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अभ्युदय कोचिंग : तीन वर्षों में 399 ने लिया दाखिला, चुने गए सिर्फ 7
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जौनपुर। जिला समाज कल्याण विभाग की तरफ से पिछले तीन साल से गरीबों छात्रों को सिविल सर्विसेज व अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों के लिए अभ्युदय कोचिंग चलाई जा रही है। यह कोचिंग रोजाना शाम को जनक कुमारी इंटर कॉलेज में चलाई जा रही है। इसमें हर साल 50 से 70 अभ्यर्थियों का दाखिला लिया जा रहा है लेकिन पिछले तीन साल में महज सात छात्रों का ही चयन हो सका है। हर साल प्रवेश परीक्षा कराकर केवल दाखिले लिए जा रहे हैं। साल 2022-23 में 70 युवाओं ने पंजीकरण कराया था। इसमें एक को भी सफलता नहीं मिली। वर्ष 2023-24 में 70 में एक अभ्यर्थी नीट की परीक्षा में सफल हुआ। हालांकि 2024-25 में 259 में अब तक छह अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। इसमें एक अभ्यर्थी जेई मेंस, पांच अभ्यर्थी यूपीपी (उत्तर प्रदेश पुलिस) में चयनित हुए। विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए 40 विशेषज्ञ शिक्षकों का पैनल नामित किया गया है। इसमें अलग-अलग विषय के दो से लेकर चार शिक्षक हैं। तीन साल में सफलता पर नजर डाली जाए तो एक से दो फीसदी ही है। हर साल प्रवेश परीक्षा के जरिए स्क्रीनिंग करके तैयारी के लिए गंभीर छात्रों का चयन किया जाता है।
सात मई तक लिया जाएगा आवेदन -मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग के लिए 2025-26 के सत्र के लिए आवेदन लिया जा रहा है। सात अप्रैल से सात मई तक छात्र-छात्राएं इसके लिए आवेदन कर सकेंगे। अभी तक 100 से अधिक आवेदन आए हैं।
शिक्षकों पर खर्च होते हैं 8 से ं9 लाख -मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग में पढ़ाने वाले विशेषज्ञ शिक्षकों को प्रति व्याख्यान दो हजार रुपये दिए जाते हैं। वहीं डिग्री कॉलेज के शिक्षकों को 500 रुपये प्रति व्याख्यान जबकि सेवानिवृत्त अध्यापक को 1000 रुपये दिया जाता है। सभी शिक्षकों पर साल भर में औसतन आठ से नौ लाख खर्च होते हैं। तीन सालों में करीब 25 लाख तक का भुगतान किया गया होगा।
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सीडीओ दो बार रोक चुके भुगतान-पूर्व सीडीओ साई तेजा सीलम ने अभ्युदय कोचिंग के पढ़ाने वाले फैकल्टी का दो बार भुगतान रोका था। उनका कहना था कि शिक्षक कैसे पढ़ा रहे हैं कि अभ्यर्थी प्रतियोगी परीक्षाएं नहीं पास कर पा रहे हैं। उनका कहना था कि 25 बच्चों का पीसीएस में चयन कराया जाए। शिक्षकों के निवेदन पर जिलाधिकारी के आदेश पर इनका भुगतान किया गया।
कोचिंग में पढ़कर पिछले साल एक छात्र ने नीट, इस साल एक छात्र जेई व पांच छात्र का चयन यूपीपी में हुआ है। विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से यह कम है। कक्षाएं प्रतिदिन चलती हैं। अभ्यर्थियों को जरूरी किताबें भी दी जाती हैं। सफलता प्रतिशत कम होने के पीछे मन लगाकर न पढ़ना है। इसको लेकर विद्यार्थियों को लगातार गाइड किया जाता है। हर साल खर्च के नाम पर एक से दो लाख रुपये आते हैं। इसमें सेंटर के फर्नीचर से लेकर छोटे-मोटे खर्च देखे जाते हैं। - नीरज पटेल, जिला समाज कल्याण अधिकारी।
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सात मई तक लिया जाएगा आवेदन -मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग के लिए 2025-26 के सत्र के लिए आवेदन लिया जा रहा है। सात अप्रैल से सात मई तक छात्र-छात्राएं इसके लिए आवेदन कर सकेंगे। अभी तक 100 से अधिक आवेदन आए हैं।
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शिक्षकों पर खर्च होते हैं 8 से ं9 लाख -मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग में पढ़ाने वाले विशेषज्ञ शिक्षकों को प्रति व्याख्यान दो हजार रुपये दिए जाते हैं। वहीं डिग्री कॉलेज के शिक्षकों को 500 रुपये प्रति व्याख्यान जबकि सेवानिवृत्त अध्यापक को 1000 रुपये दिया जाता है। सभी शिक्षकों पर साल भर में औसतन आठ से नौ लाख खर्च होते हैं। तीन सालों में करीब 25 लाख तक का भुगतान किया गया होगा।
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सीडीओ दो बार रोक चुके भुगतान-पूर्व सीडीओ साई तेजा सीलम ने अभ्युदय कोचिंग के पढ़ाने वाले फैकल्टी का दो बार भुगतान रोका था। उनका कहना था कि शिक्षक कैसे पढ़ा रहे हैं कि अभ्यर्थी प्रतियोगी परीक्षाएं नहीं पास कर पा रहे हैं। उनका कहना था कि 25 बच्चों का पीसीएस में चयन कराया जाए। शिक्षकों के निवेदन पर जिलाधिकारी के आदेश पर इनका भुगतान किया गया।
कोचिंग में पढ़कर पिछले साल एक छात्र ने नीट, इस साल एक छात्र जेई व पांच छात्र का चयन यूपीपी में हुआ है। विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से यह कम है। कक्षाएं प्रतिदिन चलती हैं। अभ्यर्थियों को जरूरी किताबें भी दी जाती हैं। सफलता प्रतिशत कम होने के पीछे मन लगाकर न पढ़ना है। इसको लेकर विद्यार्थियों को लगातार गाइड किया जाता है। हर साल खर्च के नाम पर एक से दो लाख रुपये आते हैं। इसमें सेंटर के फर्नीचर से लेकर छोटे-मोटे खर्च देखे जाते हैं। - नीरज पटेल, जिला समाज कल्याण अधिकारी।