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अलम-ताबूत का निकला जुलूस
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Mon, 27 Jun 2016 12:49 AM IST
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हजरत अली की शहादत पर नगर में निकला अलम, ताबूत के जुलूस में शामिल लोग।
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यौमे शहादते इमाम अली पर रविवार को शबीहे ताबूत का जुलूस निकाला गया। इस दौरान अजादारों ने नौहा मातम करते हुए उन्हें खिराजे अकीदत पेश की। वहीं अजमेरी की मस्जिद शाह अता हुसैन व बलुआघाट में मजलिसें आयोजित हुईं। शाम करीब चार बजे दोनों जुलूस नगर के चहारसू चौराहे पर पहुंचे।
जहां अलम को तुर्बत से मिलाया गया और दोनों जुलूस एक साथ शाह पंजा स्थित कदम रसूल के लिए रवाना हुए।इसके पूर्व अजमेरी मोहल्ला में मजलिस की शुरुआत मोहम्मद अब्बास काजमी एवं उनके साथियों ने सोजख्वानी से की।
इसके बाद मजलिस को मौलाना सैय्यद सफ दर हुसैन जैदी व सरबराह जामिया जाफरी सादिक ने संबोधित किया। कहा कि हजरत अली का पूरा जीवन गरीबों, यतीमों के प्रति समर्पित था। वो यतीमों की इस प्रकार मदद करते थे कि उन्हें पता भी नहीं चलता था कि मदद करने वाला कौन है।
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हजरत अली ने इस्लाम की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। मजलिस के बाद जुलूसे अलम व ताजिया निकाला गया। इसके अलावा नवाब युसूफ रोड पर तकरीर हुई। इसके बाद जुलूस आगे बढ़ा। कोतवाली चौराहे पर अंजुमन ने नौहा मातम किया। दूसरी तकरीर चहारसू चौराहे पर हुई।
बलुआघाट के इमामबाड़ा में मजलिस को मौलाना कैसर अब्बास ने पढ़ा। यहां से अंजुमन हुसैनिया के हमराह एक जुलूस किला होता हुआ इस जुलूस में आकर मिलाया गया। चहारसू पर मोहम्मद हसन ने तकरीर करते हुए कहा कि हजरत अली ने ऐसी न्याय व्यवस्था बनाई जो आज भी मिसाल है।
उनकी हुकूमत में अल्पसंख्यकों के हित पूरी तरह से सुरक्षित थे। जुलूस चहारसू मातमी अंजुमनों के हमराह ओलन्दगंज शाहीपुल से अपने कदीम रास्ते से होते हुए पंजे शरीफ तक गया। जहां पर जुलूस की समाप्ति नमाजे मगरबैन को बजमात अदा करने से हुई।
जुलूस में अंजुमन हुसैनिया के सदर डा. जौहर अली खां, सै.अकबर हुसैन, फैसल हसन तबरेज, आजम जैदी, इसरार हुसैन, मेंहदी रजा, जहीर हसन, तहसीन शाहिद, अकेला शहजादे, अली मंजर डेजी, वसीम हैदर, हाजी असगर हुसैन जैदी, जमीर हसन आदि थे।
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जहां अलम को तुर्बत से मिलाया गया और दोनों जुलूस एक साथ शाह पंजा स्थित कदम रसूल के लिए रवाना हुए।इसके पूर्व अजमेरी मोहल्ला में मजलिस की शुरुआत मोहम्मद अब्बास काजमी एवं उनके साथियों ने सोजख्वानी से की।
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इसके बाद मजलिस को मौलाना सैय्यद सफ दर हुसैन जैदी व सरबराह जामिया जाफरी सादिक ने संबोधित किया। कहा कि हजरत अली का पूरा जीवन गरीबों, यतीमों के प्रति समर्पित था। वो यतीमों की इस प्रकार मदद करते थे कि उन्हें पता भी नहीं चलता था कि मदद करने वाला कौन है।
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हजरत अली ने इस्लाम की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। मजलिस के बाद जुलूसे अलम व ताजिया निकाला गया। इसके अलावा नवाब युसूफ रोड पर तकरीर हुई। इसके बाद जुलूस आगे बढ़ा। कोतवाली चौराहे पर अंजुमन ने नौहा मातम किया। दूसरी तकरीर चहारसू चौराहे पर हुई।
बलुआघाट के इमामबाड़ा में मजलिस को मौलाना कैसर अब्बास ने पढ़ा। यहां से अंजुमन हुसैनिया के हमराह एक जुलूस किला होता हुआ इस जुलूस में आकर मिलाया गया। चहारसू पर मोहम्मद हसन ने तकरीर करते हुए कहा कि हजरत अली ने ऐसी न्याय व्यवस्था बनाई जो आज भी मिसाल है।
उनकी हुकूमत में अल्पसंख्यकों के हित पूरी तरह से सुरक्षित थे। जुलूस चहारसू मातमी अंजुमनों के हमराह ओलन्दगंज शाहीपुल से अपने कदीम रास्ते से होते हुए पंजे शरीफ तक गया। जहां पर जुलूस की समाप्ति नमाजे मगरबैन को बजमात अदा करने से हुई।
जुलूस में अंजुमन हुसैनिया के सदर डा. जौहर अली खां, सै.अकबर हुसैन, फैसल हसन तबरेज, आजम जैदी, इसरार हुसैन, मेंहदी रजा, जहीर हसन, तहसीन शाहिद, अकेला शहजादे, अली मंजर डेजी, वसीम हैदर, हाजी असगर हुसैन जैदी, जमीर हसन आदि थे।