गया यह एक हिंदू मंदिर था, जहां पूजा, सेवा और कीर्तन जैसे अनुष्ठान किए जाते थे।

कोर्ट से कब्जे के लिए प्रार्थना की गई और याचना की गई कि मुकदमे में प्रतिवादियों और अन्य गैर - हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाई जाए। हिंदू पक्ष ने ये आरोप लगाया है कि 13 वीं शताब्दी में फिरोज तुगलक के भारत पर आक्रमण के बाद उक्त मंदिर को आंशिक रूप से ध्वस्त कर दिया गया। इसके खंभों पर मस्जिद का निर्माण किया गया।

वादी आगे तर्क देते हैं कि तुगलक ने हिंदुओं को उस स्थान पर प्रवेश करने से रोका। जो मूल रूप से हिंदू कारीगरों द्वारा पारंपरिक शैली में निर्मित हिंदू मंदिर था। यह भी तर्क दिया गया कि विचाराधीन संरचना कभी मस्जिद नहीं थी बल्कि हिंदू मंदिर था। हिंदू पक्ष का दावा है कि इमारत में हिंदू स्थापत्य शैली से जुड़े प्रमाण आज भी बरकरार हैं जो रीति - रिवाजों को दर्शाते हैं। 
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इलाहाबाद हाइकोर्ट में मस्जिद पक्ष ने दी है दलील

हाईकोर्ट में हिंदू पक्ष की याचिका और जौनपुर कोर्ट के आदेश को चैलेंज करते हुए मुस्लिम पक्ष ने तर्क दिया है जैसा कि वादीगण द्वारा दावा किया गया है कि राजा विजय चंद्र ने धालगर टोला में या उस स्थान पर जहां अटाला मस्जिद मौजूद है वहां अटाला देवी को समर्पित किसी मंदिर का निर्माण नहीं कराया और न ही हिंदू धर्म के अनुयायियों ने कभी यहां पहले या फिर वर्तमान में पूजा की है। यह भी तथ्य रखा है कि मस्जिद के स्तंभों पर हिंदू संस्कृति या उनकी निर्माण शैली के संकेत मौजूद नहीं है।

यह भी जानकारी दी गई है कि अटाला मस्जिद की नींव वर्ष 1376 में रखी गई थी और 1408 में इसका निर्माण पूरा हुआ था। वक्फ अताला मस्जिद ने हाल ही में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दोनों आदेशों को चुनौती दी। दलील दी कि ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका केवल गैर-स्थायी आधार पर खारिज कर दी गई। यह देखते हुए कि मामले पर विचार करने की आवश्यकता है, जिस पर सुनवाई करते हुए पीठ ने वादी को मामले में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता वक्फ अटाला मस्जिद जौनपुर का मामले में वाद को दोषपूर्ण बताया गया है क्योंकि वादी, सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत रजिस्टर्ड सोसाइटी है, जो न्यायिक व्यक्ति नहीं है।

इसलिए प्रतिनिधि क्षमता में मुकदमा दायर करने के लिए सक्षम नहीं है। कोर्ट से याचना की गई है कि इन आधारों पर शिकायत खारिज कर देनी चाहिए। इसके अलावा एक तर्क और दिया गया है कि इस पूरे मामले में वक्फ बोर्ड को शिकायत का पक्ष नहीं बनाया गया। कहा गया कि अदालत ने मुकदमे की संवेदनशील प्रकृति और इसे स्थापित करने के चतुर और शरारती तरीके को देखे बिना यांत्रिक तरीके से आगे बढ़कर इस शरारत को बढ़ावा दिया है।
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निगाहें 16 दिसंबर पर

सिविल जज जूनियर डिवीजन सुधा शर्मा की अदालत में मंगलवार को अटाला मस्जिद प्रकरण में स्वराज वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष वादी संतोष मिश्रा के अधिवक्ता ने पूर्व में दिए गए प्रार्थना पत्र पर बहस की। कहा कि अमीन को विवादित स्थल का निरीक्षण, उनकी रिपोर्ट व नक्शा तैयार करने के लिए सुरक्षा प्रदान करने के संबंध में पुलिस अधीक्षक को निर्देशित किया जाए। कोर्ट ने सुनवाई के लिए 16 दिसंबर की तिथि नियत की है।

वादी संतोष कुमार मिश्रा की ओर से प्रार्थना पत्र दिया गया था कि विवादित स्थल के निरीक्षण के लिए अमीन रामस्वरात मिश्रा मौके पर पहुंचे थे। जहां प्रतिवादी मिले और विवादित इमारत के सभी दरवाजे अंदर से बंद कर दिए, जिससे अमीन इमारत के चारों तरफ निरीक्षण करके लौट आए और कोर्ट में रिपोर्ट पेश कर सुरक्षा बल मांगा। वादी ने कोर्ट से मांग की कि निरीक्षण के लिए अमीन को सुरक्षा बल प्रदान करने के लिए पुलिस अधीक्षक जौनपुर को पत्र लिखकर निर्देशित किया जाए जिससे कोर्ट के आदेश का अनुपालन हो सके। जानकारी के अनुसार इसी दिन सर्वे का प्रारूप तय होना है।

मामले के बाद शहर का माहौल
संभल विवाद के बाद अब अटाला मस्जिद का विवाद सामने है। जौनपुर का रहने वाला हर कोई इस मामले पर टकटकी लगाए बैठा है और चौक चौराहों पर चर्चा का दौर जारी है। इसके आलावा पुलिस ने अपना सूचना तंत्र सक्रिय कर दिया है ताकि माहौल शांतिपूर्ण बना रहे। अब देखना ये होगा कि आने वाली अगली तारीख को कोर्ट जब सर्वे का स्वरूप निर्धारित करती है तो वो तस्वीर किस रूप में सामने आती है?
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